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जमीन की बढ़ी कीमतें तो बिगड़ गई अफसरों की नीयत

Fri, 09 Jan 2015 12:53 PM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 09 Jan 2015 12:53 PM IST
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Increase in land price will change officers intention.

जमीन की कीमतें दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ने से अफसरों की नीयत खराब हो रही है। लखनऊ व गाजियाबाद में नगर निगम की जमीनें बिल्डरों को देने का खुलासा होने के बाद स्थानीय निकाय निदेशालय ने निकाय संपत्तियों को ऑनलाइन करने का निर्देश देने के साथ इसकी सूचना भी मांगी थी।

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इसके बाद छह महीने बीतने को हैं, लेकिन सभी निकायों ने निदेशालय को इसकी सूचना नहीं दी है। अब स्थानीय निकाय निदेशक पीके सिंह ने 10 दिन के अंदर सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। नगर निगम, पालिका परिषद व नगर पंचायतों की जमीनें शहरी क्षेत्रों में हैं।
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इन जमीनों या अन्य संपत्तियों की देखरेख के लिए निकायों में संपत्ति विभाग है, जिसमें तहसीलदार से लेकर लेखपाल तक हैं। इसके बावजूद आए दिन इन संपत्तियों पर अवैध कब्जा या फिर अधिकारियों की साठगांठ से इन्हें बिल्डरों को दिए जाने की शिकायतें मिलती रहती हैं।

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अधिकारियों ने की बिल्डरों से सांठगांठ

Increase in land price will change officers intention.

लखनऊ में गोमतीनगर जैसे पॉश इलाके में अपट्रॉन बिल्डिंग हो या फिर गाजियाबाद में नगर निगम की जमीन, अधिकारियों ने साठगांठ करके बिल्डरों को दे दी। इसका खुलासा होने के बाद शासन से लेकर स्थानीय निकाय निदेशालय तक हड़कंप मच गया था।

अधिकारियों ने तय किया कि निकायों की सभी संपत्तियों का ब्यौरा ऑनलाइन कर इसे स्थानीय निकाय निदेशालय के साथ ही निकायों की वेबसाइट पर डाला जाएगा। इसके बावजूद अधिकतर निकायों ने निदेशालय को सूचना उपलब्ध नहीं कराई है।

प्रदेश में 14 नगर निगम हैं। इनमें से मुरादाबाद व झांसी ने ही सूचनाएं उपलब्ध कराई हैं। 194 पालिका परिषदों में मात्र 17 और 423 नगर पंचायतों में मात्र 16 ने ही सूचना दी है कि उनके यहां कितनी संपत्तियां हैं। स्थानीय निकाय निदेशक ने सूचना न देने वाले निकायों के अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
 
निकायों में जमीनें इतनी कीमती हैं कि इन्हें तहसीलदार और लेखपालों की मिलीभगत से बिल्डरों को दिया जा रहा है। लखनऊ-कानपुर रोड एक एक बिल्डर को नगर निगम की जमीन दे दी गई। बिल्डर की पहुंच के चलते इसे खाली नहीं कराया जा सका। गोमतीनगर और रिंग रोड समेत कई इलाकों में नगर निगम की जमीनों पर कब्जा हुआ है।

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