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Lucknow News: आईवीएफ में एआई बताएगा मरीज के लिए जरूरी जांच

Mon, 28 Sep 2026 03:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 03:00 AM IST
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In IVF, AI will determine the tests required for the patient.
प्रतीकात्मक।
लखनऊ। बार-बार आईवीएफ असफल होने या गर्भपात के मामलों में अब मरीज की स्थिति के अनुसार जरूरी जांच तय करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मददगार साबित हो सकता है। इससे अनावश्यक जांच से बचने के साथ इलाज का खर्च भी कम किया जा सकेगा। केजीएमयू स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) की अध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल ने रविवार को एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
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‘आईवीएफ से आगे : हर मरीज के लिए सही इलाज, एआई और रोबोट से सर्जरी’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अंजू ने कहा कि कई बार मरीजों को रूटीन जांच की लंबी सूची दे दी जाती है, जबकि हर जांच इलाज की दिशा तय करने में जरूरी नहीं होती। मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और पिछली रिपोर्ट के आधार पर एआई डॉक्टर को आवश्यक जांच चुनने में मदद कर सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर ही करेंगे।
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केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि बेवजह जांच कम होने से मरीजों का समय और इलाज का खर्च बच सकता है। बार-बार आईवीएफ असफल होने वाले मरीजों के इलाज की योजना बनाने में भी एआई उपयोगी हो सकता है। कार्यक्रम में विधायक डॉ. नीरज बोरा, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह समेत बड़ी संख्या में डॉक्टर मौजूद रहे।
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अधिक उम्र में बढ़ता है गर्भावस्था का जोखिम
डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि आईवीएफ सामान्य तौर पर सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ गर्भावस्था में जटिलताओं का खतरा बढ़ता है। 45 से 50 वर्ष की उम्र में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे महिला और भ्रूण दोनों के लिए खतरा बढ़ जाता है। अधिक उम्र में कुछ महिलाओं को अपने अंडाणुओं के बजाय डोनर एग की आवश्यकता पड़ सकती है।

सरकारी संस्थानों में कम खर्च
डॉ. अंजू अग्रवाल ने बताया कि सरकारी संस्थानों में आईवीएफ का इलाज निजी केंद्रों की तुलना में कम खर्च में हो सकता है। प्रमुख डिस्पोजेबल सामग्री के लिए करीब 40 हजार रुपये जमा होते हैं। इंजेक्शन और अन्य दवाओं को मिलाकर कुल खर्च करीब 80 से 90 हजार रुपये तक पहुंच सकता है।
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