टीजीटी-पीजीटी परीक्षा दे रहे हैं तो पढ़े खबर
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने टीजीटी-पीजीटी परीक्षा के प्रवेश पत्रों को ऑनलाइन करने के साथ उसमें संशोधन की भी व्यवस्था की गई है। चयन बोर्ड की ओर से 22 जनवरी से शुरू हो रही टीजीटी-पीजीटी परीक्षा के प्रवेश पत्रों को वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।
अभ्यर्थी अपने प्रवेश पत्र की जानकारी चयन बोर्ड की वेबसाइट upsessb.org पर विषय एवं जन्मतिथि का विवरण भरकर देख सकते हैं। प्रवेश पत्र में गड़बड़ी की दशा में अब अभ्यर्थियों को चयन बोर्ड के चक्कर नहीं लगाने होंगे, वेबसाइट पर ही अपनी शिकायत दर्ज करवा देने के बाद गड़बड़ी ठीक कर दी जाएगी।
चयन बोर्ड मोबाइल नंबर जारी करेगा, इस पर भी अभ्यर्थी अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। प्रवेश पत्र की गड़बड़ी में सुधार के लिए अभ्यर्थी आवेदन देकर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
प्रधानाचार्य साक्षात्कार पर लगेगी रोक
शासन की ओर से प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के लिए प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापकों के साक्षात्कार पर रोक के बाद भी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 12 जनवरी से साक्षात्कार की तिथि घोषित कर दी गई है।
चयन बोर्ड की ओर से मनमाने तरीके से जून माह में बिना सचिव की सहमति के साक्षात्कार करवाने के आदेश पर शासन एवं कोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणी के बाद अब साक्षात्कार पर रोक लगना तय हो गया है। इस बारे में चयन बोर्ड के अध्यक्ष का भी कहना है कि फिलहाल शासन ने साक्षात्कार पर लगी रोक हटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता टीजीटी-पीजीटी 2013 परीक्षा कराने की है। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार नई सूची के आधार पर कराया जाएगा। चयन बोर्ड के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि जून में साक्षात्कार मानक न पूरा होने के कारण नहीं हो सका था।
वही परेशानी इस बार भी साक्षात्कार में आएगी। इंटरव्यू के लिए नई सूची तैयार करने और 21 दिन के अंदर साक्षात्कार के लिए पत्र इस बार भी जारी होने में संदेह है। 25 जनवरी को टीजीटी परीक्षा शुरू होने के कारण और चयन बोर्ड के दो सदस्यों का कार्यकाल चार फरवरी को खत्म होने के कारण भी साक्षात्कार की तिथि आगे बढ़ना तय हो गया है।
तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. आशाराम की ओर से जून में मनमाने तरीकेसे साक्षात्कार करवाने तथा तत्कालीन सचिव नीना श्रीवास्तव की ओर से इस प्रक्रिया के विरोध के कारण शासन ने साक्षात्कार की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी।