मदरसा शिक्षकों का बढ़ा मानदेय, अब मिलेंगे 15 हजार रुपये महीना
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केंद्र सरकार के बाद राज्य की अखिलेश यादव सरकार ने भी मदरसा आधुनिकीकरण योजना में पढ़ाने वाले शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने का निर्णय किया है। अब स्नातक शिक्षकों को भी परास्नातक शिक्षकों के बराबर मानदेय दिया जाएगा। यानी अब इन्हें 8000 रुपये के बजाय 15 हजार रुपये महीना मानदेय दिया जाएगा।
सोमवार को प्रदेश कैबिनेट ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब ऐसे शिक्षक जिनके पास स्नातक के साथ बीएड की उपाधि है उन्हें आठ हजार के बजाय 15 हजार मानदेय मिलेगा।
दरअसल, केंद्र सरकार की मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत सूबे के सैकड़ों मदरसों को अनुदान मिलता है। इसमें शिक्षकों की दो श्रेणियां हैं। पहली श्रेणी परास्नातक शिक्षकों की व दूसरी श्रेणी स्नातक शिक्षकों की है। इन मदरसों में आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए शिक्षकों को केंद्र सरकार की ओर से मानदेय दिया जाता है। इसमें प्रदेश सरकार भी अपना अंश अलग से जोड़ती है।
अभी तक इस तरह दिया जाता था मानदेय
अभी स्नातक के साथ ही बीएड उपाधि वाले शिक्षकों को केंद्र सरकार की ओर से 6000 रुपये मानदेय मिल रहा था। प्रदेश सरकार इसमें 2000 रुपये का अंश और जोड़ती है। ऐसे में इन्हें 8000 रुपये महीना मानदेय मिलता था।
हाल ही में केंद्र सरकार ने स्नातक व परास्नातक की अलग-अलग श्रेणियों को एक कर दिया है। यानी अब स्नातक शिक्षकों को भी 12 हजार रुपये महीना केंद्र सरकार की तरफ से मिलेगा।
इसे देखते हुए अब अखिलेश सरकार ने भी अपना अंश 2000 रुपये के बजाय 3000 रुपये कर दिया है। ऐसे में अब स्नातक शिक्षकों को भी परास्नातक शिक्षकों की तरह 15 हजार रुपये महीना मिलेगा। इस फैसले से सरकार पर 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा।
पतंजलि सूबे में 2118 करोड़ का करेगी निवेश
यूपी में बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद कंपनी की इकाइयां लगाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रदेश कैबिनेट ने पतंजलि की 2118 करोड़ की परियोजनाओं के प्रस्तावों पर सहमति दे दी।
पतंजलि आयुर्वेद कंपनी ने कृषि, खाद्य, हर्बल, पशु आहार, डेयरी उत्पाद व फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथॉरिटी व झांसी में 2118.34 करोड़ की दो इकाइयों की स्थापना का प्रस्ताव किया है। कंपनी यमुना एक्सप्रेस-वे पर 1666.80 करोड़ रुपये जबकि झंासी में 451.63 करोड़ रुपये निवेश करेगी।
मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बताया कि पतंजलि के निवेश से 8000 लोगों को प्रत्यक्ष जबकि 50 हजार को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। कंपनी ने बुंदेलखंड के अलावा पूर्वांचल व मध्यांचल में भी फीडर इकाइयां स्थापित करने का प्रस्ताव किया है।
मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण मिशन योजना को कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण मिशन योजना’ को लागू करने के लिए हरी झंडी दे दी है। यह निर्णय प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास, पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और स्टेक होल्डर्स की आय में वृद्धि की संभावनाओं के मद्देनजर किया गया है।
इस मिशन के तहत नवीन खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को स्थायी पूंजी निवेश के लिए रियायतें और वित्तीय अनुदान दिया जा सकेगा।
मिशन के तहत सात योजनाएं हैं। इनमें खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना, कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन व प्रसंस्करण, अवस्थापना सुविधाओं का सृजन, ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी प्रोसेसिंग सेंटर व कलेक्शन सेंटर की स्थापना, रीफर व्हीकल्स व मोबाइल प्री कूलिंग वैन, 25 करोड़ रुपये से अधिक का स्थायी पूंजी निवेश करने वाली खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, खाद्य प्रसंस्करण विषय में डिग्री, डिप्लोमा व सर्टिफिकेट कोर्स चलाने के लिए अवस्थापना सुविधाओं और खाद्य प्रसंस्करण कौशल विकास शामिल हैं।
वित्तीय रियायतों व अनुदान की सुविधाएं होंगी अलग-अलग
योजना के तहत विभिन्न इकाइयों के लिए रियायतें व वित्तीय अनुदान की सुविधाएं अलग-अलग होंगी। यह मिशन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित राज्य खाद्य प्रसंस्करण विकास परिषद (एसएफ पीडीसी) के अंतर्गत संचालित किया जाएगा। राज्यस्तरीय कार्यकारी समिति (एसएलईसी) मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संचालित होगी। निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण इस योजना के पदेन मिशन निदेशक होंगे।
इस योजना के लिए चालू वित्त वर्ष 2016-17 के लिए 42.4865 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया गया है। हर वर्ष 45 करोड़ और मिशन की 5 वर्ष की अवधि के लिए 225 करोड़ का व्यय अनुमानित है। मिशन के व्यय भार में केंद्र सरकार की भागीदारी नहीं है।
मुख्यमंत्री खाद्य प्रसंस्करण मिशन योजना अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 वर्षों के लिए मान्य होगी। योजना में ऑनलाइन मिले प्रस्तावों पर पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर अमल करते हुए विचार किया जाएगा। यह योजना पूरे प्रदेश में लागू होगी।
गरीब लोगों को बड़ा मकान देने का किया फैसला
राज्य सरकार ने गरीब लोगों को अब बड़ा मकान देने का फैसला किया है। इसके लिए दुर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और अल्प आय वर्ग (एलआईजी) श्रेणी के मकानों का क्षेत्रफल बड़ा किया जाएगा।
सरकार ने इसके लिए आवासीय सुविधा से संबंधित नीति में संशोधन कर दिया है। तैयार प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अब ईडब्लूएस श्रेणी के मकान के लिए बिल्टअप एरिया 35 से 40 वर्ग मीटर और एलआईजी के लिए 41 से 60 वर्ग मीटर तय किया गया है। संबंधित नीति में कई और बदलाव भी किए गए हैं।
इससे पहले ईडब्लूएस श्रेणी के मकान का बिल्टअप एरिया 25 से 35 और एलआईजी मकान के लिए 35 से 48 वर्ग मीटर निर्धारित था। दरअसल, दोनों श्रेणी के मकानों के लिए बिल्टअप एरिया कम होने और इसकी पात्रता के लिए तय एक लाख की आय सीमा के कारण बिल्डरों को खरीददार नहीं मिल रहे थे।
अभी तक नियम बन रहे थे रोड़ा
नियमों की बाध्यता के चलते इस श्रेणी के मकान तो बन रहे थे, लेकिन उनकी बिक्री नहीं हो पा रही थी। इससे सार्वजनिक, निजी व सहकारी क्षेत्र से जुड़े बिल्डरों के अलावा विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद को नुकसान हो रहा था।
नए प्रस्ताव के ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणी के मकान बनाने के लिए निर्धारित निर्माण लागत सीमा (सीलिंग कास्ट) को भी संशोधित किया गया है।
अब ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 4.50 लाख और एलआईजी के लिए नौ लाख रुपये का सिलिंग कास्ट तय की गई है। इससे पहले यह कास्ट क्रमश: 3.25 लाख और सात लाख रुपये तय थी।
दोनों श्रेणी के मकानों के लिए वार्षिक आय व सीलिंग कॉस्ट बढ़ाये जाने से जहां लाभार्थी परिवारों को रहने लायक मकान उपलब्ध हो सकेगा, वहीं अधिक से अधिक लोगों को योजना का सीधा लाभ मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।
कारागार विभाग में भी पुलिस सेवा बोर्ड करेगा भर्ती
प्रदेश सरकार ने पुलिस सेवा भर्ती व प्रोन्नति बोर्ड के शासनादेश में संशोधन कर दिया है। अब कारागार विभाग के अराजपत्रित कर्मियों की भर्ती भी इसी बोर्ड से हो सकेगी। सोमवार को कैबिनेट ने इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
मृतक आश्रित कोटे से कांस्टेबल भर्ती में शारीरिक दक्षता में छूट
कैबिनेट ने मृत पुलिस कर्मियों के आश्रितों को पुलिस बल में कांस्टेबल व समकक्ष पदों पर भर्ती में शारीरिक दक्षता में छूट देने का निर्णय लिया है।
सिविल पुलिस-पीएसी में कांस्टेबल, अग्निशमन विभाग फायरमैन और कर्मशाला कर्मचारी के पद के लिए मृतक आश्रित कोटे में आवेदन करने वालों को न्यूनतम लंबाई में 2 सेंटीमीटर के स्थान पर 3 सेंटीमीटर की छूट दी जाएगी।
इसके साथ ही, जो पुरुष अभ्यर्थी को 4.8 किलोमीटर की दौड़ 27 मिनट के स्थान पर 30 मिनट पूरी करने की छूट होगी। इसी तरह, महिला अभ्यर्थी को 2.4 किलोमीटर की दौड़ 16 मिनट के स्थान पर 19 मिनट में पूरी करने की छूट मिलेगी।
अब कांस्टेबिल की तर्ज पर होगी बंदी रक्षकों की भर्ती
प्रदेश में अब पुलिस कांस्टेबिल की तर्ज पर जेलों में तैनात होने वाले बंदी रक्षकों की भर्ती की जाएगी। इसके लिए अखिलेश यादव की कैबिनेट ने सोमवार को जेल वार्डर संवर्ग सेवा नियमावली को मंजूरी दे दी है। इनकी भर्ती भी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड करेगा।
नियमावली में जेल वार्डर की शारीरिक अर्हता, भर्ती प्रक्रिया आदि पुलिस कांस्टेबिल के अनुरूप रखी गई है। नियमावली को मंजूरी मिलने से इनकी भर्ती भी आसान हो जाएगी।
अभी तक कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग में बंदीरक्षक संवर्ग के कार्मिकों की तीन अलग-अलग सेवा नियमावलियां थीं। इनमें रिजर्व बंदीरक्षक, महिला बंदीरक्षक व अंतर्कारा हैं। इन सभी को एक कर अब जेल वार्डर नाम रख दिया गया है।
पुलिस सेवा नियमावली को मंजूरी
उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा नियमावली 2016 को मंजूरी मिल गई है। अभी तक उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा में पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक ज्येष्ठ वेतनमान, अपर पुलिस अधीक्षक के पदों पर चयन, पदोन्नति, प्रशिक्षण, वेतनमान, नियुक्ति एवं स्थायीकरण को विनियमित करने की दृष्टि से चार मई 1942 को उत्तर प्रदेश सर्विस रूल्स 1942 लागू थी।
इसमें अब तक 12 संशोधन हो चुके हैं। अब सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा नियमावली को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब विभागीय परीक्षा समाप्त करने, संवर्ग में काडर रिव्यू के बाद पदों की संख्या में वृद्धि होने एवं अपर पुलिस अधीक्षक उच्च वेतनमान 37400-67000 व ग्रेड पे 10 हजार के अतिरिक्त 10 पदों का सृजन जैसे संशोधन भी शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश रेडियो अधीनस्थ सेवा संशोधन नियमावली मंजूर
अखिलेश यादव की कैबिनेट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश रेडियो अधीनस्थ सेवा द्वितीय संशोधन नियमावली को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब हेड ऑपरेटरों के प्रमोशन आसानी से हो सकेंगे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश पुलिस लिपिक, लेखा एवं गोपनीय सहायक संवर्ग सेवा संशोधन नियमावली को भी मंजूरी मिल गई है। इससे लिपिकों की भर्ती प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
लखनऊ में होगी फिल्म, टेलीविजन एवं आर्ट्स संस्थान की स्थापना
राज्य सरकार ने प्रदेश फिल्म, मीडिया एंव मनोरंजन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए लखनऊ में फिल्म, टेलीविजन एवं लिबरल आर्ट संस्थान स्थापित करने का फैसला किया है। इससे संबंधित प्रस्तावत को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है।
यह संस्थान एक स्वायत्तशासी संस्था के रूप में काम करेगी। फिर भी संस्थान का प्रशासनिक अधिकार सूचना विभाग के पास रहेगा। सरकार ने इसके बजट का भी आवंटन कर दिया है।
दरअसल वर्तमान में मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग विश्व के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में से एक है। इसके मद्देनजर सरकार ने प्रदेश में फिल्म निर्माण और अभिनय की प्रतिभाओं को निखारने के उद्देश्य से फिल्म, टेलीविजन एवं लिबरल आर्ट्स संस्थान की स्थापना करने का फैसला किया है।
प्रस्ताव के मुताबिक पहले चरण में निशातगंज स्थित राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान के परिसर में दिसंबर से अस्थाई तौर पर शिक्षण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जबकि इसी महीने में शहीद पथ पर स्थित लखनऊ हाट के पास पूर्णकालिक कैंपस का शिलान्यास किया जाएगा। यह संस्थान लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध रहेगा। सरकार ने संस्थान की स्थापना के लिए फिलहाल 5 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया है।
राज्य अभिलेखागार सेवा नियमावली को मंजूरी
अखिलेश यादव की कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार सेवा प्रथम संशोधन नियमावली को मंजूरी दे दी। इससे यहां काम करने वाले कार्मिकों की भर्ती प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
जेई-एईएस योजनाओं में अब केंद्र व राज्य की 50-50 की हिस्सेदारी
जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) एवं एक्यूट इंसेफ्लाटिस सिंड्रोम (एईएस) योजनाओं के फंडिंग पैटर्न में बदलाव हुआ है। अखिलेश यादव की कैबिनेट ने इस बदलाव को मंजूरी दे दी है।
अब इसकी योजनाओं में केंद्र व प्रदेश की हिस्सेदारी 50:50 फीसदी की होगी। अभी तक केंद्र की हिस्सेदारी 75 फीसदी व राज्य की 25 फीसदी हिस्सेदारी होती थी। नए फंडिंग पैटर्न से प्रदेश सरकार पर 594.19 लाख रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आएगा।
मत्स्य पालकों को अब दस साल का पट्टा
प्रदेश सरकार ने मत्स्य पालकों को पांच वर्ष की जगह दस साल का पट्टा देने का फैसला किया है। इसके लिए राजस्व संहिता नियमावली- 2016 के नियम-57 के उप नियम-12 में संशोधन कर दिया गया है।
मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने बताया कि मत्स्य पालन योजना के तहत ऋण के लिए बैंकों ने पट्टे की न्यूनतम सात साल की समयसीमा तय कर रखी है। पांच साल का पट्टा देने से मत्स्य पालकों को ऋण नहीं मिल पा रहा था। कैबिनेट ने मत्स्य पालकों की सुविधा के लिए पट्टे की समयसीमा दस साल करने को मंजूरी दे दी है।
भूमि अधिग्रहण में दो लाख की देनदारी पर हाईकोर्ट में अपील नहीं
प्रदेश कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े ऐसे मुकदमों में हाईकोर्ट में कोई अपील न करने का फैसला किया है जिसमें शासन की देनदारी दो लाख रुपये से कम है। इसके लिए राज्य मुकदमा नीति में संशोधन कर नया प्रावधान जोड़ दिया गया है।
कैबिनेट ने समय-समय पर हाईकोर्ट से पारित आदेशों के अनुपालन में भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामलों को लेकर नीति में नया प्रावधान शामिल करने का निर्णय किया है।
प्रावधान यह भी है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़ी ऐसी सभी अपीलें अब वापस ले ली जाएंगी जो हाईकोर्ट में लंबित हैं और उसमें सरकार की देनदारी दो लाख रुपये से कम है। इसके लिए सरकार आवेदन देकर मुकदमें वापस ले लेगी। इसमें कई शर्तें भी शामिल की गई हैं जिसके आधार पर अपील की जा सकेगी।