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इमाम हुसैन की शहादत हजरत इब्राहीम के ख्वाब की ताबीर है : जवाद
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मजलिस में पहुंचे लोग।
लखनऊ। इमामबाड़ा गुफरान मआब में अशरा-ए-मुहर्रम की पांचवीं मजलिस को खिताब करते हुए शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि इमाम हुसैन (अ.) की शहादत हजरत इब्राहीम (अ.) के ख्वाब की ताबीर है।
उन्होंने कहा कि हजरत इस्माईल (अ.) कुर्बान नहीं हुए, लेकिन उन्हें जबीहुल्लाह कहा गया, जबकि इमाम हुसैन (अ.) ने अपनी शहादत के जरिए हजरत इब्राहीम (अ.) के ख्वाब को मुकम्मल ताबीर दी। इसी वजह से उनकी कुर्बानी को जिब्ह-ए-अजीम का दर्जा मिला। मौलाना ने कहा कि करबला के वाकिये का जिक्र करना आसान है, लेकिन इमाम हुसैन (अ.) के बताए रास्ते पर चलना बेहद कठिन है।
वहीं, इमामबाड़ा सैय्यद तकी साहब, अकबरी गेट में अशरा-ए-मजलिस की पांचवीं मजलिस को मौलाना सैय्यद सैफ अब्बास ने खिताब किया। इसके अलावा अकबरी गेट चौक स्थित एक मिनारा मस्जिद में मरकजी जमीयतुल हुफ्फाज की ओर से आयोजित दस दिवसीय शोहदाए किराम के पांचवें जलसे को कारी मोहम्मद सिददीक्र ने खिताब किया।
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उन्होंने कहा कि हजरत इस्माईल (अ.) कुर्बान नहीं हुए, लेकिन उन्हें जबीहुल्लाह कहा गया, जबकि इमाम हुसैन (अ.) ने अपनी शहादत के जरिए हजरत इब्राहीम (अ.) के ख्वाब को मुकम्मल ताबीर दी। इसी वजह से उनकी कुर्बानी को जिब्ह-ए-अजीम का दर्जा मिला। मौलाना ने कहा कि करबला के वाकिये का जिक्र करना आसान है, लेकिन इमाम हुसैन (अ.) के बताए रास्ते पर चलना बेहद कठिन है।
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वहीं, इमामबाड़ा सैय्यद तकी साहब, अकबरी गेट में अशरा-ए-मजलिस की पांचवीं मजलिस को मौलाना सैय्यद सैफ अब्बास ने खिताब किया। इसके अलावा अकबरी गेट चौक स्थित एक मिनारा मस्जिद में मरकजी जमीयतुल हुफ्फाज की ओर से आयोजित दस दिवसीय शोहदाए किराम के पांचवें जलसे को कारी मोहम्मद सिददीक्र ने खिताब किया।
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