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सोनभद्र अवैध कब्जा मामला: एके जैन की रिपोर्ट पर जांच के आदेश, अखिलेश सरकार में नहीं मिली थी मंजूरी

Sat, 27 Jul 2019 01:12 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 27 Jul 2019 01:12 PM IST
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Illigal land acquisition case of Sonbhadra will be investigated.
- फोटो : amar ujala

जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर 10 लोगों की हत्या के बाद अचानक चर्चा में आए सोनभद्र में तत्कालीन मुख्य वन संरक्षक एके जैन की उस रिपोर्ट के आधार पर शासन ने जांच शुरू कर दी है, जिसमें उन्होंने एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि पर अवैध कब्जे का जिक्र किया था। विडंबना यह है कि यह जांच एके जैन की मौत के एक साल बाद शुरू हो रही है।

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अपनी रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए जैन ने सपा शासन में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था, मगर जांच का आदेश अब योगी सरकार ने दिया है।

शासन के सूत्रों के मुताबिक, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण के स्तर से जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही शासन की एक उच्चस्तरीय टीम सोनभद्र जाएगी ताकि अवैध कब्जों के तरीकों को अच्छे से समझा जा सके।
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जांच अभियान का नेतृत्व विभागीय प्रमुख सचिव करेंगे। यह जांच सीएम के निर्देशों के तहत हो रही है, इसलिए कोई भी अधिकारी सार्वजनिक रूप से कुछ बोलने को तैयार नहीं है। उनकी रिपोर्ट के गहन अध्ययन के साथ दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है।

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रिपोर्ट में अफसरों की मिलीभगत सीबीआई जांच की सिफारिश

एके जैन ने वर्ष 2014 में सरकार को सौंपी रिपोर्ट में स्थानीय वन व राजस्व कार्मिकों के अलावा राजनेताओं और अधिकारियों के गठजोड़ का जिक्र किया था। उन्होंने शासन के एक वरिष्ठ अफसर की शह बताते हुए मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश भी की थी।

तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक, मूल्यांकन एवं कार्ययोजना ओमेंद्र शर्मा ने इस रिपोर्ट को आगे बढ़ाते हुए समुचित कार्रवाई के लिए लिखा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। इस बीच, 11 जुलाई 2018 को एक सड़क हादसे में जैन की मौत हो गई। जानकारों का कहना है कि यह अभी रहस्य है कि यह हादसा था या जानबूझकर कराया गया हमला।

तत्कालीन सचिव वन को भी ठहराया था जिम्मेदार
जैन ने पूरे मामले में तत्कालीन सचिव वन को भी जिम्मेदार ठहराया था। उन्हीं के मौखिक निर्देश पर अवैध कब्जों से संबंधित कुछ मामलों में कोर्ट में विचाराधीन केस वापस लिए गए थे।

सीधे सीएम को सौंपेंगे रिपोर्ट

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम अपनी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपेगी। उसके बाद अंतिम कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस मामले को ‘अमर उजाला’ वर्ष 2015 से ही प्रमुखता से उठा रहा है। इसी का नतीजा है कि अखिलेश सरकार को कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर एक बड़े औद्योगिक ग्रुप को जमीन देने का निर्णय वापस लेना पड़ा था।

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