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Lucknow News: आईआईआईडी समागम में दिखा तकनीक और नवाचार का संगम
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इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे आयोजन में देशभर की 80 से अधिक कंपनियों ने प्रदर्शित किए आधुन
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आशीष गुप्ता
लखनऊ। घर के दरवाजे, लाइट और अन्य उपकरण अब मोबाइल के जरिये कहीं से भी नियंत्रित किए जा सकेंगे, जबकि सेंसर युक्त टॉयलेट सीट मौसम और शरीर के तापमान के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेगी। वहीं, मेटल किचन और मेटल फसाड कम समय में तैयार होकर घरों को आधुनिक और टिकाऊ बना रहे हैं। यह सभी आधुनिक तकनीक और नवाचार इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, विभूतिखंड में आयोजित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिजाइनिंग (आईआईआईडी) के चार दिवसीय समागम में देखने को मिले।
इस समागम में आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिजाइनिंग क्षेत्र की देशभर की 80 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने अपने नवीनतम उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में ऊर्जा बचत, कम लागत और लंबे समय तक टिकाऊ रहने वाले उत्पादों पर विशेष जोर दिया गया।
लखनऊ के उद्यमी राम विश्नोई ने बताया कि उन्होंने आठ वर्ष पहले मॉड्यूलर स्टील किचन का काम शुरू किया था, जो अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लकड़ी की कमी और दीमक व सीलन से होने वाले नुकसान के कारण लोग मेटल किचन को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्टील किचन में वुड फिनिश और ग्लॉसी लुक वाली वार्डरोब भी उपलब्ध हैं। इनकी लागत लकड़ी के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत अधिक है, लेकिन इनकी मजबूती और टिकाऊपन ज्यादा है।
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मुंबई से आए कंपनी प्रतिनिधि अविनाश पवार ने बताया कि सेंसर युक्त टॉयलेट सीट उपयोगकर्ता के पास जाते ही स्वतः खुल जाती है। इसमें इलेक्ट्रिक स्विच के माध्यम से सीट के तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। मौसम के अनुसार ठंडा या गर्म पानी उपलब्ध होता है और उपयोग के बाद सीट स्वतः सैनिटाइज भी हो जाती है। इस टॉयलेट सीट की शुरुआती कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये है।
मुंबई से आए कंपनी प्रतिनिधि रवि प्रजापति ने बताया कि होम ऑटोमेशन तकनीक के माध्यम से घर के स्विच, दरवाजे और उपकरण मोबाइल एप और वॉयस कमांड से नियंत्रित किए जा सकते हैं। यह प्रणाली इंफ्रारेड तकनीक पर आधारित है और इसे एलेक्सा व गूगल होम जैसे प्लेटफॉर्म से भी संचालित किया जा सकता है।
पत्थर व्यवसायी संदीप सरना ने बताया कि प्राकृतिक रंगों वाले इंपोर्टेड पत्थरों की मांग बढ़ रही है। उनके पास 217 रंगों में पत्थर उपलब्ध हैं, जो घर की थीम के अनुसार उपयोग किए जा सकते हैं। इन पत्थरों की खासियत है कि ये मौसम के अनुसार ठंडक या गर्माहट का अनुभव कराते हैं।
लखनऊ के उद्यमी विक्रम और स्वाति अग्रवाल ने बताया कि अब फैंसी गेट और रेलिंग के बजाय मेटल फसाड और परगोला का चलन बढ़ गया है। होटल, निजी और सरकारी भवनों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आधुनिक मशीनों की मदद से किसी भी डिजाइन को कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।
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लखनऊ। घर के दरवाजे, लाइट और अन्य उपकरण अब मोबाइल के जरिये कहीं से भी नियंत्रित किए जा सकेंगे, जबकि सेंसर युक्त टॉयलेट सीट मौसम और शरीर के तापमान के अनुसार खुद को एडजस्ट कर लेगी। वहीं, मेटल किचन और मेटल फसाड कम समय में तैयार होकर घरों को आधुनिक और टिकाऊ बना रहे हैं। यह सभी आधुनिक तकनीक और नवाचार इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, विभूतिखंड में आयोजित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीरियर डिजाइनिंग (आईआईआईडी) के चार दिवसीय समागम में देखने को मिले।
इस समागम में आर्किटेक्चर और इंटीरियर डिजाइनिंग क्षेत्र की देशभर की 80 से अधिक प्रमुख कंपनियों ने अपने नवीनतम उत्पादों का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनी में ऊर्जा बचत, कम लागत और लंबे समय तक टिकाऊ रहने वाले उत्पादों पर विशेष जोर दिया गया।
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लखनऊ के उद्यमी राम विश्नोई ने बताया कि उन्होंने आठ वर्ष पहले मॉड्यूलर स्टील किचन का काम शुरू किया था, जो अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लकड़ी की कमी और दीमक व सीलन से होने वाले नुकसान के कारण लोग मेटल किचन को प्राथमिकता दे रहे हैं। स्टील किचन में वुड फिनिश और ग्लॉसी लुक वाली वार्डरोब भी उपलब्ध हैं। इनकी लागत लकड़ी के मुकाबले लगभग 10 प्रतिशत अधिक है, लेकिन इनकी मजबूती और टिकाऊपन ज्यादा है।
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मुंबई से आए कंपनी प्रतिनिधि अविनाश पवार ने बताया कि सेंसर युक्त टॉयलेट सीट उपयोगकर्ता के पास जाते ही स्वतः खुल जाती है। इसमें इलेक्ट्रिक स्विच के माध्यम से सीट के तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है। मौसम के अनुसार ठंडा या गर्म पानी उपलब्ध होता है और उपयोग के बाद सीट स्वतः सैनिटाइज भी हो जाती है। इस टॉयलेट सीट की शुरुआती कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये है।
मुंबई से आए कंपनी प्रतिनिधि रवि प्रजापति ने बताया कि होम ऑटोमेशन तकनीक के माध्यम से घर के स्विच, दरवाजे और उपकरण मोबाइल एप और वॉयस कमांड से नियंत्रित किए जा सकते हैं। यह प्रणाली इंफ्रारेड तकनीक पर आधारित है और इसे एलेक्सा व गूगल होम जैसे प्लेटफॉर्म से भी संचालित किया जा सकता है।
पत्थर व्यवसायी संदीप सरना ने बताया कि प्राकृतिक रंगों वाले इंपोर्टेड पत्थरों की मांग बढ़ रही है। उनके पास 217 रंगों में पत्थर उपलब्ध हैं, जो घर की थीम के अनुसार उपयोग किए जा सकते हैं। इन पत्थरों की खासियत है कि ये मौसम के अनुसार ठंडक या गर्माहट का अनुभव कराते हैं।
लखनऊ के उद्यमी विक्रम और स्वाति अग्रवाल ने बताया कि अब फैंसी गेट और रेलिंग के बजाय मेटल फसाड और परगोला का चलन बढ़ गया है। होटल, निजी और सरकारी भवनों में इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आधुनिक मशीनों की मदद से किसी भी डिजाइन को कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है।

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे आयोजन में देशभर की 80 से अधिक कंपनियों ने प्रदर्शित किए आधुन

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे आयोजन में देशभर की 80 से अधिक कंपनियों ने प्रदर्शित किए आधुन

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चल रहे आयोजन में देशभर की 80 से अधिक कंपनियों ने प्रदर्शित किए आधुन