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शांत बच्चे को न समझे सामान्य, ये है बड़े खतरे का इशारा

Mon, 26 Feb 2018 05:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 26 Feb 2018 05:28 PM IST
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if your child is quite silent it indicate the abnormal condition of mental health 
happy children

डेढ़ से दो महीने की उम्र के बीच अगर शिशु आंखों से संपर्क न बना पाए, या दो महीने पूरे होने पर शिशु मुसकुराएं नहीं तो समझें कि बच्चे का सामाजिक विकास सही तरीके से नहीं हो पा रहा है।

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एक साल की उम्र में अगर बच्चा बहुत अधिक शांत रहता है या आसपास लोगों के मौजूद होने के बाद भी सिर्फ चीजों में ही व्यस्त रहता है तो वह इस बात को दर्शाता है कि उसमें सोशल स्किल्स का विकास नहीं हो पा रहा है।
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ऐसे बच्चों में ऑटिज्म की भी बीमारी हो सकती है। यह बच्चे बड़े होकर कभी ध्यान केंद्रित नहीं रख पाते। यह जानकारी मुंबई के डवलपमेंटल एवं बिहेवियरल पीडियाट्रीशियन डॉ. समीर एच दलवाई ने रविवार को प्रेस वार्ता के दौरान दी।
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उन्होंने बताया कि डॉक्टर हों या माता-पिता, वे केवल बच्चों के शारीरिक विकास पर ही ध्यान देते हैं। ऐसे में बच्चे का मानसिक या सामाजिक विकास हो रहा है या नहीं इसका पता नहीं चलता। जब बच्चा चार से पांच साल की उम्र का हो जाता है और वह समाज से कट कर रहने लगता है तब उसे डॉक्टर केपास ले जाया जाता है।

उन्होंने बताया बच्चे के सोशल डवलपमेंट के लिए उसका आईक्यू लेवल नहीं बल्कि एसक्यू लेवल पर ध्यान देना चाहिए। बच्चे के मानसिक विकास के लिए शुरूआती दो साल सबसे ज्यादा जरूरी हैं।

बच्चे का 90 प्रतिशत मानसिक विकास दो साल तक हो जाता है। इन दो सालों में बच्चे का सही खानपान व मां-बच्चे का संवाद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। डॉ. समीर ने बताया कि शिशु को स्तनपान कराने से मां के दूध में मौजूद डीएचए व कुदरती विटामिन ई दिमाग के विकास में सबसे महत्वपूर्ण होता है।

इसके अलावा बच्चा जल्द से जल्द बातों को समझने लगे इसके लिए उससे दो महीने की उम्र से ही माता-पिता को इशारों में (नॉन वर्बल कम्युनिकेशन) बातचीत करते रहना चाहिए।


बच्चों को खिलौने, टीवी या मोबाइल में बिजी रखने के बजाए उनसे ज्यादा से ज्यादा देर बात करें। बच्चों केसाथ बातचीत करने से उनका सामाजिक व मानसिक विकास तेजी से होता है।

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