IAS week:: यूपी के अफसरों को दिए दिलचस्प टाइटल
आईएएस वीक के दौरान शुक्रवार को सांस्कृतिक संध्या में अफसरों को दिलचस्प टाइटल से नवाजा गया। टाइटल भी ऐसे जो न सिर्फ नौकरशाही के मनोभाव उभारते नजर आए बल्कि अफसरों को गुदगुदाने और ठहाके लगाने पर भी मजबूर किया।
मुख्य सचिव आलोक रंजन को टाइटल मिला ‘बिहाइंड एवरी सक्सेसफुल मैन, देयर इजए वूमेन’। रंजन की पत्नी सुरभि समाजसेवा में काफी सक्रिय हैं।
राजस्व परिषद के चेयरमैन अनिल कुमार गुप्त वरिष्ठता के आधार पर मुख्य सचिव की कुर्सी के तगड़े दावेदार माने जा रहे हैं। मुखिया के खुश न होने के बावजूद उन्होंने इस कुर्सी की आस नहीं छोड़ी है।
अनिल को टाइटल मिला-हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक...। मुख्य सचिव के लिए कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार और प्रमुख सचिव दीपक सिंघल के नाम भी चर्चा में हैं। इन दोनों को संयुक्त टाइटल दिया गया-जहां तेरी ये नजर है, मेरी जां मुझे खबर है।
जानें, किसे क्या टाइटल दिए गए
नवनीत सहगल, प्रमुख सचिव सूचना--मैन ऑफ आल सीजन, ए ट्रूली न्यूट्रल ब्यूरोक्रेट।
राजशेखर, डीएम--लखनऊ छापो...पेज वन..टू..थ्री...अगला नवनीत सहगल कौन होगा?
बी.चंद्रकला, डीएम बुलंदशहर--हम किसी से कम नहीं, ये टीवी हमसे है, टीवी से हम नहीं।
राहुल भटनागर व देवाशीष पंडा--हम रहेंगे दिल्ली के बाबू...
के. धनलक्ष्मी--द लेडी विद द मिडास टच, ट्रू टू द नेम...
किंजल सिंह--जंगल जंगल बात चली है, पता चला है...
सदाकांत--अगर आपका आशीर्वाद मिल जाए तो मैं भी चीफ सेक्रेट्री बन जाऊं...
अरुण सिंघल--खुदा को डर है कि कहीं वक्त आने पर ये ही खुदा न बन जाए...
अलकनंदा दयाल, आकाश दीप, आंजनेय कुमार सिंह, अजय यादव--हम तो छोड़ आए पिया का देश, बाबुल का घर प्यारा लगे...
विजय शंकर पांडेय--आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज न दे...
इन्हें मिले ये टाइटल
राकेश गर्ग--कम्युनिकेशन गैप (कॉल ड्रॉप) कैन बी हैजार्डस एट टाइम...
अनिल स्वरूप--कोल ह्वेन पुट अंडर हाई, टेम्प्रेचर एंड प्रेशर कैन प्रोड्यूस डायमंड्स...
बलविंदर कुमार--राइड आफ्टर द फॉल मेक्स यू ए लाइफ वैरियर...
रोहित नंदन--पंखों से कुछ नहीं होता, कुशल कारीगरी से ही उड़ान होती है...
राजप्रताप सिंह--हम बेवफा हरगिज न थे, पर हम वफा कर न सके...
संजीव सरन--हमें गिरकर संभलना आता है, अबकी बारी शेर की सवारी...
डॉ. ललित वर्मा--वक्त करता जो वफा तो आप...
अनूपचंद्र पांडेय--जिंदगी जिंदादिली का ही नाम है, हम तो हर हाल में खुश रहेंगे...
किशनसिंह अटोरिया--हर मर्ज की एक ही दवा-दारू होती है...
प्रभात कुमार ‘एटलस’ विद लोड्स ऑन हिज सोल्जर्स, रेडी टू टेक एनी मोर ?
अनिता भटनागर जैन--खेल खेलने में भी बहुत श्रम करना पड़ता है...