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आसान नहीं है मेट्रो का कॉमर्शियल रन, अब भी हैं कई बाधाएं
ब्यूरो, अमर उजाला/लखनऊ
Updated Sat, 24 Jun 2017 03:29 PM IST
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सिंगार नगर स्टेशन
- फोटो : amar ujala
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मेट्रोमैन ई श्रीधरन भले ही जुलाई के तीसरे सप्ताह में लखनऊ मेट्रो चलाने का इशारा कर चुके हों, लेकिन अब भी राह में कई रोड़े हैं। इसमें 8.5 किमी. के प्राथमिकता सेक्शन को ही अभी पूरी तरह हरी झंडी नहीं मिल पाई है। सिंगारनगर स्टेशन पर अब भी बड़े अड़ंगे लखनऊ मेट्रो के आगे बने हुए हैं।
इसके अलावा सबसे बड़ी बाधा आयुक्त मेट्रो रेल संरक्षा का निरीक्षण के लिए शिड्यूल तय नहीं हो पाना है। नगर निगम के मुताबिक, सिंगारनगर स्टेशन पर एक तरफ एंट्री-एग्जिट की सीढ़ियों के बनने के लिए अड़ंगा बना हुआ है। यहां नगर निगम की लीज पर दी गई जमीन पर बनी दुकानों के आवंटी खुद को हटाए जाने के खिलाफ सिविल कोर्ट चले गए।
इसके बाद मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया। ऐसे में इन दुकानों को ध्वस्त नहीं किया जा सकता। इसकी वजह से अवध हॉस्पिटल के सामने की तरफ एंट्री-एग्जिट के लिए सीढ़ियां नहीं बन पा रहीं। तीन दिन पहले खुद प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल भी इस मुद्दे पर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं।
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वहीं आठ स्टेशनों के बीच चलने वाली मेट्रो को अग्निशमन विभाग की तरफ से भी अंतिम एनओसी मिलने की जरूरत है। मेट्रो का दावा है कि उसको आठ स्टेशनों में सात के लिए अग्निशमन विभाग की एनओसी मिल चुकी है।
अब केवल सिंगारनगर स्टेशन की एनओसी ही मिलना बाकी है। इसके लिए भी मेट्रो की टीम लगातार प्रयास कर रही है। अगले एक सप्ताह में सीएमआरएस के निरीक्षण का शिड्यूल आने से पहले यह एनओसी मिल जाएगी। हालांकि, बिना दूसरी तरफ की एंट्री-एग्जिट बनाए ही मेट्रो को अग्निशमन विभाग कैसे एनओसी देगा। इसका जवाब किसी के पास अभी तक नहीं है।
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इसके अलावा सबसे बड़ी बाधा आयुक्त मेट्रो रेल संरक्षा का निरीक्षण के लिए शिड्यूल तय नहीं हो पाना है। नगर निगम के मुताबिक, सिंगारनगर स्टेशन पर एक तरफ एंट्री-एग्जिट की सीढ़ियों के बनने के लिए अड़ंगा बना हुआ है। यहां नगर निगम की लीज पर दी गई जमीन पर बनी दुकानों के आवंटी खुद को हटाए जाने के खिलाफ सिविल कोर्ट चले गए।
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इसके बाद मामला कोर्ट में विचाराधीन हो गया। ऐसे में इन दुकानों को ध्वस्त नहीं किया जा सकता। इसकी वजह से अवध हॉस्पिटल के सामने की तरफ एंट्री-एग्जिट के लिए सीढ़ियां नहीं बन पा रहीं। तीन दिन पहले खुद प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल भी इस मुद्दे पर नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं।
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वहीं आठ स्टेशनों के बीच चलने वाली मेट्रो को अग्निशमन विभाग की तरफ से भी अंतिम एनओसी मिलने की जरूरत है। मेट्रो का दावा है कि उसको आठ स्टेशनों में सात के लिए अग्निशमन विभाग की एनओसी मिल चुकी है।
अब केवल सिंगारनगर स्टेशन की एनओसी ही मिलना बाकी है। इसके लिए भी मेट्रो की टीम लगातार प्रयास कर रही है। अगले एक सप्ताह में सीएमआरएस के निरीक्षण का शिड्यूल आने से पहले यह एनओसी मिल जाएगी। हालांकि, बिना दूसरी तरफ की एंट्री-एग्जिट बनाए ही मेट्रो को अग्निशमन विभाग कैसे एनओसी देगा। इसका जवाब किसी के पास अभी तक नहीं है।
एलएमआरसी का दावा, हमारे स्टेशन तैयार
डेमो
- फोटो : amar ujala
लखनऊ मेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक, 3 या 4 जुलाई को सीएमआरएस के निरीक्षण का शिड्यूल जारी हो जाएगा। लखनऊ मेट्रो के आवेदन के संग डॉक्यूमेंट्स का अभी वहां परीक्षण चल रहा है। इसके बाद सीएमआरएस अपने निरीक्षण की तारीख तय करेंगे। इसी के आधार पर ई श्रीधरन ने 15 जुलाई तक सीएमआरएस की सुरक्षा जांच के बाद एनओसी मिल जाने की बात प्रेसवार्ता में कही थी।
इसके उलट लखनऊ मेट्रो का दावा है कि उनकी तैयारियां कॉमर्शियल रन के लिए पूरी हो चुकी हैं। छोटी-छोटी कमियों को भी सीएमआरएस के निरीक्षण से पहले पूरा कर लिया जाएगा। एमडी कुमार केशव का कहना है कि स्टेशनों पर स्टाफ की तैनाती हो गई है।
स्टेशनों की सुरक्षा के लिए इंतजाम हो चुके। यात्री सुविधाओं से जुड़ी सभी चीजें जैसे ऑटोमेटिक फेयर कलैक्शन के गेट, टोकन वेंडिंग मशीन, स्मार्ट कार्ड रिचार्ज मशीन को लगाया जा चुका है। पांच ट्रेन अब तक लखनऊ मेट्रो को मिल चुकी हैं। इनका रनिंग ट्रायल लगातार चल रहा है।
मेट्रो कॉमर्शियल रन के लिए तैयार है। बस सीएमआरएस की कॉरिडोर खोलने के लिए अनुमति का इंतजार है। छोटी-छोटी कमियां जैसे सिंगारनगर स्टेशन की एंट्री-एग्जिट को जमीन नहीं मिलने के रूप में है। उनको भी जल्दी ही दूर कर लिया जाएगा। -कुमार केशव, एमडी, एलएमआरसी
मेट्रो के सभी आठ स्टेशनों को अभी एनओसी नहीं मिल सकी है। ट्रांसपोर्टनगर डिपो के अलावा सात स्टेशनों को फायर एनओसी है। सिंगारनगर को अभी तक फायर की एनओसी नहीं है। यहां नियम पूरे होने पर ही एनओसी दी जा सकेगी। -अभय भान पांडेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ
इसके उलट लखनऊ मेट्रो का दावा है कि उनकी तैयारियां कॉमर्शियल रन के लिए पूरी हो चुकी हैं। छोटी-छोटी कमियों को भी सीएमआरएस के निरीक्षण से पहले पूरा कर लिया जाएगा। एमडी कुमार केशव का कहना है कि स्टेशनों पर स्टाफ की तैनाती हो गई है।
स्टेशनों की सुरक्षा के लिए इंतजाम हो चुके। यात्री सुविधाओं से जुड़ी सभी चीजें जैसे ऑटोमेटिक फेयर कलैक्शन के गेट, टोकन वेंडिंग मशीन, स्मार्ट कार्ड रिचार्ज मशीन को लगाया जा चुका है। पांच ट्रेन अब तक लखनऊ मेट्रो को मिल चुकी हैं। इनका रनिंग ट्रायल लगातार चल रहा है।
मेट्रो कॉमर्शियल रन के लिए तैयार है। बस सीएमआरएस की कॉरिडोर खोलने के लिए अनुमति का इंतजार है। छोटी-छोटी कमियां जैसे सिंगारनगर स्टेशन की एंट्री-एग्जिट को जमीन नहीं मिलने के रूप में है। उनको भी जल्दी ही दूर कर लिया जाएगा। -कुमार केशव, एमडी, एलएमआरसी
मेट्रो के सभी आठ स्टेशनों को अभी एनओसी नहीं मिल सकी है। ट्रांसपोर्टनगर डिपो के अलावा सात स्टेशनों को फायर एनओसी है। सिंगारनगर को अभी तक फायर की एनओसी नहीं है। यहां नियम पूरे होने पर ही एनओसी दी जा सकेगी। -अभय भान पांडेय, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, लखनऊ