फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Hunters targets sibarian birds come to up.

यूपीः इन 'मेहमानों' को भी सता रहा है जान का खतरा

Tue, 16 Dec 2014 09:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच
ब्यूरो/अमर उजाला, बहराइच Updated Tue, 16 Dec 2014 09:16 AM IST
विज्ञापन
Hunters targets sibarian birds come to up.

जिले में साइबेरियन पक्षियों की तादाद में लगातार कमी आ रही है। ऐसा शिकारियों के नाते हो रहा है। अभी तक साइबेरियन पक्षी नवंबर के प्रथम सप्ताह तक अपनी आमद जिले की झीलों व नदियों में करा देते थे लेकिन इनकी संख्या हर साल घट रही है।

विज्ञापन


सैकड़ों की संख्या में आने वाले साइबेरियन पक्षियों की संख्या जिले की झीलों, तालाबों व नदियों में गिनती भर की दिख रही है। शिकारियों के चलते अब पक्षी जिले में अपनी आमद काफी कम संख्या में दर्ज करा रहे हैं। वन विभाग भी इनकी सुरक्षा के लिए कोई समुचित बंदोबस्त नहीं कर पा रहा है।
विज्ञापन


बहराइच झील, तालाबों व नदियों का जिला है। जिले के पश्चिमी हिस्से में कतर्निया घाट संरक्षित वन प्रभाग है। इस वन क्षेत्र होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ, कौड़ियाला नदी के अलावा घाघरा नदी के तट और जंगल के सरोवर साइबेरियन पक्षियों का मुख्य प्रवास केंद्र है।
विज्ञापन
विज्ञापन


साइबेरियन पक्षी शहर से सटे अनारकली झील, चित्तौरा झील, बघैल तालाब में प्रवास करते हैं। लेकिन सुरक्षा के सम्यक उपाय न होने के चलते इन साइबेरियन मेहमानों की चहचहाहट धीरे धीरे मंद होती जा रही है।

इन झीलों पर है शिकारियों का साया

Hunters targets sibarian birds come to up.

इस समय चित्तौरा, अनारकली झील व बघैल तालाब झील के तटों पर हाथों में बंदूक, गुलेल और जाल लिए शिकारी नजर आ रहे हैं। साइबेरियन पक्षियों का शिकार कर शिकारी न सिर्फ उन्हें अपना निवाला बनाते हैं बल्कि कुछ शिकारी मेहमान पक्षियों का शिकार कर उन्हें आसपड़ोस के बाजारों में बेचते भी हैं।

साइबेरियन लालसर, हिमालयी कठफोड़वा, भूरासिर, कौड़ियाला कठफोड़वा, टोपीदार पीलक, छोटा पहाड़ी राजालाल, बड़ा खोटुर और फाख्ता की पन्ना व चितरेखा प्रजातियां शिकारियों की पसंद हैं। इन प्रजातियों का शिकार कर शिकारी इन्हें गोंडा, बाराबंकी, लखनऊ, गोरखपुर, दिल्ली, नेपाल तक भेजते हैं।

साइबेरियन मेहमानों का शिकार कर उनकी बिक्री 250 से 400 रुपए में शिकारी करते हैं। एक फाख्ता 100 से 150 रुपए में बिकती है। जबकि लालसर 300 से 400 रुपए में शिकारी बेचते हैं। टोपीदार पीलक व छोटा पहाड़ी राजालाल भी 200 से 400 के बीच में बिक्री होता है।

कतर्निया घाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वन अधिकारी आशीष तिवारी ने कहा कि संरक्षित वन क्षेत्र की नदियों व आसपास की झीलों में साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा के लिए वन कर्मियों की टीम गठित की गई है। शिकारियों पर नजर रखी जा रही है। वन क्षेत्र के अलावा अन्य स्थान पर अगर शिकार हो रहा है तो उन्हें सूचना दें, कार्रवाई की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed