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लम्बित मांगों को लेकर स्टेशन मास्टरों के की भूख हड़ताल, खाली पेट किया काम
Fri, 22 Jan 2021 11:44 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 22 Jan 2021 11:44 AM IST
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- फोटो : Kashi-Kevadia train
लम्बित मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के बैनर तले देशभर के 40000 स्टेशन मास्टर गुरुवार को भूख हड़ताल पर रहे।
इस एकदिवसीय भूख हड़ताल में चारबाग़, लखनऊ जंक्शन सहित राजधानी के रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत स्टेशन मास्टरों ने भी भूखे पेट रहकर डयूटी की। खाली पेट रहकर इन स्टेशन मास्टरों ट्रेनों का संचालन संभाला। भूख हड़ताल को देखते हुए रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया है।
इमरजेंसी में रेलवे के स्वास्थ्य विभाग को इलाज के लिए तैयार रहने के मुहैया निर्देश रेलवे बोर्ड ने दे दिए थे। बता दें कि स्टेशन मास्टरों की जो मांगें लंबित हैं, उसमें 50 लाख का बीमा, रेलवे का निजीकरण बंद करने की डिमांड प्रमुख रूप से शामिल है। एसोसिएशन के लखनऊ मंडल सचिव अनूप कुमार ने भूख हड़ताल के बारे में जानकारी दी कि बताया कि कैडर में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। जिन्हें नहीं भरा जा रहा है। जिसकी वजह से स्टेशन मास्टरों को 8 की जगह 14 घंटे काम करना पड़ रहा है। नए स्टेशन मास्टरों के स्टायपेंड एरियर बहुत महीनों से बकाया है। जिनका तत्काल भुगतान किया जाना चहिए।
दरअसल रेलवे बोर्ड ने 43600 बेसिक वेतन वाले स्टेशन मास्टरों के नाइट ड्यूटी एलाउंस दपर रोक लगा दी गई। इसके अलावा वर्ष 2017 से उनकी रिकवरी के भी आदेश दिए गए थे। इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। स्टेशन मास्टर इके लिए भी आरपीएफ के प्राउड की तरह सैल्यूट स्कीम होनी चाहिए।
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इस एकदिवसीय भूख हड़ताल में चारबाग़, लखनऊ जंक्शन सहित राजधानी के रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत स्टेशन मास्टरों ने भी भूखे पेट रहकर डयूटी की। खाली पेट रहकर इन स्टेशन मास्टरों ट्रेनों का संचालन संभाला। भूख हड़ताल को देखते हुए रेलवे प्रशासन अलर्ट हो गया है।
इमरजेंसी में रेलवे के स्वास्थ्य विभाग को इलाज के लिए तैयार रहने के मुहैया निर्देश रेलवे बोर्ड ने दे दिए थे। बता दें कि स्टेशन मास्टरों की जो मांगें लंबित हैं, उसमें 50 लाख का बीमा, रेलवे का निजीकरण बंद करने की डिमांड प्रमुख रूप से शामिल है। एसोसिएशन के लखनऊ मंडल सचिव अनूप कुमार ने भूख हड़ताल के बारे में जानकारी दी कि बताया कि कैडर में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। जिन्हें नहीं भरा जा रहा है। जिसकी वजह से स्टेशन मास्टरों को 8 की जगह 14 घंटे काम करना पड़ रहा है। नए स्टेशन मास्टरों के स्टायपेंड एरियर बहुत महीनों से बकाया है। जिनका तत्काल भुगतान किया जाना चहिए।
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दरअसल रेलवे बोर्ड ने 43600 बेसिक वेतन वाले स्टेशन मास्टरों के नाइट ड्यूटी एलाउंस दपर रोक लगा दी गई। इसके अलावा वर्ष 2017 से उनकी रिकवरी के भी आदेश दिए गए थे। इस आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। स्टेशन मास्टर इके लिए भी आरपीएफ के प्राउड की तरह सैल्यूट स्कीम होनी चाहिए।
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