पांच लीटर पेट्रोल और 500 की नोट, हिट होगा रोड शो!
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5 लीटर पेट्रोल और पांच सौ रुपये...। ऊपर से टोपी और गमछा भी। बस! तैयार हो गए नारे लगाने वाले समर्थक। राजधानी में नेताओं के समर्थन में रोड शो और रैलियों में जुटाई गई भीड़ों की यही हकीकत रही।
खिलखिलाते चेहरे, जोशीले नारे...सब कुछ फिक्स। घंटों के हिसाब से नारे लगाए...पैसे लिए और चलता बने। एक-एक दिन में कई-कई पार्टियों के जिंदाबाद लगाए...।
नेता भले ही थक गए पर उनके गले नहीं थके। प्रचार थमा तो शायद इन लोगों को ही सबसे ज्यादा मलाल है कि पार्ट टाइम जॉब गया। पार्टी की विचारधारा से इतर धन के बल पर भीड़ जुटाने में कोई किसी से पीछे नहीं रहा।
आलम यह रहा कि अगर काफिले में 200 के आसपास मोटरसाइकिलें नहीं होतीं तो नेता का कॉन्फिडेंस लेवल डाउन ही नजर आता था।
यह रही हकीकत
उदयगंज और सदर के कई युवाओं के लिए चुनाव यादगार तजुर्बा रहा। युवक बताते हैं, कई कार्यक्रमों में नारे लगाए।
एक डिग्री कॉलेज के पुराने छात्रनेता ने फोन पर न्योता दिया था। बाइक के लिए पांच लीटर पेट्रोल और पांच सौ रुपये का ऑफर था। कुछ घंटों के लिए घूमना ही तो था।
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इन युवाओं के लिए यह सब कुछ एक पैकेज की तरह रहा जहां घूमने और मौज-मस्ती के एवज में उन्हें रोजाना अच्छा खासा जेब खर्च मिलता रहा।
खास बात रही कि डीलिंग में दोस्त भी शामिल होते थे। पार्टियों पांच या दस के जत्थे में आने की डिमांड होती थी।
हजार पर्चे चिपकाने के 300 रुपये
जानकारी के मुताबिक चुनाव प्रचार के अंतिम दिन हजार पर्चों को चिपकाने के लिए 250 से 300 रुपये तक का जबकि दो हजार पोस्टरों के लिए 500 रुपये तक का भुगतान तय हुआ।
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मोटा अनुमान ही लगा लें तो सौ बाइकर की भीड़ जुटाने का मतलब एक लाख और एक ही मोटरसाइकिल पर दो लोग हैं तो खर्च 1.5 लाख तक पहुंच जाता।
कई युवकों ने तो खुशी-खुशी बताया कि दिनभर में वे दो-तीन पाटिर्यों के कार्यक्रम में शामिल हुए।
भरोसेमंद कार्यकर्ता लगाए थे भीड़ मैनेजमेंट में
रैली में ज्यादा से ज्यादा लोग आएं इस जुगत के लिए बाकायदा प्रोफेशनल कार्यकर्ता रखे गए हैं।
इन्हीं कार्यकर्ताओं को सुबह ही पेट्रोल की पर्ची और पांच सौ की पत्ती दे दी जाती थी। साथ ही गमछा, टोपी और झंडे भी।
उन्हें बता दिया जाता था कि उन्हें किस पेट्रोल पंप से पेट्रोल डलवाना है और कहां कितने बजे पहुंचना है।
नाम, नंबर नोट है, जरूरत पड़ी तो बुला लेंगे
सूत्रों की मानें तो इन ‘कार्यकर्ताओं’ को पेट्रोल भरवाने से पहले पर्ची
देते समय दिन के खर्च के लिए तीन से पांच सौ रुपये तक दिए गए। साथ ही
उन्हें पार्टी के झंडे, पर्चे, टोपी व गमछे भी मुहैया कराए गए।
अमर उजाला
ने जब आशु भैया के मोबाइल पर संपर्क किया तो कहा गया कि अब देर हो गई है।
नाम, नंबर नोट कर लिया गया है। फिर कभी जरूरत पड़ी तो बुला लिया जाएगा।
पेट्रोल पंप पर पहुंचे जत्थे के जत्थे
चारबाग और हुसैनगंज के दो पेट्रोल पंपों पर सोमवार को सुबह से ही एक राष्ट्रीय पार्टी के मोटरसाइकिल सवारों के जत्थे पहुंचते रहे।
हर वाहन में पांच लीटर पेट्रोल भरा गया और भुगतान के नाम पर पंप पर एक पर्ची दे दी गई।
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पड़ताल करने पर पता लगा कि हुसैनगंज के पेट्रोल पंप पर एक पार्टी के बड़े नेता के करीबी ‘आशु भैया’ की पर्ची दी गई है।
इन पर्चियों का भुगतान बाद में कर दिया गया। ऐसे ही चारबाग स्थित एक पेट्रोल पंप पर चौधरी नाम की पर्ची चल रही थी।