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अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के रुख का पक्षकारों ने किया स्वागत, जताई जल्द फैसला आने की उम्मीद

Wed, 18 Sep 2019 08:10 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला अयोध्या Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 18 Sep 2019 08:10 PM IST
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hindu and muslim side welcome supreme court action on ayodhaya ram mandir
Ram Mandir Case
दशकों पुराने राम जन्मभूमि/ बाबरी मस्जिद विवाद में जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट के ताजे रुख का मामले से जुड़े पक्षकारों ने स्वागत किया है। बताया जाता है कि 18 अक्तूबर तक अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हो सकती है। ऐसे में माना जा रहा है कि दशकों पुराने राम जन्मभूमि/ बाबरी मस्जिद प्रापर्टी विवाद में फैसला नवंबर से पहले आ सकता है। 
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मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इसके संकेत दिए हैं। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से संबद्ध पक्ष यदि इसे मध्यस्थता के जरिए सुलझाना चाहते हैं, तो वे अब भी ऐसा कर सकते हैं।
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मामले से जुड़े पक्षकारों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले के जल्द समाधान को लेकर गंभीर है। जिस तरह से सुनवाई हो रही है, उससे यह उम्मीद प्रबल हो गई है कि अगले कुछ ही महीनों में दशकों से अदालत की चौखट नाप रहे अयोध्या मामले में निर्णय आ जाएगा। 
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पक्षकारों ने मध्यस्थता की कार्रवाई पर कहा कि मध्यस्थता से कोई ऐतराज नहीं है लेकिन कोर्ट की कार्रवाई रोक कर मध्यस्थता नहीं होनी चाहिए। पक्षकारों का कहना है कि जो भी निर्णय देना है वह कोर्ट को ही देना है इसलिए मध्यस्थता की कार्रवाई कोर्ट में ही हो, बाहर इसका कोई औचित्य नहीं है। अब इस मामले की सुनवाई में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए और जल्द मामले का समाधान हों। 

पक्षकारों ने कहा कि सभी पक्ष मामले का शीघ्र निस्तारण चाहते हैं, कोर्ट जो भी निर्णय देगी वह मानेंगे। वहीं दूसरी तरफ विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का रुख स्वागत योग्य है लेकिन मध्यस्थता का अब कोई मतलब नहीं है। मध्यस्थता पहले भी कई बार हो चुकी है लेकिन कोई परिणाम नहीं आया। 

सुलह-समझौते का अब कोई औचित्य नहीं: नृत्यगोपाल दास 

-श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय स्वागत योग्य है। प्रतिदिन सुनवाई के चलते अब मामला समाधान होने की दहलीज पर खड़ा है। लेकिन सुलह-समझौते का अब कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट की सुनवाई जब पूरी होने के करीब है तो एक बार फिर मध्यस्थता की बात, किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं। कहा कि हमें उम्मीद है कि अब जल्द ही रामलला टेंट से आजाद होंगे। 

मध्यस्थता के लिए न रूके कोर्ट की सुनवाई: दिनेंद्र दास 
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास कहते हैं कि मध्यस्थता से हमें कोई ऐतराज नहीं है लेकिन मध्यस्थता के लिए कोर्ट की कार्रवाई अब बाधित नहीं होनी चाहिए। कहा कि कोर्ट मामले के जल्द समाधान को लेकर संजीदा है, हमें खुशी है कि जिस तरह से सुनवाई हो रही है अब अगले कुछ ही दिनों में लंबे समय से लटके अयोध्या मामले का समाधान हो जाएगा, और राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। 

सुलह-समझौते से हल हो जाए मामला तो बेहतर: धर्मदास
-हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने कहा कि सुलह-समझौते से मामला हल हो जाए तो बेहतर है। अगर अब भी बातचीत की कोई गुंजाइश बची है तो इसे आजमाने में कोई हर्ज नहीं है। हालांकि इसके चलते दिन प्रतिदिन सुनवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। कहा कि हमें पूरी उम्मीद हो गई है कि अगले दो महीने के भीतर अयोध्या मामले में निर्णय आ जाएगा और रामलला को न्याय मिल सकेगा। 
 

जिसको समझौता करना हो वह कोर्ट में आए: इकबाल 

-मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि कोर्ट के बाहर समझौते का अब कोई औचित्य नहीं है। मध्यस्थता कमेटी एक बार फेल हो चुकी है। फिर भी कोर्ट का स्वागत है जिसको समझौता करना हो वह कोर्ट में आए हम बात करने के लिए तैयार हैं। कहा कि जो भी फैसला करना है वह कोर्ट को ही करना है। इसलिए कोर्ट की कार्रवाई नहीं रुकनी चाहिए, सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगी वह मानेंगे। अब जल्द फैसला आना चाहिए। 

मुल्क में अमन चैन बना रहे तो बेहतर: हाजी 
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत है। सुलह-समझौते से हल हो जाए यह मामला तो बेहतर है लेकिन इसके लिए कोर्ट की कार्रवाई अब बाधित नहीं होनी चाहिए। लंबा समय बीत गया है, अब जल्द ही इसका निर्णय आ जाना चाहिए। हमारा मानना है कि मुल्क में अमन, चैन बना रहे तो बेहतर होगा। बाकी हमने पहले भी कहा है कोर्ट का निर्णय हमें स्वीकार होगा। 

संशय पैदा करती है सुनवाई के बीच मध्यस्थता की पहल: विहिप 
-विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा कहते हैं कि सुनवाई के बीच अचानक एक बार फिर मध्यस्थता की पहल संशय पैदा करने वाली है। सुनवाई अब जब पूरी होने को है, ऐसे में मध्यस्थता की बात अचानक कहां से आ गई है। कहा कि मध्यस्थता पैनल सुलह-समझौते की एक विफल कोशिश कर चुका है। ऐसे में अब सारी उम्मीद कोर्ट पर ही है, हमें उम्मीद हैं कि जल्द ही रामलला के हक में निर्णय आ जाएगा।
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