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50 साल में न इतनी बारिश, न इतना नुकसान

Wed, 15 Apr 2015 08:49 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लख्ानऊ
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लख्ानऊ Updated Wed, 15 Apr 2015 08:49 AM IST
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Highest loss to farmers from rain in last 50 years

आंकडे़ बता रहे हैं कि पिछले पचास सालों में न तो इतनी बारिश हुई और न ही कभी इतना फसलों को नुकसान हुआ। किसान बदहाली की कगार पर खड़ा है तो रबी की हर फसल की उपज में भारी गिरावट का अनुमान आने वाले दिनों में महंगाई के और बढ़ने की ओर इशारा कर रहे हैं।

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कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक मार्च-अप्रैल में मिलाकर इतनी बारिश पिछले पचास सालों में नहीं हुई है। इस साल मार्च में 56 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस महीने में औसत वर्षा का रिकॉर्ड 10.2 मिलीमीटर ही है।
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पिछले पचास साल में  मार्च 2007 में सबसे ज्यादा 27 मिमी. बारिश दर्ज की गई थी। अप्रैल में अब तक 8.7 मिमी. बारिश हो चुकी है, जबकि इस महीने में औसत बारिश 3.2 मिमी. ही होती रही है। कृषि विभाग के अफसरों का अनुमान है कि 33 फीसदी और उससे ज्यादा फसल खराबे के दायरे में सूबे के करीब दो करोड़ काश्तकार आ रहे हैं।

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चिंता इसलिए : हर फसल की घट गई पैदावार

Highest loss to farmers from rain in last 50 years

कृषि विभाग ने भी मान लिया है कि रबी का पचास फीसदी उत्पादन लक्ष्य पाना भी मुमकिन नहीं रह गया है। गेहूं की पैदावार 50 फीसदी तक घटी है।  इस बार गेहूं का लक्ष्य 369 लाख मीट्रिक टन था, पर 200 लाख मीट्रिक टन भी पैदा हो जाए तो भी गनीमत है।

न केवल पैदावार घटा है बल्कि गेहूं की क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। इससेकिसान को गेहूं की पूरी कीमत नहीं मिल सकेगी। वहीं राई और सरसों की पैदावार 80 फीसदी तक घटने का अनुमान है।  

इस साल राई-सरसों के उत्पादन का लक्ष्य  10.00  लाख मीट्रिक टन था लेकिन उम्मीद 2 लाख मीट्रिक टन पैदा होने की ही रह गई है। आलू की पैदावार भी आधी ही होने का अनुमान है। अनुमान है कि इस साल 70 लाख मीट्रिक टन ही आलू पैदा होगा।

दालों का भी हो सकता है संकट

Highest loss to farmers from rain in last 50 years

चना का इस साल उत्पादन लक्ष्य 7 लाख मीट्रिक टन था पर 2 लाख मीट्रिक टन ही होने का अनुमान है। वहीं मटर का उत्पादन लक्ष्य 5 लाख मीट्रिक टन था पर अब माना जा रहा है कि 2 लाख मीट्रिक टन ही पैदावार हो पाएगा।

अरहर की पैदावार तो एक चौथाई ही रहने का अनुमान है। कृषि विभाग के अफसरों का मानना है कि 1 लाख मीट्रिक टन ही अरहर हो पाएगा। यही हाल मसूर का भी है। 6 लाख मीट्रिक टन उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले पैदावार की उम्मीद 1 लाख मीट्रिक टन ही है।

राजस्व के प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा ने बताया कि 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान वाले दायरे में काफी संख्या में किसान आ रहे हैं, लेकिन अभी तक हमें सभी जिलों से रिपोर्ट नहीं मिली है। इसलिए निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। जो भी किसान नुकसान की इस सीमा में आएगा, उसे हर हाल में मुआवजा मिलेगा।

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