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मृतकों के परिवारीजनों को 25-25 लाख मुआवजा दो, पैसे डॉक्टरों से वसूलो

Sat, 04 Jun 2016 11:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 04 Jun 2016 11:25 AM IST
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Highcourt issues order on the death of patients.

हड़ताली जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से केजीएमयू में मरीजों की मौत पर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि डॉक्टरों के इलाज से इन्कार करने से जान गंवा चुके बेकसूर मरीजों के परिवारीजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाय।

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मुआवजे की रकम 4 दिन तक हड़ताल में शामिल रहे डॉक्टरों के वेतन और भत्तों से वसूला जाए। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह सात दिन के अंदर अपने न्यायिक अधिकारियों की एक हाई पावर्ड कमेटी बनाए।
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यह कमेटी जांच जांच करेगी कि 30 मई से 2 जून 2016 के बीच हड़ताल की वजह से इलाज से न मिलने से कितने मरीजों की मौत हुई है। रिपोर्ट दो महीने में देनी होगी।

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हड़ताली डॉक्टरों की पहचान करने को भी दिया आदेश

Highcourt issues order on the death of patients.

जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक याचिका का बृहस्पतिवार को निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया।

खंडपीठ ने सूबे के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों और केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत को निर्देश किया कि वे उन डॉक्टरों की पहचान करें, जो हड़ताल पर गए या अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे या फिर विरोध की वजह से मरीजों का इलाज नहीं किया।

अदालत ने कहा कि वे इन सभी को दस्तावेजों में चेतावनी भेजेंगे और साथ ही उनके वेतन, भत्ते व मानदेय में डॉक्टरों के मामले के अनुसार कटौती करेंगे। जितने दिन इन डॉक्टरों ने काम नहीं उनकी ट्रेनिंग का उतना समय भी बढ़ाया जाएगा।

हड़ताल खत्म तो मामला खत्म, ऐसा नहीं होगा

Highcourt issues order on the death of patients.

अतिरिक्त महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल, केजीएमयू वीसी रविकांत ने अदालत को बताया कि जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है। व्यवस्था ठीक हो गई है।

इस पर, खंडपीठ ने कहा कि हड़ताल खत्म होने से मामला खत्म नहीं हो जाता। भविष्य में ऐसा फिर न हो, इसके लिए कार्रवाई करनी होगी।

विरोध जताने के लिए डॉक्टरों का मरीजों को देखने की अपनी ड्यूटी करने से मना करना, उन्हें इलाज देने से मना कर देना, उनकी जान बचाने की कोशिश से ही इन्कार कर देना किसी भी लिहाज से स्वीकारा नहीं जा सकता।

आपराधिक केस दर्ज करवा सकते हैं मरीज व परिवारीजन
हाईकोर्ट ने हड़ताल के दौरान इलाज से महरूम रहे मरीजों व मृतकों के परिवारीजनों को विकल्प दिया है कि वे चाहें तो इलाज से मना करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ आपराधिक व हानि पहुंचाने का मामला दर्ज करवा सकते हैं। ऐसे डॉक्टरों पर वाजिब कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

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