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हाईकोर्ट ने रद्द की गोंडा एनकाउंटर के तीन पुलिसकर्मियों की फांसी की सजा

Thu, 09 Mar 2017 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 09 Mar 2017 02:21 AM IST
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 highcourt decision on gonda encounter case.

गोंडा में 1982 में हुई मुठभेड़ को सही ठहराते हुए हाईकोर्ट ने बुधवार को तीन आरोपियों की फांसी की सजा रद्द कर दी और उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।

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सीबीआई कोर्ट ने 5 अप्रैल 2013 को मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए आठ पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई थी, जिसमें आरबी सरोज, राम नायक पांडेय और राम करण सिंह को सजा-ए-मौत दी गई थी।
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पूर्व पुलिसकर्मी नसीम अहमद, राजेंद्र प्रसाद सिंह और परवेज हुसैन को दी गई सजाएं भी रद्द करते हुए उन्हें रिहा करने के निर्देश दिए हैं।
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इस मुठभेड़ में तत्कालीन डिप्टी एसपी केपी सिंह समेत 12 ग्रामीण मारे गए थे। केपी सिंह आईएएस अधिकारी किंजल सिंह के पिता थे।

गलत था निचली अदालत का फैसला

 highcourt decision on gonda encounter case.

अपने निर्णय में जस्टिस प्रशांत कुमार और जस्टिस महेंद्र दयाल ने कहा कि मुठभेड़ फर्जी करार देने का निचली अदालत का फैसला गलत था। जो साक्ष्य सामने आए हैं, उनके अनुसार एनकाउंटर सही था।

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में निचली अदालत के निर्णय और उसमें दी गई सजाओं को गंभीर रूप से गैरकानूनी और अनियमित बताते हुए कहा कि इन आदेशों को बनाए नहीं रखा जा सकता।

आरबी सरोज, राम नायक पांडेय, राम करण सिंह, नसीम अहमद, राजेंद्र प्रसाद सिंह और परवेज हुसैन इस समय हिरासत में हैं। हाईकोर्ट ने सभी को किसी और केस के बाकी न रहने की सूरत में रिलीज करने के निर्देश भी दिए हैं।

मामले में मिली थी किसे क्या सजा

 highcourt decision on gonda encounter case.

राज बहादुर सरोज : मौत की सजा। साथ में दो वर्ष सश्रम कारावास, तीन वर्ष कारावास और तीन हजार जुर्माना।

राम नायक पांडेय : मौत की सजा। साथ ही दो वर्ष कठोर कारावास।

राम करण सिंह : मौत की सजा। साथ ही दो वर्ष सश्रम कारावास।

नसीम अहमद : उम्रकैद, 15 हजार जुर्माना और तीन वर्ष सश्रम कारावास व पांच हजार जुर्माना।

राजेंद्र प्रसाद सिंह : उम्रकैद और 15 हजार जुर्माना। साथ ही दो साल सश्रम कारावास।

परवेज हुसैन : उम्रकैद और 15 हजार जुर्माना। साथ ही दो साल व तीन साल सश्रम कारावास की दो सजाएं और पांच हजार जुर्माना।

क्या मिली थी सजा
सीबीआई अदालत ने मुठभेड़ को फर्जी मानते हुए कौड़िया के तत्कालीन थाना प्रभारी आरबी सरोज, तत्कालीन मुख्य आरक्षी करनैलगंज रामनायक पांडेय और कौड़िया के तत्कालीन सिपाही रामकरन को फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा नवाबगंज थाने की लकड़मंडी चौकी के इंचार्ज राजेंद्र प्रसाद सिंह, तत्कालीन प्लाटून कमांडर पीएसी सूबेदार रमाकांत दीक्षित, सब इंस्पेक्टर नसीम अहमद, मंगला सिंह और परवेज हुसैन को उम्रकैद की सजा दी। वहीं, मृत सीओ केपी सिंह के तत्कालीन रीडर प्रेम सिंह रैकवार को दोषमुक्त कर दिया था।

यह था मामला

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गोंडा के माधवपुर गांव में 34 साल पहले डकैतों को पकड़ने के लिए रेड डालने गए डिप्टी एसपी केपी सिंह की फायरिंग में मौत के बाद मार दिए गए 12 लोगों के मामले में सीबीआई अदालत ने इसे फर्जी एनकाउंटर मानते हुए आठ पुलिस कर्मियों को दोषी माना था। इनमें से तीन पुलिस वालों को फांसी और पांच को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कुल 19 पुलिस वालों को आरोपी बनाया था। इनमें से 10 आरोपियों की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई। इस मामले में वर्ष 2013 में आए सीबीआई अदालत के फैसले में आठ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया।

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