महंगा पड़ा हाईकोर्ट से मजाक करना, ठोका जुर्माना
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तथ्यों को छिपाकर याचिका दायर करना एक अपीलकर्ता को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपीलकर्ता पर 50 हजार रुपये का हर्जाना ठोका है।
महीने भर में हर्जाने की रकम जमा नहीं कराने पर भू-राजस्व की तरह इसकी वसूली की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने अपीलकर्ता द्वारा दायर विशेष अपील खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने यह फैसला जमाल मोहम्मद खां की विशेष अपील पर सुनाया। इसमें अपीलकर्ता जमाल ने एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी।
पहले भी खारिज हुई थी याचिका
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इसके पहले भी इसी मामले में याची ने दो अन्य याचिकाएं दायर की थीं। प्रतिपक्षी वकील सतीशचंद्र कशिश ने कोर्ट को बताया कि ये दोनों याचिकाएं खारिज हो गई थीं और इनमें फैजाबाद खंड के उप रजिस्ट्रार फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स के आदेशों को चुनौती दी गई थी।
यह मामला फैजाबाद की सोसाइटीज का जल्द चुनाव कराए जाने से संबंधित था। अपीलकर्ता ने पहले दो अन्य याचिकाएं दायर करने का जिक्र नहीं किया।
अदालत ने फैसले में कहा कि अपीलकर्ता ने न सिर्फ कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया बल्कि जरूरी तथ्यों को छिपाया। साथ ही अपीलकर्ता न तो एकल न्यायाधीश के समक्ष और न ही दो न्यायाधीशों की खंडपीठ के समक्ष साफगोई के साथ आया।
ऐसे में उसकी यह अपील 50 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज की जाती है। हर्जाने की यह रकम मीडिएशन सेंटर को दी जाएगी।