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Lucknow News: कलमी आम के पेड़ों के कटान पर हाईकोर्ट सख्त
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लखनऊ। मलिहाबाद समेत प्रदेश के आम उत्पादक इलाकों में दशहरी जैसे कलमी प्रजाति के आम के पेड़ों के कटान पर हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद दो हफ्ते में याचिकाकर्ता इसका प्रतिउत्तर दाखिल कर सकेगा।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश महेश साहू की जनहित याचिका पर दिया। इसमें वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाया गया है। याची ने 25 फरवरी की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके तहत पेड़ों के कटान संबंधी पहले जारी अधिसूचना को 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
याची ने कहा कि सात जनवरी 2020 की अधिसूचना में देसी आम के पेड़ों समेत खास तौर पर कलमी प्रजाति के पेड़ों के कटान को प्रतिबंधित किया गया था। इसके पहले वर्ष 2017 में जारी अधिसूचना में इन पेड़ों को कटान सूची में शामिल किया गया था। इसके नतीजतन प्रदेश के आम उत्पादक क्षेत्रों में कलमी आम के पेड़ों की अंधाधुंध कटान हो रही है। इससे कलमी आमों की प्रजाति पर गहरा असर पड़ रहा है। ऐसे में 25 फरवरी की अधिसूचना का बढ़ाया जाना गैरकानूनी और मनमाना है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करके अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की है।
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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश महेश साहू की जनहित याचिका पर दिया। इसमें वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव को पक्षकार बनाया गया है। याची ने 25 फरवरी की उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसके तहत पेड़ों के कटान संबंधी पहले जारी अधिसूचना को 31 दिसंबर 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
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याची ने कहा कि सात जनवरी 2020 की अधिसूचना में देसी आम के पेड़ों समेत खास तौर पर कलमी प्रजाति के पेड़ों के कटान को प्रतिबंधित किया गया था। इसके पहले वर्ष 2017 में जारी अधिसूचना में इन पेड़ों को कटान सूची में शामिल किया गया था। इसके नतीजतन प्रदेश के आम उत्पादक क्षेत्रों में कलमी आम के पेड़ों की अंधाधुंध कटान हो रही है। इससे कलमी आमों की प्रजाति पर गहरा असर पड़ रहा है। ऐसे में 25 फरवरी की अधिसूचना का बढ़ाया जाना गैरकानूनी और मनमाना है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करके अगली सुनवाई 11 सितंबर को तय की है।
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