मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या पर सीबीआई जांच की मांग पर अपना पक्ष रखे सरकार: हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की जांच सीबीआई से कराने और जेलों में सुरक्षा व्यवस्था के पर्याप्त इंतजाम करने का आग्रह करती एक जनहित याचिका पर राज्य सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा है। इसके लिए उसे तीन हफ्ते का समय दिया गया है।
इस मामले में अधिवक्ता मोती लाल यादव ने याचिका दायर की थी। जेलों में सीसीटीवी कैमरे और मोबाइल का इस्तेमाल रोकने के लिए जैमर आदि की व्यवस्था में कमी के मुद्दे उठाए हैं। साथ ही अखबारों में प्रकाशित खबरों को याचिका में प्रस्तुत करते हुए मुन्ना बजरंगी की हत्या का जिक्र किया है।
याची का कहना था कि पहले भी प्रदेश की जेलों में इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं। जेलों में कैदियों के पास मोबाइल फोन, नशीले पदार्थ और पिस्तौल आदि हथियार मिल चुके हैं। इसी नाते जेलों में हत्याएं हो रही हैं। इन पर अंकुश लगना चाहिए।
बुजुर्ग और बीमार बंदियों की रिहाई का आदेश दे सरकार
उनका कहना था कि प्रदेश की सभी जेलों में सुरक्षा के सख्त इंतजाम होने चाहिए। इसके लिए पर्याप्त स्टाफ मुहैया करवाना जाए। इसके अलावा 75 वर्ष से अधिक उम्र वाले और बीमार बंदियों की रिहाई के निर्देश भी सरकार को देने चाहिए।
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या की जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाई जाए। राज्य सरकार के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय देने की मांग की। चीफ जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले और जस्टिस विवेक चौधरी ने इसके लिए उन्हें तीन हफ्ते का समय दिया। इसके बाद याचिका पर अगली सुनवाई होगी।