{"_id":"6352362da727ed27000755a3","slug":"high-court-said-the-state-government-should-give-compensation-of-rs-10-lakh-to-the-disabled-student","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News : हाईकोर्ट ने कहा, दिव्यांग छात्र को राज्य सरकार 10 लाख रुपये का मुआवजा दे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News : हाईकोर्ट ने कहा, दिव्यांग छात्र को राज्य सरकार 10 लाख रुपये का मुआवजा दे
Fri, 21 Oct 2022 11:33 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 21 Oct 2022 11:33 AM IST
सार
कोर्ट ने कहा कि अगर दो महीने के भीतर मुआवजा नहीं दी जाती है तो नौ फीसदी सालाना ब्याज के साथ धनराशि देनी होगी। कोर्ट ने छात्र के सिक्युरिटी मनी को भी नौ फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने छात्र सत्यम वर्मा की याचिका पर किया।
विज्ञापन
लखनऊ हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक दिव्यांग छात्र को सीट आवंटित होने के बावजूद दाखिला न दिए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो महीने में इस छात्र को 10 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। सरकार यह धनराशि इसके लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों से वसूल सकती है।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि अगर दो महीने के भीतर मुआवजा नहीं दी जाती है तो नौ फीसदी सालाना ब्याज के साथ धनराशि देनी होगी। कोर्ट ने छात्र के सिक्युरिटी मनी को भी नौ फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने छात्र सत्यम वर्मा की याचिका पर किया।
विज्ञापन
याची का कहना था कि प्री आयुष टेस्ट 2016 में उसकी कैटेगारी रैंक 5,336 आई थी। मेडिकल बोर्ड द्वारा उसे 50 से 70 प्रतिशत तक विकलांग पाया गया था। इसके बाद उसने 15 नवंबर 2016 को द्वितीय काउंसिलिंग में भाग लिया और उसे साहू रामनारायण मुरली मनोहर आयुर्वेदिक कॉलेज, बरेली में सीट आवंटित कर दी गई। जब छात्र वहां दाखिला लेने पहुंचा तो उसे बताया गया कि वहां की सभी सीटें पहले ही भर चुकी हैं।
विज्ञापन
वहीं याचिका पर जवाब देते हुए कॉलेज की ओर से कहा गया कि तत्कालीन निदेशक आयुर्वेद द्वारा काउंसिलिंग बोर्ड को बताया गया था कि याची ने प्रवेश लेने से मना कर दिया था। याचिका का राज्य सरकार और महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा की ओर से विरोध किया गया। न्यायालय ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची के लिए खाली रखी गई सीट दूसरे को आवंटित कर गलत किया गया। चिकित्सा शिक्षा व उक्त कॉलेज राज्य सरकार के अंग हैं। लिहाजा उनके द्वारा की गई गलती की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की ही है।