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High Court: हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी, सिर्फ अल्पसंख्यक के चलाने से संस्थान अल्पसंख्यक नहीं हो जाता

Tue, 13 Sep 2022 10:19 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 13 Sep 2022 10:19 PM IST
सार

लखनऊ के एमटीवी बुद्धिस्ट रिलीजियस ट्रस्ट की याचिका पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने ट्रस्ट को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान मानने से भी इंकार कर दिया।

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High court's big comment on minority institutions.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के निर्धारण के संबंध में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कहा कि किसी संस्थान को सिर्फ इस आधार पर अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जा सकता कि उसका संचालन अल्पसंख्यक वर्ग के व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने इस संबंध में दाखिल उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार ने एक शैक्षिक संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से इन्कार कर दिया था। यह आदेश न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने लखनऊ के एमटीवी बुद्धिस्ट रिलीजियस ट्रस्ट की याचिका पर दिया।

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याचियों ने खुद के द्वारा संचालित कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने के लिए महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण को निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। याचिका में उस शासनादेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण विभाग में भाषा व धर्म के आधार पर गैर सरकारी मेडिकल, डेंटल व पैरा मेडिकल कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान घोषित करने के लिए मानदंड निर्धारित किए हैं। 
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कोर्ट ने आदेश दिया कि जब संस्थान स्थापित किया गया था, तब याची ट्रस्ट अल्पसंख्यक नहीं था। बाद में ट्रस्ट के सदस्यों ने बौद्ध धर्म अपनाया। ऐसे में सिर्फ इस आधार पर ट्रस्ट के संस्थान को अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान नहीं माना जा सकता है। साथ ही कहा कि अगर किसी सोसायटी या ट्रस्ट में किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य उस समय शामिल नहीं थे, जब उसने एक शैक्षणिक संस्थान की स्थापना की तो ऐसी स्थिति में संबंधित शिक्षण संस्थान को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना जाएगा।

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