हाईकोर्ट से दयाशंकर को झटका, ठुकराई गिरफ्तारी रोकने की अपील
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करने के मामले में दर्ज केस में वांछित बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को कोई राहत नहीं दी।
दयाशंकर ने अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर रद्द के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें दयाशंकर के मामले को सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार बताते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसके खिलाफ 20 जुलाई को हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी, जिसे रद्द किया जाना चाहिए। उसके खिलाफ आईपीसी 504, 509, 153-ए और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की 3 (1)(एक्स) धाराएं लगाई गई हैं।
उसके वकील के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरियाणा सरकार बनाम चौधरी भजनलाल और राजीव थापर बनाम मदनलाल कपूर जैसे मामलों में एफआईआर रद्द करने को लेकर दिए गए निर्णय दयाशंकर के मामले में भी लागू होते हैं।
'हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत'
दूसरी ओर प्रदेश सरकार के वकील ने कहा कि दयाशंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जरूरत है। अपने निर्णय में जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस रविंद्रनाथ मिश्र - द्वितीय की बेंच ने दयाशंकर के वकील से पूछा कि वे किन हालात में दयाशंकर के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को लागू होना मान रहे हैं?
हाईकोर्ट ने इस पर उन्हें जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा। हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से भी हलफनामा देकर बताने को कहा है कि एफआईआर में किन आपत्तिजनक सामग्री व तथ्यों को शामिल किया गया है।
हलफनामे में उन्हें यह भी बताना होगा कि हिरासत में लेकर दयाशंकर से पूछताछ करने की क्या जरूरत है? मामले की अगली सुनवाई 8 अगस्त को तय की गई है। दयाशंकर के वकील को 5 अगस्त तक हाईकोर्ट को जवाब देना होगा।