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पीजीआई में मुफ्त इलाज पर कोर्ट से मिली राहत
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 10 Jun 2014 02:24 AM IST
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राज्य कर्मचारियों को एसजीपीजीआई जैसे अन्य विशिष्ट अस्पतालों में मुफ्त इलाज के मसले पर हाईकोर्ट से राहत मिल गई है।
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हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को कर्मचारियों की इस मांग पर फिर से विचार करने के निर्देश दिए हैं। इस निर्णय से राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने खुशी जताई है।
हालांकि इस पर अंतिम निर्णय जुलाई में होने की उम्मीद है।
दरअसल, राज्य कर्मचारियों ने पीजीआई जैसे विशिष्ट अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सुविधा सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर 12 नवंबर से 22 नवंबर 2013 तक हड़ताल की थी।
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हाईकोर्ट ने इस हड़ताल का संज्ञान लिया था। बाद में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में राज्य कर्मचारियों की चार प्रमुख मांगों को तत्काल मानने का वचन दिया था।
चार मांगों में एक मांग एसजीपीजीआई में मुफ्त इलाज की सुविधा की भी थी। इसके बावजूद सरकार ने इस मांग को मानने से इन्कार कर दिया।
बाद में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई बैठक में स्वास्थ्य विभाग ने कैशलेस इलाज की सुविधा न देने का निर्णय लिखित में जारी कर दिया।
इसी के बाद राज्य कर्मचारी हाईकोर्ट की शरण में चले गए। कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में किए सरकार के वादे की याद दिलाई।
हाईकोर्ट ने इस मसले पर प्रदेश सरकार से फिर से विचार करने के लिए कहा है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी व महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने कहा कि सरकार यह दलील दे रही है कि 16 लाख राज्य कर्मचारी हैं।
सभी के परिवारों की संख्या मिलाकर 60 लाख होती है। ऐसे में कैशलेस इलाज की सुविधा दे पाना सरकार के लिए संभव नहीं है।
परिषद के नेताओं ने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जिसकी 10 से 15 हजार रुपये वेतन है वह गंभीर बीमारी में पांच लाख रुपये की तत्काल में व्यवस्था कहां से कर सकता है।
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