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आय के 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकती किस्त
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 24 Aug 2013 02:06 AM IST
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किस्तों पर मकान व प्लॉट लेने वाले निम्न आय वर्ग के लोगों को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बड़ी राहत दी है।
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अदालत ने कहा है कि ऐसे तबके को दिए जाने वाले मकान व प्लॉट की किस्त उनकी मासिक आमदनी के 50 फीसदी से कतई ज्यादा नहीं होनी चाहिए। इससे ज्यादा किस्त परउसके लिए रोटी का संकट खड़ा हो सकता है।
साथ ही राजधानी के एक ईडब्ल्यूएस के आवंटी के मकान की किस्तें उसकी आमदनी के 50 फीसदी से ज्यादा तय करने के यूपी आवास-विकास परिषद के फैसले पर सख्त ऐतराज जताया। कोर्ट ने कहा-परिषद ने बगैर दिमाग का इस्तेमाल किए ऐसा मनमाना फैसला किया।
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न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता की रिट मंजूर करते हुए गरीबों को सहूलियत से आशियाना मुहैया हो इसके लिए यह अहम विधि व्यवस्था दी।
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याची ने मकान का आवंटन रद्द किए जाने के 31 जनवरी 2008 केआदेश को चुनौती दी। उस आदेश को अदालत ने निरस्त कर दिया।
कोर्ट ने यूपी आवास विकास परिषद समेत अन्य पक्षकारों को निर्देश दिया है कि इस फैसले की टिप्पणी को ध्यान में रखकर याची को उसका मकान आवंटित किया जाए।
वहीं मकान उपलब्ध न होने पर उसे ईडब्ल्यूएस श्रेणी का दूसरा मकान मुहैया कराया जाए और इसकी किस्तें फैसले के प्रकाश में फिर से निर्धारित की जाएं। कोर्ट ने इस संबंध में परिषद को दो माह में निर्णय लेने केनिर्देश दिए।
अदालत की अहम टिप्पणियां
यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह जनता सामाजिक असमानता को दूर करे। आमदनी की असमानता की खाई को कम करे और असमानता को खत्म करने की कोशिश करे।
सुविधाएं व मौके सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित न हो बल्कि विभिन्न पेशे के समूहों को भी मुहैया कराई जानी चाहिए।
अगर हाउसिंग बोर्ड व विकास प्राधिकरणों को संवैधानिक प्रावधानों की कसौटी पर परखा जाए तो कमजोर तबके के लिए मकान व भूखंडों केआवंटन केलिए शुरुआत में आमदनी का जो आकलन किया गया उसकी सीमा को बदला नहीं जा सकता। इससे गरीब परिवारों पर बोझ बढ़ता है जो उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
यह था मामला
सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने आवास विकास परिषद की राजधानी की वृंदावन योजना-2 में ईडब्ल्यूएस श्रेणी का मकान आवंटित कराया था।
इस योजना के तहत सालाना 25, 200 रुपये तक की आमदनी वालों को मकान दिए जाने थे। यानी कि मासिक आमदनी 2100 रुपए होनी चाहिए थी।
इसके तहत याची को 17 अप्रैल 2007 को पिछड़ी जाति श्रेणी केतहत ईडब्ल्यूएस (सेमी-फिनिश्ड) मकान आवंटित हुआ। जिसकी कीमत किस्तों में अदा की जानी थी।
बाद में परिषद ने इसकी कीमत 2,33,656 रुपए तय की और 2463 रुपये की 180 किस्तें अदा करने को कहा।
गुप्ता ने परिषद को अर्जी देकर आपत्ति जताया कि मकान दिए जाने वालों की आमदनी तो प्रतिमाह 2100 मानी गई है तो ऐसे में 2463 रुपये वह महीने में कैसे अदा कर पाएगा।
इस पर 24 अगस्त 2007 को परिषद ने याची को नोटिस देकर 25,956 रुपये उस समय तक की बकाया किस्त अदा करने को कहा। नोटिस के बाद जब वहकिस्तें देने में नाकाम रहे तो उनका आवंटन रद्द कर मार्जिन मनी जब्त कर ली गई। इस पर याची ने अदालत की शरण ली।