ये कहां फंस गए अखिलेश के पीएस
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तबादला संबंधी फाइल में व्हाइटनर लगाकर हेरफेर किए जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ खंड पीठ ने सीएम के सचिव आलोक कुमार को 13 अगस्त को तलब किया है।
व्हाइटनर लगाने के बाद नोटशीट पर तबादला के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी की बात लिखी गई है। कोर्ट ने फाइल को सील कर रजिस्ट्रार के पास सुरक्षित रखने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति उमानाथ सिंह व न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की खंडपीठ ने मंगलवार को यह आदेश मनोरंजन कर अधिकारी अमरनाथ के तबादला मामले में दिया। इसमें याची ने बिजनौर से बहराइच किए गए तबादले को चुनौती दी है।
याची की वकील मधुमिता बोस का तर्क था कि रिटायरमेंट में साल भर बाकी रहने पर याची का तबादला नहीं किया जा सकता। इसके जवाब में विभाग की तरफ से एक पत्र पेशकर तर्क दिया गया कि याची का स्थानांतरण मुख्यमंत्री के निर्देश पर किया गया है।
इस पर सोमवार को कोर्ट ने संबंधित फाइल के साथ पूरा ब्यौरा तलब कर मंगलवार को पेश किए जाने का आदेश दिया था।
कोर्ट में मंगलवार को जब तबादला संबंधी फाइल पेश हुई तो पता चला कि इस रिकॉर्ड में व्हाइटनर लगाकर कुछ हेरफेर किया गया है और फाइल पर पहले नोट की टिप्पणियां व हस्ताक्षर को मिटा दिया गया है।
अदालत ने कहा कि यह गौर किए जाने योग्य है कि कंप्यूटर टाइपिंग के बाद नोटशीट पर व्हाइटनर इसलिए लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने तबादला के लिए अपनी मंजूरी दी है।
इस पर अदालत ने कहा कि मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार, जिन्होंने नोटशीट पर बिगाड़ी गई जगह मैनुअल टाइपिंग के बाद अपने हस्ताक्षर किए हैं को इसे बताने के निर्देश दिया जाना उचित होगा। कोर्ट ने उन्हें इसको स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।