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अखिलेश सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

Sat, 07 Sep 2013 12:09 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
टीम डिजिटल/लखनऊ Updated Sat, 07 Sep 2013 12:09 PM IST
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high court decision on remote sensing application center matter

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर लखनऊ के तत्कालीन निदेशक की बर्खास्तगी आदेश को रद्द करने के साथ ही सेंटर व राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना ठोंका है।

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वर्ष 2003-04 के दौरान तत्कालीन लोकायुक्त के समक्ष की गई शिकायत पर याची और तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। शिकायतकर्ता ने कहा कि किसी ने शिकायत में उसके नाम का फर्जी इस्तेमाल किया।
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कोर्ट ने तत्कालीन राज्य सरकार समेत लोकायुक्त की कार्यप्रणाली के खिलाफ सख्त टिप्पणियां कर छह कर्मियों की तरफ से वर्ष 2003-04 में दाखिल की गई चार याचिकाओं को एक साथ मंजूर कर यह फैसला सुनाया।
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न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति विष्णु चंद्र गुप्ता की खंडपीठ ने यह फैसला बर्खास्त निदेशक अमरेंद्र नारायण सिंह व तीन अन्य कर्मियों राजीव मोहन, डॉ. सुशील कुमार शुक्ला एवं डॉ. टीएस कछवाहा की चार याचिकाओं पर सुनाया। इनमें याचियों ने खुद की बर्खास्तगी को अवैधानिक बताकर चुनौती दी थी।

अदालत ने फैसले में कहा कि न सिर्फ राज्य सरकार केतत्कालीन सचिव बल्कि रिमोट सेंसर एप्लीकेशन सेंटर ने अहम तथ्यों को छिपाने की कोशिश की।

संबंधित प्रावधानों को दरकिनार कर कार्रवाई संबंधी प्रश्नगत आदेशों केबचाव केलिए सरकार की तरफ से झूठा हलफनामा दाखिल किया गया जो विचलित करने वाला है। सेंटर के अध्यक्ष ने कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश की।

अदालत ने कहा कि लोकायुक्त के समक्ष की गई शिकायत से शिकायतकर्ता ने इन्कार किया और इसे रद्द करने की गुजारिश भी की। इसके बावजूद लोकायुक्त ने इस शिकायत की बाबत कार्रवाई की।

हैरतअंगेज यह कि लोकायुक्त की रिपोर्ट सिर्फ तीन लोगों से संबंधित थी, इसके बावजूद रिमोट सेंसिंग सेंटर से जुड़ी सोसाइटी के अध्यक्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस रिपोर्ट के तहत तीन अन्य कर्मियों राजीव मोहन, डॉ. सुशील कुमार शुक्ला एवं डॉ. टीएस कछवाहा केसंबंध में प्रश्नगत आदेश दे दिए।

कोर्ट ने चारों याचिकाओं को मंजूर कर इनमें चुनौती दिए गए आदेशों को रद्द कर दिया। साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोंका है, जो दो माह में कोर्ट में जमा करना होगा।

इसमें से प्रत्येक याची को एक-एक लाख की रकम मिलेगी और शेष हाईकोर्ट लखनऊ केमीडिएिशन सेंटर को दी जाएगी। इस रकम की अदायगी न किए जाने पर डीएम लखनऊ बकाया भू-राजस्व की तरह इसकी वसूली कर तीन माह में कोर्ट में जमा करेंगे।

अदालत ने प्रदेश के मुख्य सचिव को फैसले के प्रकाश में मामले की जांच करवाकर, झूठा हलफनामा देने व सरकार को प्रश्नगत आदेशों को जारी करने की सलाह देने के जिम्मेदारों से हर्जाने की वसूली करने केनिर्देश दिए हैं।

यह था मामला
याची अमरेंद्र नारायण सिंह रिमोट सेंसर केंद्र के निदेशक नियुक्त हुए थे। रामकृष्ण वर्मा के नाम से लोकायुक्त के समक्ष याची के खिलाफ शिकायत की गई। इसकी बाबत रामकृष्ण वर्मा ने पत्र भेजकर कहा कि उसके नाम का इस्तेमाल कर शिकायत की गई है।


इसके बावजूद लोकायुक्त ने 5 फरवरी 2003 को याची की बर्खास्तगी की सिफारिश कर दी कि याची व अन्य कर्मियों की नियुक्ति में कथित अनियमितताएं की गई हैं।

इसके तहत याची समेत अन्य कर्मियों की नियुक्ति शून्य घोषित कर याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके खिलाफ याची व कर्मियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

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