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बलरामपुर अस्पताल में इमिनोग्लोविन वैक्सीन के वॉयल हुए एक्सपायर
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बलरामपुर अस्पताल में हाईडोज एंटी रैबीज वैक्सीन एक्सपायर
मरीज 500 रुपये की वैक्सीन बाहर दो हजार रुपये में खरीदने को मजबूर
बलरामपुर अस्पताल में हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ एक्सपायर हो गई हैं। आरोप है कि ड्रग कॉर्पोरेशन से भी अभी तक ये वैक्सीन नहीं मिली हैं। ऐसे में लोग दो-दो हजार रुपये में वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं।
राजधानी के किसी भी सरकारी अस्पताल व सीएचसी में हाई डोज एंटी रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन वैक्सीन नहीं है। बलरामपुर में यह वैक्सीन थी, मगर वह भी सेंसिटिव टेस्ट में फेल हो रही थी। आरोप है कि रेट कांट्रैक्ट के तहत 400 वैक्सीन खरीदी गई थी, लेकिन 99 प्रतिशत सेंसिटिव टेस्ट में फेल हो गई। उधर, अस्पताल में वैैक्सीन का स्टॉक कागजों पर अभी तक दुरुस्त चल रहा है। अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट एमआई खान का कहना है कि एलपी बजट से हफ्तेभर पहले वैक्सीन मंगाई गई है, जल्द ही मरीजों को लगाई जाएगी। वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन को र्कई दफा कॉल किया गया, मगर उनका फोन नहीं उठा।
निजी अस्पताल में चार गुनी कीमत
सरकारी अस्पतालों में आरसी के तहत खरीदे जाने वाले वैक्सीन की कीमत करीब पांच सौ रुपये है, जबकि बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली एंटी रैबीज वैक्सीन करीब दो हजार रुपये की है।
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हाइड्रोफोबिया से बचाती है हाईजोड वैक्सीन
डॉक्टरों का कहना है कि ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ का असर मरीज को लगाए जाने के बाद ही शुरू हो जाता है, जबकि सामान्य एंटी रैबीज वैक्सीन का असर 10 से 14 दिन के बीच में शुरू होता है। इम्युनोग्लोबुलिन मरीज को हाइड्रोफोबिया से बचा लेता है।
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मरीज 500 रुपये की वैक्सीन बाहर दो हजार रुपये में खरीदने को मजबूर
बलरामपुर अस्पताल में हाई डोज एंटी रैबीज वैक्सीन ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ एक्सपायर हो गई हैं। आरोप है कि ड्रग कॉर्पोरेशन से भी अभी तक ये वैक्सीन नहीं मिली हैं। ऐसे में लोग दो-दो हजार रुपये में वैक्सीन खरीदने को मजबूर हैं।
राजधानी के किसी भी सरकारी अस्पताल व सीएचसी में हाई डोज एंटी रैबीज इम्युनोग्लोबुलिन वैक्सीन नहीं है। बलरामपुर में यह वैक्सीन थी, मगर वह भी सेंसिटिव टेस्ट में फेल हो रही थी। आरोप है कि रेट कांट्रैक्ट के तहत 400 वैक्सीन खरीदी गई थी, लेकिन 99 प्रतिशत सेंसिटिव टेस्ट में फेल हो गई। उधर, अस्पताल में वैैक्सीन का स्टॉक कागजों पर अभी तक दुरुस्त चल रहा है। अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट एमआई खान का कहना है कि एलपी बजट से हफ्तेभर पहले वैक्सीन मंगाई गई है, जल्द ही मरीजों को लगाई जाएगी। वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन को र्कई दफा कॉल किया गया, मगर उनका फोन नहीं उठा।
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निजी अस्पताल में चार गुनी कीमत
सरकारी अस्पतालों में आरसी के तहत खरीदे जाने वाले वैक्सीन की कीमत करीब पांच सौ रुपये है, जबकि बाजार में उच्च गुणवत्ता वाली एंटी रैबीज वैक्सीन करीब दो हजार रुपये की है।
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हाइड्रोफोबिया से बचाती है हाईजोड वैक्सीन
डॉक्टरों का कहना है कि ‘इम्युनोग्लोबुलिन’ का असर मरीज को लगाए जाने के बाद ही शुरू हो जाता है, जबकि सामान्य एंटी रैबीज वैक्सीन का असर 10 से 14 दिन के बीच में शुरू होता है। इम्युनोग्लोबुलिन मरीज को हाइड्रोफोबिया से बचा लेता है।