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Lucknow News: केजीएमयू में भी शुरू होगा हार्ट ट्रांसप्लांट
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लखनऊ। केजीएमयू में दो महीने में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा। संस्थान में यह सुविधा शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। डोनर और मरीजों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुरुआती पांच हृदय प्रत्यारोपण पूरी तरह मुफ्त होंगे। कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में हुई कार्यपरिषद की बैठक में यह निर्णय लिया जा चुका है। अभी एसजीपीजीआई में यह सुविधा उपलब्ध है।
केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग को हार्ट ट्रांसप्लांट का लाइसेंस पहले ही मिल चुका है। संस्थान में ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम और पैरामेडिकल स्टाफ भी उपलब्ध हैं। अन्य तैयारियां भी लगभग पूरी हैं। उम्मीद है कि दो माह में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा।
निजी में एक करोड़ रुपये, सरकारी में 15 लाख तक खर्च
हार्ट ट्रांसप्लांट बेहद महंगी चिकित्सा प्रक्रिया है। निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये तक खर्च आता है। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में यह प्रक्रिया 12 से 15 लाख रुपये में संभव है। केजीएमयू ने अभी ट्रांसप्लांट की शुल्क दर तय नहीं की है।
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लोहिया संस्थान ने भी शुरू की तैयारी
लोहिया संस्थान में भी हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हो गई है। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद तिवारी ने बताया कि बीते दिनों हृदय रोग विशेषज्ञों की बैठक में यह सुविधा शुरू करने पर विचार-विमर्श हुआ। उधर, लारी कॉर्डियोलॉजी के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. अक्षय प्रधान ने बताया हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने पर खून में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ सकता है। शुरुआती जांच सामान्य आने के बावजूद यदि सीने में दर्द, सांस फूलना या अन्य लक्षण रहें तो कुछ घंटे बाद ट्रोपोनिन की दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में केवल एक सामान्य ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर हार्ट अटैक की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जाना चाहिए। लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर आगे की जांच तय करते हैं।
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केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार कार्डियोवैस्कुलर एंड थोरेसिक सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग को हार्ट ट्रांसप्लांट का लाइसेंस पहले ही मिल चुका है। संस्थान में ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी उपकरण, प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम और पैरामेडिकल स्टाफ भी उपलब्ध हैं। अन्य तैयारियां भी लगभग पूरी हैं। उम्मीद है कि दो माह में हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू हो जाएगा।
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निजी में एक करोड़ रुपये, सरकारी में 15 लाख तक खर्च
हार्ट ट्रांसप्लांट बेहद महंगी चिकित्सा प्रक्रिया है। निजी अस्पतालों में इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये तक खर्च आता है। सरकारी चिकित्सा संस्थानों में यह प्रक्रिया 12 से 15 लाख रुपये में संभव है। केजीएमयू ने अभी ट्रांसप्लांट की शुल्क दर तय नहीं की है।
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लोहिया संस्थान ने भी शुरू की तैयारी
लोहिया संस्थान में भी हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू हो गई है। कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. भुवन चंद तिवारी ने बताया कि बीते दिनों हृदय रोग विशेषज्ञों की बैठक में यह सुविधा शुरू करने पर विचार-विमर्श हुआ। उधर, लारी कॉर्डियोलॉजी के हृदय रोग विशेषज्ञ प्रो. अक्षय प्रधान ने बताया हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचने पर खून में ट्रोपोनिन का स्तर बढ़ सकता है। शुरुआती जांच सामान्य आने के बावजूद यदि सीने में दर्द, सांस फूलना या अन्य लक्षण रहें तो कुछ घंटे बाद ट्रोपोनिन की दोबारा जांच की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में केवल एक सामान्य ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर हार्ट अटैक की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जाना चाहिए। लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर डॉक्टर आगे की जांच तय करते हैं।