{"_id":"683cbb76a4bcfdbb640092c1","slug":"health-sector-courses-are-appealing-to-youth-apart-from-traditional-ones-lucknow-news-c-13-1-lko1022-1231697-2025-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lucknow News: परंपरागत से हटकर युवाओं को भा रहे स्वास्थ्य क्षेत्र के पाठ्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lucknow News: परंपरागत से हटकर युवाओं को भा रहे स्वास्थ्य क्षेत्र के पाठ्यक्रम
विज्ञापन
लखनऊ। पिछले साल आरटीआई से मिली सूचना के अनुसार लखनऊ विश्वविद्यालय और इसके काॅलेजों में दाखिलों की संख्या 14 फीसदी कम हो गई है। दूसरी ओर नर्सिंग और पैरामेडिकल जैसे पाठ्यक्रमों के आवेदक तीन साल में दोगुने हो गए और इनकी सीटें शत-प्रतिशत भर रही हैं। युवाओं का रुझान बता रहा है कि अब परंपरागत के बजाय उनकी पहली पसंद स्वास्थ्य क्षेत्र के पाठ्यक्रम हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय का दायरा राजधानी के साथ पांच जनपदों में फैला है। पिछले तीन वर्ष में करीब 30 नए काॅलेजों की मान्यता के साथ इनकी संख्या करीब साढ़े पांच सौ पहुंच चुकी है। दाखिले में इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह डिग्री लेने के बाद नाैकरी न मिलना है। गोमतीनगर निवासी एडवोकेट विमलेश निगम ने पिछले साल यह आरटीआई डाली थी। इस साल अभी तक कॉलेजों में दाखिले नहीं हो सके हैं।
वहीं, दूसरी ओर अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से प्रदेश भर के नर्सिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए 1.30 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 1.10 लाख पहुंचा था। इस तरह एक साल में ही आवेदनों में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2023 में नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए 60 हजार आवेदन आए थे। इस लिहाज से देखें तो तीन साल में आवेदकों की संख्या दो गुना हो गई। पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में अभी भी आवेदन जारी हैं।
विज्ञापन
कोविड के बाद तेजी से बदला रुझान
कोविड-19 महामारी के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। मेडिकल कॉलेजों के साथ ही एमबीबीएस की सीटें भी काफी तेजी से बढ़ी हैं। इस समय प्रदेश में 80 मेडिकल काॅलेजों में 11,850 सीटें हैं। इतनी ज्यादा संख्या में डाॅक्टरों के तैयार होने के साथ ही सहयोगी चिकित्सीय स्टाफ की भी जरूरत होती है। इसी को देखते हुए नर्सिंग, पैरामेडिकल और फार्मा पाठ्यक्रमों की सीटें और आवेदक दोनों बढ़ रहे हैं।
नर्सिंग के 251 और पैरामेडिकल के 47 काॅलेज
इस समय नर्सिंग के सभी पाठ्यक्रमों में प्रदेश भर में 251 काॅलेज हैं। इनमें करीब 15 हजार सीटें हैं। पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के लिए प्रदेश में 47 काॅलेज हैं और इनकी सीट संख्या छह हजार के करीब है।
कोट-
तेजी से हो रहा सुधार
सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से सुधार हो रहा है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र में नए अस्पताल खुल रहे हैं। इनमें डाॅक्टरों के साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत भी होती है। इसीलिए इन पाठ्यक्रमों के प्रति युवाओं में काफी रुझान देखने को मिल रहा है। हमारा प्रयास है कि पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे, जिससे कि स्वास्थ्य क्षेत्र को कुशल कर्मी मिलें।
प्रो. लोकेश अग्रवाल, डीन, अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय का दायरा राजधानी के साथ पांच जनपदों में फैला है। पिछले तीन वर्ष में करीब 30 नए काॅलेजों की मान्यता के साथ इनकी संख्या करीब साढ़े पांच सौ पहुंच चुकी है। दाखिले में इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह डिग्री लेने के बाद नाैकरी न मिलना है। गोमतीनगर निवासी एडवोकेट विमलेश निगम ने पिछले साल यह आरटीआई डाली थी। इस साल अभी तक कॉलेजों में दाखिले नहीं हो सके हैं।
विज्ञापन
वहीं, दूसरी ओर अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से प्रदेश भर के नर्सिंग कॉलेजों में दाखिले के लिए 1.30 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 1.10 लाख पहुंचा था। इस तरह एक साल में ही आवेदनों में 20 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2023 में नर्सिंग पाठ्यक्रम के लिए 60 हजार आवेदन आए थे। इस लिहाज से देखें तो तीन साल में आवेदकों की संख्या दो गुना हो गई। पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में अभी भी आवेदन जारी हैं।
विज्ञापन
कोविड के बाद तेजी से बदला रुझान
कोविड-19 महामारी के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र में काफी सुधार हुआ है। मेडिकल कॉलेजों के साथ ही एमबीबीएस की सीटें भी काफी तेजी से बढ़ी हैं। इस समय प्रदेश में 80 मेडिकल काॅलेजों में 11,850 सीटें हैं। इतनी ज्यादा संख्या में डाॅक्टरों के तैयार होने के साथ ही सहयोगी चिकित्सीय स्टाफ की भी जरूरत होती है। इसी को देखते हुए नर्सिंग, पैरामेडिकल और फार्मा पाठ्यक्रमों की सीटें और आवेदक दोनों बढ़ रहे हैं।
नर्सिंग के 251 और पैरामेडिकल के 47 काॅलेज
इस समय नर्सिंग के सभी पाठ्यक्रमों में प्रदेश भर में 251 काॅलेज हैं। इनमें करीब 15 हजार सीटें हैं। पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के लिए प्रदेश में 47 काॅलेज हैं और इनकी सीट संख्या छह हजार के करीब है।
कोट-
तेजी से हो रहा सुधार
सरकार के प्रयासों से स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से सुधार हो रहा है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र में नए अस्पताल खुल रहे हैं। इनमें डाॅक्टरों के साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत भी होती है। इसीलिए इन पाठ्यक्रमों के प्रति युवाओं में काफी रुझान देखने को मिल रहा है। हमारा प्रयास है कि पढ़ाई की गुणवत्ता बनी रहे, जिससे कि स्वास्थ्य क्षेत्र को कुशल कर्मी मिलें।
प्रो. लोकेश अग्रवाल, डीन, अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी