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बिना मुखिया के चल रहा स्वास्थ्य विभाग, सीएम की नाराजगी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू
Tue, 21 Jul 2020 02:17 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 21 Jul 2020 02:17 PM IST
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सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बिना मुखिया के ही कोरोना महामारी से लड़ाई लड़ रहा है। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य का पद 20 दिन से खाली है। जबकि शासन में बैठे जिम्मेदार मनमाफिक अधिकारी को तैनात करने की जुगत भिड़ा रहे हैं। इतना ही नहीं, इसके लिए एक शासनादेश भी करा लिया गया है, लेकिन नियुक्ति के आदेश अभी जारी नहीं किए गए हैं।
रविवार रात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव आरके तिवारी को तत्काल महानिदेशक नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। डॉ. रुकुमकेश 30 जून को स्वास्थ्य महानिदेशक के पद से रिटायर हुए थे। उनके बाद डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी को महानिदेशक परिवार कल्याण बनाकर चिकित्सा स्वास्थ्य का भी चार्ज दे दिया गया था। जबकि दोनों पद पर अलग-अलग अधिकारी तैनात होते हैं। डॉ. चतुर्वेदी को महानिदेशक परिवार कल्याण बनाने से पहले उस पद पर तैनात रहे डॉ. बद्री विशाल को महानिदेशक प्रशिक्षण बना दिया गया।
वर्तमान में वरिष्ठतम अधिकारियों में डॉ. राकेश दुबे और डॉ. डीएस नेगी का नाम लिया जा रहा है। डॉ. नेगी अभी लोकबंधु और सिविल अस्पताल के निदेशक हैं। जबकि डॉ. राकेश दुबे परिवार कल्याण महानिदेशालय में तैनात हैं। डॉ. मधु सक्सेना एक साल के अंदर सेवानिवृत्ति की लाइन में होने के कारण महानिदेशक की दौड़ से बाहर हो गई हैं।
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रविवार रात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव आरके तिवारी को तत्काल महानिदेशक नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। डॉ. रुकुमकेश 30 जून को स्वास्थ्य महानिदेशक के पद से रिटायर हुए थे। उनके बाद डॉ. मिथिलेश चतुर्वेदी को महानिदेशक परिवार कल्याण बनाकर चिकित्सा स्वास्थ्य का भी चार्ज दे दिया गया था। जबकि दोनों पद पर अलग-अलग अधिकारी तैनात होते हैं। डॉ. चतुर्वेदी को महानिदेशक परिवार कल्याण बनाने से पहले उस पद पर तैनात रहे डॉ. बद्री विशाल को महानिदेशक प्रशिक्षण बना दिया गया।
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वर्तमान में वरिष्ठतम अधिकारियों में डॉ. राकेश दुबे और डॉ. डीएस नेगी का नाम लिया जा रहा है। डॉ. नेगी अभी लोकबंधु और सिविल अस्पताल के निदेशक हैं। जबकि डॉ. राकेश दुबे परिवार कल्याण महानिदेशालय में तैनात हैं। डॉ. मधु सक्सेना एक साल के अंदर सेवानिवृत्ति की लाइन में होने के कारण महानिदेशक की दौड़ से बाहर हो गई हैं।
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एक अधिकारी का रास्ता साफ करने के लिए किया गया यह बदलाव
कैबिनेट ने महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य के पद पर निदेशक की तैनाती का आधार वरिष्ठता को बदलकर सेवानिवृत्ति में कम से कम एक साल का समय कर दिया है। साथ ही दावेदार की योग्यता, श्रेष्ठता और बेहतर प्रशासनिक क्षमता का भी आंकलन होगा। इसके लिए प्रदेश कैबिनेट ने उप्र चिक्तिसा एवं स्वास्थ्य सेवा नियमावली 2004 यथा संशोधित 2011 में संशोधन के साथ इसकी अनुमति भी दे दी है।
इस बदलाव के बारे में शासन का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक के पद पर अधिकतर चयनित अधिकारी दो-तीन या अधिकतम छह माह के अंदर ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे विभागीय कार्य में जरूरी गतिशीलता नहीं आ रही है। महानिदेशक चिकित्सा के पद पर तैनात अफसर को कार्य करने के पर्याप्त मौका देने के लिए ये बदलाव किए गए हैं।
नए नियम में मौलिक रूप से नियुक्त ऐसे निदेशकों में से जिनकी सेवानिवृत्ति में चयन वर्ष की प्रथम तिथि को न्यूनतम एक साल का समय बचा हो, उसे पदोन्नति दी जाएगी। अभी तक वरिष्ठतम चिकित्सक को महानिदेशक का पद देने का प्रावधान था। इनमें एक पद महानिदेशक परिवार कल्याण और दूसरा महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को दिया गया है। माना जा रहा है कि एक अधिकारी का रास्ता साफ करने के लिए यह बदलाव किया गया है।
इस बदलाव के बारे में शासन का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक के पद पर अधिकतर चयनित अधिकारी दो-तीन या अधिकतम छह माह के अंदर ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इससे विभागीय कार्य में जरूरी गतिशीलता नहीं आ रही है। महानिदेशक चिकित्सा के पद पर तैनात अफसर को कार्य करने के पर्याप्त मौका देने के लिए ये बदलाव किए गए हैं।
नए नियम में मौलिक रूप से नियुक्त ऐसे निदेशकों में से जिनकी सेवानिवृत्ति में चयन वर्ष की प्रथम तिथि को न्यूनतम एक साल का समय बचा हो, उसे पदोन्नति दी जाएगी। अभी तक वरिष्ठतम चिकित्सक को महानिदेशक का पद देने का प्रावधान था। इनमें एक पद महानिदेशक परिवार कल्याण और दूसरा महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य को दिया गया है। माना जा रहा है कि एक अधिकारी का रास्ता साफ करने के लिए यह बदलाव किया गया है।