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सुना है क्या: जांच निपटाने में साहब निपुण, सुरक्षा कवच से घिरे; 'सर्जरी के संदेश से हड़कंप' के पढ़ें किस्से

Sat, 03 Jan 2026 09:19 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Sat, 03 Jan 2026 09:19 AM IST
सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

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Have you heard? The boss is skilled at handling investigations, surrounded by a protective shield; read the st
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'जांच निपटाने में साहब बड़े निपुण' की कहानी। इसके अलावा 'सुरक्षा कवच से घिरे साहब' और 'सर्जरी के संदेश से हड़कंप' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...
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जांच निपटाने में साहब बड़े निपुण

राजधानी आजकल कब्जों को लेकर सुर्खियों में है। एक मकान पर कब्जे की शिकायत आलाकमान तक पहुंची तो आनन-फानन में आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया। दूसरा मामला इससे कम संगीन नहीं था, जहां सार्वजनिक भूमि को ही माफिया का करीबी अपनी समझ बैठा और उसकी सरेआम गुंडई ने लोगों के मन में दहशत भर दी।

पुलिस के साथ उसकी दोस्ती का भेद खुला तो डैमेज कंट्रोल शुरू हो गया। हालांकि इलाके के एक निपुण अफसर जांच को दफन करने की जुगत में हैं। आरोपियों पर कितना हल्का हाथ रखना है, उन्हें बखूबी पता है। फिलहाल नोटिस भेजने का खेल जारी है। पहले मामले में आलाकमान के दखल से गिरफ्तारी हुई, दूसरे में धाराओं की कमियां गिनाई जा रही हैं।
 
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सुरक्षा कवच से घिरे साहब

किसानों को पानी देने वाले महकमे के बड़े साहब पर भले ही तमाम आरोप लग रहे हो, लेकिन उनका सुरक्षा कवच इतना तगड़ा है कि पांच साल में उन्हें कोई हिला नहीं सका। महकमे के इंजीनियरों के तबादले, उनके प्रमोशन और एक इंजीनियर को दो से तीन-तीन डिवीजन का चार्ज देने को लेकर बड़े-बड़े खेल हो रहे हैं। हाल में ही 32 करोड़ के घोटाले के आरोपों से घिरे एक एसई साहब को चीफ साहब बनाने के एवज में बड़ा खेल हुआ था, जिसकी ऊपर शिकायत भी हुई, लेकिन काकस इतना तगड़ा हैं कि साहब ने जीरो टॉलरेंस की नीति को ताक पर रख प्रमोशन का आदेश जारी कर दिया।
 
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सर्जरी के संदेश से हड़कंप

नए साल में नेताजी ने संगठन के भीतर सर्जरी करने का संदेश दे दिया है। गोपनीय रिपोर्ट मंगाई जा रही है कि कहां एसआईआर में काम में पीछे रहे? पता चला कि एक नेताजी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं, पर उनके क्षेत्र में ही काम बहुत पीछे रहा। बूथ लेवल एजेंट तक नहीं बनाए गए। अब इस तरह के और नेताओं की भी सूची बनाई जा रही है। हालांकि, सेटिंगबाज नेता मुख्यालय वालों को फोन करके उनका नाम सूची में न डालने की गुहार भी लगा रहे हैं।
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