फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Hargovind Kushwaha talks about changes in today's politics.

कितनी बदल गई सियासत: पहले खुद का घर तक नहीं बनवा पाते थे विधायक, पर अब उनके पास क्षेत्र के लिए समय ही नहीं

Tue, 14 Dec 2021 01:23 PM IST
ishwar ashish विकास सनाड्य, अमर उजाला, झांसी
विकास सनाड्य, अमर उजाला, झांसी Published by: ishwar ashish Updated Tue, 14 Dec 2021 01:23 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा का कहना है कि पहले लोग समाज और क्षेत्र की सेवा के लिए राजनीति में आते थे पर अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं।

विज्ञापन
Hargovind Kushwaha talks about changes in today's politics.
हरगोविंद कुशवाहा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष और विचारक हरगोविंद कुशवाहा मौजूदा राजनीति पर सवाल उठाते हैं। वह कहते हैं, पहले लोग समाज और क्षेत्र के विकास के मकसद के साथ राजनीति में आते थे। राष्ट्रीयता की भावना उन्हें इसमें आने के लिए प्रेरित करती थी। पर, अब हालात एकदम बदल चुके हैं। ज्यादातर विधायकों व सांसदों के पास क्षेत्र के विकास की नहीं, बल्कि खुद के विकास की योजनाएं होती हैं। कुशवाहा ने 1969 में चौधरी चरण सिंह से प्रभावित होकर राजनीति में कदम रखा था। सपा, बसपा में भी रहे और अब भारतीय जनता पार्टी में हैं। राजनीति में कैसे-कैसे बदलाव आए, कुशवाहा की जुबानी...

विज्ञापन


राजनीति का परिदृश्य एकदम बदल चुका है। जनप्रतिनिधियों के पास क्षेत्र के विकास के बारे में सोचने की फुरसत कम ही रहती है। इसका अंदाजा झांसी को देखकर लगाया जा सकता है। झांसी के विकास को रफ्तार देने वाले सभी प्रोजेक्ट मसलन मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, नोटघाट का पुल, बीएचईएल, पारीछा थर्मल पावर, इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलीटेक्निक कॉलेज 1980 के दशक तक स्थापित हुए।
विज्ञापन


कृषि विश्वविद्यालय के बाद झांसी के खाते में ऐसी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं जुड़ी, जिसे याद किया जा सके। थम चुकी क्षेत्र के विकास की रफ्तार पिछले कुछ सालों के दौरान फिर से बढ़ी है। हर घर नल से जल योजना, डिफेंस कॉरिडोर, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट आने वाले दिनों में क्षेत्र की तस्वीर बदल देंगे। अब परिस्थितियां बदल रही हैं। आज की युवा पीढ़ी अपने निर्णय खुद लेने लगी है। आने वाले दिनों में काम नहीं करने वालों के लिए राजनीति में कोई जगह नहीं होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


मंत्री और सांसद भी नहीं बनवा सके खुद का घर : पहले नेता पूरी तरह जनता के प्रति समर्पित रहते थे। अपने बारे में वे कम ही सोच पाते थे। बेनीबाई बबीना और मऊरानीपुर से कई बार विधायक रहीं। प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहीं। पर, वह अपना घर नहीं बनवा सकीं। डॉ. गोविंद दास रिछारिया जिला परिषद के अध्यक्ष, लोकसभा, राज्यसभा के सांसद और लंबे समय तक खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने अंतिम सांसें किराये के मकान में ही लीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed