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संतों को भी रास नहीं आ रहा ‘हर-हर मोदी’
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 25 Mar 2014 02:21 PM IST
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द्वारिकापीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के साथ ही काशी और अयोध्या के संत समाज ने भी ‘हर-हर मोदी’ नारे को ठुकरा दिया है।
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संतों का कहना है कि ‘हर-हर महादेव’ भगवान शिव के प्रतिअभिवादन उद्घोष है। किसी व्यक्ति विशेष के संदर्भ में इस उद्घोष की नकल नहीं की जानी चाहिए।
हालांकि शंकराचार्य की आपत्ति के बाद भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पार्टी कार्यकर्ताओं से इस नारे का प्रयोग न करने की अपील कर चुके हैं।
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गौरतलब है कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने मोदी की वाराणसी रैली के दौरान हर-हर मोदी के नारे लगाए थे। तब इस नारे के खिलाफ कोई विशेष प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
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इधर यह नारा भाजपा कार्यकर्ताओं की जुबान के साथ सोशल नेटवर्क साइटों फेसबुक व ट्विटर पर तेजी से फैलने लगा।
इस पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई तो काशी का संत समाज भी नारे के विरोध में उठ खड़ा हुआ।
काशी के संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र से लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत डॉ. कुलपति तिवारी तक ने इस नारे को काशी की मर्यादा और भक्तों की भावना से खिलवाड़ करार दिया है।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी और सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास महराज ‘सतुआ बाबा’ भी नारे के खिलाफ सामने आ गए हैं।