इस बार भी यात्रा पर नहीं जा सकेंगे हज सेवक
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तीन साल से टल रही हज सेवकों की यात्रा इस बार भी रद्द मानी जा रही है, लिहाजा कमेटी पर सवाल उठ रहे हैं।
हज कमेटी ऑफ इंडिया से राज्य हज कमेटी की गैर सरकारी कर्मचारी को हज सेवक के रूप में भेजने की सिफारिश का अब तक कोई जवाब नहीं मिलने से यह तय हो गया है कि हज सेवक इस बार भी नहीं जा सकेंगे।
इसकी पुष्टि हज मंत्री मोहम्मद आजम खां के कार्यालय से हो चुकी है। राज्य हज कमेटी सूत्रों की माने तो हज सेवक को लेकर इस बार आवेदन तक नहीं हुआ है, इसलिए हज सेवकों की रवानगी का सवाल ही नहीं है।
प्रदेश के हज यात्रियों को खुद अपना ध्यान रखना होगा। हज 2012 से अब तक तीन साल से लगातार हज सेवकों की रवानगी टलने से राज्य हज कमेटी पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
झगड़ा है मुख्य वजह
इस बार हज सेवक के तौर पर प्रदेश से एक भी आवेदन अब तक नहीं आया है। ऐसे में राज्य हज कमेटी तर्क दे रही है कि आम लोगों को खादिमुल हुज्जाज के रूप में भेजने की प्रदेश सरकार की कोशिश को स्वीकारा नहीं गया, इसलिए इस बार भी हज सेवकों को नहीं भेजा जाएगा।
हज अधिकारी तनवीर अहमद की माने तो सरकारी कर्मचारी हज से संबंधित सेवाएं हज यात्रियों को नहीं दे पाते हैं। क्योंकि उन्हें हज से संबंधित कोई जानकारी होती नहीं है।
मंत्रालय से जवाब नहीं मिला
ऐसे में हज के जानकार गैर सरकारी लोगों जैसे मसजिद के इमाम व कारी के अलावा ऐसे लोग जो हज यात्रियों की खिदमत कर सकते हैं, उन्हें भेजने का प्रस्ताव हज कमेटी ऑफ इंडिया व विदेश मंत्रालय तक पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है।
वहीं जिम्मेदारों की माने तो प्रदेश सरकार की मंशा नहीं है कि हज सेवकों पर 50 लाख खर्च किया जाए। इसलिए अपनी शर्तों को लेकर झगड़ा जारी है। उधर, अन्य राज्यों में हज अवेदकों की संख्या के मुताबिक हज सेवकों की रवानगी का दौर जारी है।
अब 15 तक जमा करनी होगी पहली किस्त
राज्य हज कमेटी के सचिव सुलतान अहमद का कहना है कि अब चयनित हज आवेदकों को हज यात्रा खर्च की पहली किस्त 81 हजार रुपए 15 मई तक जमा करना होगा। पूर्व में पहली किस्त 19 मई तक जमा करने को कहा गया था।