नगर के गुरुद्वारों में धूमधाम से मना गुरु पर्व, दिन भर गूंजे शबद

अाशुताेष/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 08 Jan 2014 01:20 AM IST
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गुरुद्वारों में गूंजते शबद। श्रद्धा से मत्था टेकती संगत और फूलों से सजा दीवान हॉल। बाहर दूर-दूर तक लगी पंगत में गुरु का अटूट लंगर छकती संगत।
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नगर के गुरुद्वारों में मंगलवार को सुबह से ही ऐसे ही नजारों की रौनक रही। मौका था गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का प्रकाश उत्सव का, जिसे शहर के गुरुद्वारों में धूमधाम से मनाया गया।


गुरु पर्व का मुख्य आयोजन गुरुद्वारा आलमबाग और गुरुद्वारा नाका हिंडोला में हुआ। दोनों ही गुरुद्वारों में सुबह से शाम तक एक लाख से अधिक की संख्या में जुटी संगत ने गुरु का लंगर छका और सजे दीवान हॉल में गुरु को मत्था टेका।

ऐतिहासिक गुरुद्वारा अहियागंज में भी सुबह से शाम तक संगत जुटी। सदर, निशातगंज, आशियाना, शृंगार नगर गुरुद्वारों में भी दीवान सजे।

देर रात गुरुद्वारों में फूलों की बरखा के बाद आतिशबाजी से आसमान रंगीन हुआ। गुरुद्वारा नाका हिंडोला में सजे दीवान में सुबह पांच बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।

शाम 4 बजे तक चले दरबार हॉल को गुब्बारों, फूलों से सजाया गया। पालकी साहिब में गुरु विराजे। सुबह से ही भारी संख्या में जुटना शुरू हुई संगत ने गुरु को मत्था टेका।

5 जनवरी से चल रहे अखंड पाठ साहिब की समाप्ति के बाद यहां हजूरी रागी भाई राजिंदर सिंह ने आसा दी वार कीर्तन किया। गुरबाणी का आकाशवाणी से सीधा प्रसारण भी हुआ।

भाई अमनदीप सिंह ने शबद किए। ज्ञानी दविंदर सिंह दरदी ने गुरु की कथा बखानी। बीबी जसप्रीत कौर लुधियाना वालों ने शबद किए।

लखनऊ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार राजेंद्र सिंह बग्गा ने सभी संगतों को गुरु पर्व की बधाई दी। दोपहर 12 बजे के बाद से शाम तक चले लंगर में 25 हजार से अधिक संगत ने गुरु का लंगर छका।

इस अवसर पर कई समाजसेवियों को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया। शाम का दीवान यहां 6 बजे से सजा। शबद कीर्तन के बाद रात को फूलों की बरखा और आसमान में आतिशबाजी हुई।

गुुर जैसा नाही को देव जिस मस्तक भाग सो लेव.., वह प्रगटियो मरद अगमड़ा वरिआम अकेला.., वाहु वाहु गोबिंद सिंह आपे गुर चेला.., ऐसे गुरु को बलि बलि जाइये.. समेत तमाम गुरबानियां आलमबाग गुरुद्वारे में सुबह से रात तक गूंजी।

सुबह 5 बजे आसा दी वार कीर्तन से शुरू हुए दीवान में संगत के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो देर शाम 7 बजे के बाद तक जारी रहा।

आलमबाग गुुरुद्वारे से लेकर सड़क तक कतारों में संगत लगी रही। इंडियन आइडल के वीर दविंदर सिंह, कीर्तनी भाई सतविंदर सिंह ने शबद कीर्तन से संगत को मग्न किया।

दोपहर से पहले चंडीगढ़ से पधारे भाई अमरीक सिंह ने गुरु कथा बखानी। शाम 6 बजे तक यहां गुरुद्वारे के पीछे मैदान में चले लंगर में एक लाख से अधिक संगतों ने गुुरु का अटूट लंगर छका।

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