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Lucknow News: हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल हो गुरु तेग बहादुर की वाणी
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फोटो अर्जुन साहू इन्दिरा भवन में उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी की ओर से गुरु तेग बहादुर के 350वें
लखनऊ। गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष और विश्व हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में इंदिराभवन स्थित उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी में ‘राष्ट्रीय चेतना : हिंद की चादर गुरु तेग बहादुर’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पंजाबी विद्वान नरेंद्र सिंह मोंगा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर साहिब ने अपनी संपूर्ण वाणी का हिंदी में ही उच्चारण किया। इसे हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता है।
नरेंद्र मोंगा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की वाणी में सार्वभौमिक नैतिक मूल्य, करुणा, निडरता, धार्मिक सहिष्णुता और बलिदान के संदेश हैं। इसलिए यह धार्मिक ही नहीं सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उनका समर्थन करते हुए विदुषी डॉ. रश्मि शील ने कहा कि गुरु साहिब की वाणी में पद और दोहे शामिल हैं। उन्हें हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्र हिंदी और ब्रज भाषा के समृद्ध भक्ति साहित्य से परिचित होंगे, क्योंकि उनकी सभी रचनाएं हिंदी की उप बोली ब्रजभाषा में लिखी गई हैं।
नवयुग कन्या महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल सिख या हिंदू समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए था। कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च त्याग भारतीय संस्कृति की उदार और साहसी परंपरा को दर्शाता है। वह भारत के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, जिन्हें हिंद दी चादर यानी भारत की ढाल कहा जाता है। लखनऊ विवि के हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका पांडेय, मीना सिंह, महेंद्र प्रताप वर्मा, रवि यादव और अंजू सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अकादमी के प्रतिनिधि के रूप में अरविंद नारायण मिश्र ने सभी विद्वानों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
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नरेंद्र मोंगा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की वाणी में सार्वभौमिक नैतिक मूल्य, करुणा, निडरता, धार्मिक सहिष्णुता और बलिदान के संदेश हैं। इसलिए यह धार्मिक ही नहीं सांस्कृतिक और नैतिक शिक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। उनका समर्थन करते हुए विदुषी डॉ. रश्मि शील ने कहा कि गुरु साहिब की वाणी में पद और दोहे शामिल हैं। उन्हें हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल करने से छात्र हिंदी और ब्रज भाषा के समृद्ध भक्ति साहित्य से परिचित होंगे, क्योंकि उनकी सभी रचनाएं हिंदी की उप बोली ब्रजभाषा में लिखी गई हैं।
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नवयुग कन्या महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र विभाग की अध्यक्ष मेजर डॉ. मनमीत कौर सोढ़ी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर का बलिदान केवल सिख या हिंदू समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए था। कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च त्याग भारतीय संस्कृति की उदार और साहसी परंपरा को दर्शाता है। वह भारत के इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, जिन्हें हिंद दी चादर यानी भारत की ढाल कहा जाता है। लखनऊ विवि के हिंदी विभाग की प्रोफेसर डॉ. अलका पांडेय, मीना सिंह, महेंद्र प्रताप वर्मा, रवि यादव और अंजू सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अकादमी के प्रतिनिधि के रूप में अरविंद नारायण मिश्र ने सभी विद्वानों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।
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