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जीएसटी इंपैक्टः जानें, लखनऊ में फ्लैट खरीदने वालों की जेब पर कितना पड़ेगा बोझ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Mon, 03 Jul 2017 02:25 PM IST
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डेमो
- फोटो : demo pic
जीएसटी लागू होने से लखनऊ में फ्लैट खरीदने वालों पर साढ़े सात फीसदी तक बोझ बढ़ेगा। मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन जाने के बाद भी कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लेने के चलन के कारण रेडी टू मूव फ्लैट खरीदने वालों की जेब कटेगी।
क्रेडाई का मानना है कि जीएसटी ने उन लोगों के लिए भी मुश्किल खड़ी की है, जिन्होंने फ्लैट बुक करने के लिए बड़ी कीमत पहले ही अदा कर दी है। इसके बाद भी उनको पहले चुका चुके टैक्स का इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। उनको फाइनल बिल के मुताबिक ही जीएसटी देना होगा।
क्रेडाई के पदाधिकारी कासिम अली का कहना है कि अभी तक प्रदेश में सिर्फ 4.5 प्रतिशत सर्विस टैक्स ही ग्राहक को देना होता था। इसकी गणना इस तरह थी कि सर्विस टैक्स के 15 फीसदी का 30 प्रतिशत ही केंद्र सरकार चार्ज करती थी।
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वहीं स्टेट लेवी के रूप में लगाए गए एक प्रतिशत वैट को पिछली सरकार ने समायोजन योजना में माफ कर दिया था। अब इसे बढ़ाकर केंद्र सरकार ने जीएसटी में एकमुश्त 12 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में सीधे तौर पर कीमतें 7.5 प्रतिशत बढ़ जाएंगीं।
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क्रेडाई का मानना है कि जीएसटी ने उन लोगों के लिए भी मुश्किल खड़ी की है, जिन्होंने फ्लैट बुक करने के लिए बड़ी कीमत पहले ही अदा कर दी है। इसके बाद भी उनको पहले चुका चुके टैक्स का इनपुट क्रेडिट नहीं मिलेगा। उनको फाइनल बिल के मुताबिक ही जीएसटी देना होगा।
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क्रेडाई के पदाधिकारी कासिम अली का कहना है कि अभी तक प्रदेश में सिर्फ 4.5 प्रतिशत सर्विस टैक्स ही ग्राहक को देना होता था। इसकी गणना इस तरह थी कि सर्विस टैक्स के 15 फीसदी का 30 प्रतिशत ही केंद्र सरकार चार्ज करती थी।
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वहीं स्टेट लेवी के रूप में लगाए गए एक प्रतिशत वैट को पिछली सरकार ने समायोजन योजना में माफ कर दिया था। अब इसे बढ़ाकर केंद्र सरकार ने जीएसटी में एकमुश्त 12 प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में सीधे तौर पर कीमतें 7.5 प्रतिशत बढ़ जाएंगीं।
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रेडी-टू-मूव में भी देना होगा टैक्स
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लखनऊ में करीब 10,000 फ्लैट ऐसे हैं, जो कि रेडी-टू-मूव हैं। क्रेडाई का मानना है कि इनमें से बमुश्किल 10 प्रतिशत ने ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिया हुआ है। ऐसे में निर्माण हो चुका है तो भी फ्लैट को जीएसटी में निर्माणाधीन ही माना जाएगा।
ऐसे में अगर ग्राहक फ्लैट खरीदता है तो उसके ऊपर 12 प्रतिशत जीएसटी ही लगेगा। इसमें कटौती होने की संभावना तब थी जबकि इनपुट क्रेडिट टैक्स का फायदा बिल्डरों को मिलता। यह इनपुट क्रेडिट निर्माण सामग्री खरीदने के लिए दिए टैक्स पर मिलना संभावित था।
वहीं अंतिम समय में जीएसटी को 18 प्रतिशत करके इसमें जमीन खरीदने और निर्माण कराने के नाम पर इनपुट क्रेडिट देकर जीएसटी को 12 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि, पूर्व में खुद केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत जीएसटी होने की बात रियल एस्टेट के प्रतिनिधियों से कही थी।
निर्माण कराने के लिए बिल्डरों को सामान खरीदना पहले से महंगा पड़ेगा। इसको भी बिल्डर इनपुट क्रेडिट का फायदा नहीं मिलने की आशंका में खरीदार पर ट्रांसफर करेगा। इससे भी 2.5 से तीन प्रतिशत लागत की बढ़ोतरी की आशंका है।
ऐसा होने पर 10 प्रतिशत तक ज्यादा कीमत खरीददार को चुकानी होगी। इसकी वजह यह है कि सीमेंट पहले 24 प्रतिशत टैक्स के साथ मिलता था जोकि अब 28 प्रतिशत हो गया है।
इस तरह सरिया व लोहा 19.5 प्रतिशत से अब 18 प्रतिशत, ईंट 26 प्रतिशत से अब 28 प्रतिशत टैक्स के दायरे में जीएसटी की वजह से हो गया है। इससे 2.5 से तीन प्रतिशत तक कीमत बढ़ने की आशंका है। सेरेमिक टाइल्स पांच से छह प्रतिशत टैक्स पर मिलती थी, अब यह 28 प्रतिशत हो गई है।
ऐसे में अगर ग्राहक फ्लैट खरीदता है तो उसके ऊपर 12 प्रतिशत जीएसटी ही लगेगा। इसमें कटौती होने की संभावना तब थी जबकि इनपुट क्रेडिट टैक्स का फायदा बिल्डरों को मिलता। यह इनपुट क्रेडिट निर्माण सामग्री खरीदने के लिए दिए टैक्स पर मिलना संभावित था।
वहीं अंतिम समय में जीएसटी को 18 प्रतिशत करके इसमें जमीन खरीदने और निर्माण कराने के नाम पर इनपुट क्रेडिट देकर जीएसटी को 12 प्रतिशत कर दिया गया। हालांकि, पूर्व में खुद केंद्र सरकार ने 12 प्रतिशत जीएसटी होने की बात रियल एस्टेट के प्रतिनिधियों से कही थी।
निर्माण कराने के लिए बिल्डरों को सामान खरीदना पहले से महंगा पड़ेगा। इसको भी बिल्डर इनपुट क्रेडिट का फायदा नहीं मिलने की आशंका में खरीदार पर ट्रांसफर करेगा। इससे भी 2.5 से तीन प्रतिशत लागत की बढ़ोतरी की आशंका है।
ऐसा होने पर 10 प्रतिशत तक ज्यादा कीमत खरीददार को चुकानी होगी। इसकी वजह यह है कि सीमेंट पहले 24 प्रतिशत टैक्स के साथ मिलता था जोकि अब 28 प्रतिशत हो गया है।
इस तरह सरिया व लोहा 19.5 प्रतिशत से अब 18 प्रतिशत, ईंट 26 प्रतिशत से अब 28 प्रतिशत टैक्स के दायरे में जीएसटी की वजह से हो गया है। इससे 2.5 से तीन प्रतिशत तक कीमत बढ़ने की आशंका है। सेरेमिक टाइल्स पांच से छह प्रतिशत टैक्स पर मिलती थी, अब यह 28 प्रतिशत हो गई है।