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जीएसटी काउंसिल से दूर होगी व्यापारियों की परेशानी, विभाग ने तैयार की सूची

Wed, 08 Nov 2017 02:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 08 Nov 2017 02:04 PM IST
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 gst council to solve problems of businessmen
डेमो

जीएसटी लागू होने के चार माह बाद भी प्रदेश के व्यापारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसलिए वाणिज्यकर विभाग ने व्यापारियों की परेशानी से जुड़े 13 प्रमुख बिंदु तैयार किए हैं। इन बिंदुओं को अब जीएसटी काउंसिल में रखा जाएगा।

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सभी जोन के एडीशनल व जॉइंट कमिश्नरों से उन समस्याओं की सूची मंगाई गई है, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पा रहा है। इन समस्याओं को 9 व 10 नवंबर को गुवाहाटी में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में रखा जाएगा। दरअसल, चार माह बाद भी स्थानीय स्तर पर जीएसटी से जुड़ी व्यापारियों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
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लिहाजा व्यापारी इस नई कर प्रणाली को लेकर नाराज हैं। व्यापारी संगठनों ने इस संबंध में कई केंद्रीय नेताओं से अपना विरोध जता चुका है। व्यापारियों की सबसे अधिक परेशानी जीएसटी पोर्टल के ठीक से काम न करने को लेकर है। ऑनलाइन सिस्टम में कई तरह की त्रुटियों को दूर नहीं करने से व्यापारियों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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इसी तरह कर भुगतान में भी व्यापारियों की कई समस्याएं हैं। इस स्थिति को देखते हुए वाणिज्य कर विभाग ने प्रमुख समस्याओं की सूची तैयार की है। एडीशनल कमिश्नर (जीएसटी) विवेक कुमार ने बताया कि 9 व 10 नवंबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापारियों की इन समस्याओं को रखा जाएगा।

पढ़ें,  ये हैं प्रमुख परेशानियां

 gst council to solve problems of businessmen
डेमो
- अक्तूबर में समाधान योजना में शामिल होने वाले व्यापारियों केडैसबोर्ड पर जुलाई, अगस्त व सितंबर के जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने का विकल्प नहीं होना।
- अगस्त-सितंबर में पंजीयन कराने वाले व्यापारियों की लॉगिन पर भी जुलाई-अगस्त का रिटर्न दाखिल करने का विकल्प न होना।
- अगस्त-सितंबर में दाखिल जीएसटीआर-3बी रिटर्न को संशोधित करने का विकल्प का न होना। इससे अगला रिटर्न दाखिल नहीं हो पा रहा है।

- जीएसटीआर-3बी रिटर्न में ‘लाइबिलिटी सेट ऑफ’ करने से पूर्व रिटर्न संशोधित करने की सुविधा न होना। 
- जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल करने के बाद  क्रेता व्यापारी द्वारा लेन-देन को स्वीकार, रद्द या संशोधित नहीं करने पर विक्रेता व्यापारी भी संशोधन का कोई विकल्प का मिलना।
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