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यादव परिवार के गढ़ में प्रचार सामग्री तक दे रही है अलग राजनीतिक संकेत

Fri, 17 Feb 2017 01:37 PM IST
राजेन्द्र सिंह/अमरउजाला, जसवंतनगर (इटावा)
राजेन्द्र सिंह/अमरउजाला, जसवंतनगर (इटावा) Updated Fri, 17 Feb 2017 01:37 PM IST
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डेमो

यादव परिवार का गढ़ कहे जाने वाले जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र में शिवपाल की हार-जीत कोई खास मुद्दा नहीं। मुद्दा यह है कि जीत का मार्जिन कितना होगा। पिछली बार 81 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे।

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उनके समर्थक चाहते हैं कि इस बार जीत का अंतर एक लाख से ऊपर हो। शिवपाल जीत का अपना रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे या नहीं, यह तो 11 मार्च को वोटों की गिनती के बाद ही पता लगेगा लेकिन जसवंतनगर कस्बे और इस क्षेत्र के कई गांवों में घूमने के बाद लगता है कि जीत का अंतर बड़ा रहेगा। 
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क्षेत्र के यादव बहुल गांवों में जिक्र केवल मुलायम और शिवपाल का है। यहां किसी पोस्टर, बैनर पर सीएम अखिलेश यादव की फोटो या नाम नहीं है। चुनावी सभाओं में नेताजी और शिवपाल के कामकाज का जिक्र किया जा रहा है।
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शिवपाल इस सीट से वर्ष 1996 से विधायक हैं। उनसे पहले मुलायम सिंह सात बार यहां से विधायक रह चुके हैं। उनका पैतृक गांव सैफई भी इसी विधानसभा क्षेत्र में पड़ता है।

यहां लगभग 42 फीसदी यादव मतदाता हैं। दलित और शाक्य दूसरे-तीसरे नंबर पर हैं, लेकिन उनके वोटों में खास अंतर नहीं है। भाजपा ने मनीष यादव ‘पतरे’ को टिकट दिया है जबकि बसपा से दुर्वेश शाक्य मैदान में हैं।

इन्हें छोड़कर कहां जाएं

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शिवपाल सिंह यादव
बसरेहर ब्लॉक के रायपुरा गांव में पशुपालन विभाग से सेवानिवृत्त संतोष कुमार यादव की बैठकी पर कई लोग बैठे हैं। यहां के लोग मुलायम और शिवपाल के परंपरागत समर्थक हैं। चुनाव की चर्चा छिड़ते ही 70 वर्षीय रामौतार कहते हैं, इन्हें (शिवपाल) छोड़कर कहां जाएं। 

हमेशा इन्हें ही वोट दिया है। मान सिंह बताते हैं, 1967 में जब मुलायम पहला चुनाव लड़े थे तो मैं चौथी क्लास में था। तब मतदान के दिन बस्ते पर बैठा था। संतोष कुमार कहते हैं, मंत्रीजी (शिवपाल) सुख-दुख में साथ रहते हैं। 

एक बार दर्शन सिंह यादव (तत्कालीन कांग्रेस नेता अब सपा के राज्यसभा सदस्य) ने पशुपालन विभाग के दो मुलाजिमों का तबादला पूर्वांचल में करा दिया था। सरकार बनी तो मंत्रीजी ने उन्हें यहीं बुला लिया। संतोष कहते हैं, सैफई परिवार में क्या हुआ, गांव इससे बेअसर है। सभी लोग शिवपाल के साथ हैं।

क्षेत्र का व‌िकास कराया, पहचान दी

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श‌िवपाल यादव - फोटो : amar ujala
जसवंतनगर में जीजीआईसी के सामने स्टेशनरी की दुकान करने वाले नौजवान जयप्रकाश शाक्य कहते हैं कि शिवपाल की जीत का अंतर पिछली बार से 5 हजार कम होगा या 20 हजार बढ़ेगा। वह अपने दावे के समर्थन में कोई तर्क नहीं देते। 

कहते हैं, बस आप नतीजा देखना। शिवपाल को जाति-धर्म से ऊपर उठकर वोट मिलेगा। खिमारा रोड पर बारदाने की दुकान चलाने वाले बुजुर्ग अजय कुमार गुप्ता उनकी बात की तस्दीक करते हैं। 

कहते हैं, कहने को तो भाजपा और बसपा के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, लेकिन लड़ाई इकतरफा है। शिवपाल स्थानीय हैं, हमेशा क्षेत्र के लोगों के लिए तैयार रहते हैं। उनके पड़ोस में आटा चक्की पर बैठे परसऊवा के बुजुर्ग नरोत्तम सिंह कहते हैं, यहां तो शुरू से ही सपा चल रही है।

इनके रहने से क्षेत्र को सहूलियतें मिली हैं। गुलाबबाड़ी के अरुण वाल्मीकि और राहुल कहते हैं कि मुकाबला भाजपा से है लेकिन जीतेगी सपा। जसवंतनगर-इटावा हाईवे पर कैस्थ गांव में पाल, जाटव और राजपूत ज्यादा रहते हैं। गांव के कमलेश बाबू बघेल कहते हैं, शिवपाल दो बार यहां आ चुके हैं। शुरू में थोड़ी टूट-फूट थी लेकिन अब सब लोग एक हैं।  

नारों के जर‌िए भव‌िष्य की राजनीत‌ि का संकेत

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श‌िवपाल यादव - फोटो : amar ujala
जसवंतनगर क्षेत्र में घूमने पर चुनाव बेहद ठंडा लगता है। सपा के झंडे, पैंफलेट साइज के पोस्टर, स्टिकर और बैनर तो दिख जाते हैं लेकिन भाजपा, बसपा के झंडे, बैनर-होर्डिंग्स कहीं नजर नहीं आए। 

जसवंतनगर में हाईवे पर राजकुमार से इसकी वजह पूछी तो कहा, चुनाव इकतरफा है। दूसरे ही क्षण बोले, भाजपा का चुनाव साइलेंट हैं। भाजपा के मतदाता और समर्थक यहां बोलते नहीं हैं।

भाजपा प्रत्याशी मनीष यादव पतरे जीतेंगे तो नहीं लेकिन उन्हें अच्छे वोट मिलेंगे। गेंदालाल चौधरी और बलिया से आए आद्यशंकर यादव ने कहा कि शिवपाल ने शंकर की तरह सपा में जहर पिया है।

उनका नाम लेकर वे पूर्वांचल में जनता की लड़ाई लड़ते हैं। उनके लिए इटावा और जसवंतनगर सियासत के मक्का-मदीना जैसे हैं। जसवंतनगर में बहुत सारे घरों के दरवाजों व कारों पर लगे स्टिकरों में सपा के नारे पुरानी परंपरा से हटकर हैं। ये नारे भविष्य की राजनीति का संकेत दे रहे हैं। 

एक स्टिकर पर लिखा है, ‘हरदम रहे ढाल की तरह, कोई जी के दिखाए शिवपाल की तरह’। एक और स्टिकर है, ‘थामे मशाल, फिर आए शिवपाल’। इस इलाके में मुलायम का सम्मान है। शायद यही वजह है कि पूरे चुनाव कैंपेन में शिवपाल को मुलायम सिंह के भरोसेमंद और वफादार के तौर पर पेश किया गया है। 
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