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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Ground report of Ayodhya mandal by Akhilesh vajpayee.

अयोध्या मंडल की रिपोर्ट: पौने पांच साल में बदल गई अयोध्या, अबकी बार भाजपा को घर बचाने, सपा को झंडा फहराने की चुनौती

Thu, 16 Dec 2021 04:20 AM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 16 Dec 2021 04:20 AM IST
सार

2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अयोध्या मंडल की 25 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें जीती थी। सपा और बसपा ने 3-3 सीटों पर जमाया था कब्जा। पर, उपचुनाव में भाजपा से बाराबंकी की जैदपुर और बसपा से अंबेडकरनगर की जलालपुर सीट सपा ने झटक ली।

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Ground report of Ayodhya mandal by Akhilesh vajpayee.
अयोध्या में 5 अगस्त 2020 को हुए भूमि पूजन का एक दृश्य। पीएम मोदी ने रामलला को साष्टांग प्रणाम किया। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सप्तपुरियों में गिनी जाने वाली अयोध्या पौने पांच वर्षों में बहुत बदल चुकी है। चार सदियों से आस्था के संघर्ष, परीक्षा और प्रतीक्षा का प्रतीक भगवान श्रीराम जन्मभूमि का मंदिर वहीं बनना शुरू हो चुका है, जहां के लिए भाजपा सहित पूरा संघ परिवार तीन दशक से ज्यादा वक्त से  ‘रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे’, जैसे नारे के साथ राजनीतिक ताकत की तलाश में जुटा था। अयोध्या ही नहीं बदल रही है, बल्कि इस स्रोत के सरोकारों से हासिल सत्ता की शक्ति से भाजपा ने जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करके, तुष्टीकरण पर रोक लगाने सहित हिंदुओं की आस्था से जु़ड़े स्थलों के विकास एवं उनके सरोकारों पर काम करके एक तरह से प्रदेश की ही नहीं, देश की राजनीति की दिशा व दशा दोनों बदल दी है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक समीकरणों ने अन्य दलों में भी उम्मीद जगाई है।

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त्रेता युग की दिवाली को कलियुग में साकार करने के साथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, मेडिकल कॉलेज, सैकड़ों एकड़ में नव अयोध्या बसाने की योजना जैसे काम तो हैं ही। भविष्य में अयोध्या के बड़ा पर्यटन स्थल बनने के विश्वास पर होटल, धर्मशाला और आश्रम बनाने की योजना के लिए बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी जा रही हैं। हजारों करोड़ रुपयों की प्रस्तावित अन्य योजनाएं अयोध्या के बदलाव की कहानी को पंख लगा रही हैं। बदलाव की कहानी की बानगी है-हिंदुत्व के सांस्कृतिक सरोकारों को सहेजते, समेटते, प्राचीनता एवं नवीनता का मिश्रण...।  हिंदुत्व की आस्था पर प्रदेश व केंद्र सरकारों के सरोकारों के रंग चटख करने का संदेश...। सरयू की धारा और उसके सुंदर हो रहे घाटों व दिव्यता एवं भव्यता को सहेजने के लिए राम की पैड़ी पर हो रहे काम...।
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अयोध्या की राहें हो रहीं सुगम
अयोध्या के रेलवे स्टेशन को भव्यता देने के साथ इसे देश के विभिन्न स्थानों से सीधे रेल, सड़क और हवाई मार्ग से जोड़ने का काम हो रहा है। राम जानकी मार्ग जैसी योजनाओं और दिल्ली वाया लखनऊ पूर्वांचल के अंतिम छोर गाजीपुर तक प्रदेश को जोड़ने के लिए बन रहे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लिंक मार्ग के जरिए अयोध्या को जोड़कर आने वालों के लिए सुगम बनाया जा रहा है। राम वन गमन मार्ग की योजना से अयोध्या को सीधे चित्रकूट व मध्यप्रदेश से जोड़ने की योजना पर भी काम हो रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से इस मंडल के कई हिस्सों में विकास का नया सिलसिला शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।
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सबकी अयोध्या, सबमें अयोध्या
बदलती अयोध्या ने सिर्फ मंडल की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा व दशा बदल दी है। प्रदेश की सियासी जंग भले ही अब टोपियों पर आ गई हो...। बात काली, लाल टोपियों की हो रही हो...। पर, अयोध्या का रंग सबकी सियासी टोपियों पर चढ़ा दिख रहा है। अपनी सियासत के लिए अयोध्या से दूरी बनाने वालों की जुबान पर भी इसके प्रति आस्था उमड़ रही है। रामलला की शरण में अब सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि सपा, बसपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित सभी हैं। यह सब कुछ वैसे ही है जैसे अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब हिंदुत्व पर आस्था का प्रमाणपत्र बन चुका हो। वह प्रमाणपत्र, जो आज गैर भाजपा दलों को भी भाजपा की राह रोकने के लिए जरूरी लगने लगा है। जिस तरह का माहौल है उसको देखते हुए कहा जा सकता है कि 22 के चुनावी रंग में भी उत्तर प्रदेश में अयोध्या का रंग 19 नहीं रहने वाला।

बदलते रहे रंग, मतदाताओं के ढंग

राजनीति बदली तो राजनेताओं के दबदबे में भी बदलाव हुआ है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी में कांग्रेस के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की पराजय और भाजपा नेता स्मृति ईरानी की जीत इसका प्रमाण है। गोसाईगंज से भाजपा के विधायक इंद्रमणि तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी की सदस्यता रद्द होने जैसी घटनाएं सत्तारूढ़ दल की साख के लिए धक्का भी बनी हैं। उथल-पुथल पहली बार नहीं है। अयोध्या, देश और प्रदेश की राजनीति में तीन दशक से ज्यादा वक्त से उथल-पुथल मचाती रही है। धर्मनिरपेक्षता के नारे की धार गोठिल कर हिंदुत्व की प्रासंगिकता स्थापित करने वाली अयोध्या अपने मंडल के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रंग दिखाकर राजनीतिक विश्लेषकों को विश्लेषण पर मजबूर भी करती रही है। बिल्कुल सरयू की धारा की तरह...। जिनकी गति को लेकर कोई भविष्यवाणी करना हमेशा मुश्किल रहा है।

चिराग तले अंधेरा भी...
कांग्रेस की लहर में निर्दलीयों, सोशलिस्टों तो कहीं कम्युनिस्टों को गले लगाकर...। बीच-बीच में कहीं जनसंघ का भी एक-दो दीया जलाकर...। अयोध्या अपने साथ हर दल को गले लगाने व रूठने पर उसको निपटाने, कभी धारा के साथ चलने तो कभी उसके विपरीत तैरने का इतिहास समेटे है। पर, एक सवाल भी रहा है।

- जिस अयोध्या ने देश की सियासत को अपनी धुरी पर नचाया, वह अपने आसपास के कुछ हिस्सों में अपनी रंगत नहीं बिखेर पाया। ‘चिराग तले अंधेरा’ कहावत के मानिंद। इसका प्रमाण 2017 में पूरे प्रदेश में बह रही केसरिया हवा का अंबेडकरनगर में थम जाना और वहां की विधानसभा की पांच सीटों में से दो पर ही बमुश्किल कमल का खिल पाना है।

- एक पंक्ति में कहा जाए तो सियासत में केसरिया रंग को चटख और चमकीला बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली अयोध्या सबको नचाती रही। वैसे ही जैसे गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में वर्णन किया है- ‘उमा दारु जोषित की नाईं। सबहि नचावत राम गोसाईं।’

समाधान हुए पर समस्याएं अब भी

बदलाव की प्रक्रिया से गुजर रही अयोध्या में हलचल व स्थिरता की जगह शांति ने ले ली है। परीक्षा और प्रतीक्षा सब पूरी हो चुकी है। मंडल के अन्य चार जिलों-बाराबंकी, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर और अमेठी के लोगों में भी बदलाव की इसने उम्मीद जगाई है। लोगों को अयोध्या के सांस्कृतिक विकास पर प्रसन्नता और भविष्य में पर्यटन बढ़ने से रोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। पर, इस टीस के साथ कि सरकार की सूची में नंबर एक पर मौजूद अयोध्या के आसपास के इलाके में कोई बड़ा नया उद्योग लगाकर रोजगार के अवसर सृजित करने की तरफ सरकार का ध्यान क्यों नहीं गया। ले देकर वही मसौधा और रौजागांव की चीनी मिलें हैं, जो वर्षों पहले लगी थीं। इस कारण किसानों को दिक्कत होती है।

आर्डिनेंस फैक्टरी, फ्लाईओवर बदलेंगे सूरत
ऐसा नहीं है कि अयोध्या के अलावा मंडल के किसी अन्य जिले में कुछ काम ही नहीं हुआ है। अमेठी में आर्डिनेंस फैक्टरी लगी है तो बाईपास व फ्लाईओवर लोगों के लिए राहत है। बाराबंकी में भी तीन फैक्टरियों में एक लग चुकी है। अंबेडकरनगर में आवागमन सुगम करने के लिए कई सड़कें और पुल बन रहे हैं। पर, पहले की सरकारों ने शायद इस इलाके की इतनी अनदेखी की कि यहां के लोगों की जरूरतों के सामने होने वाले काम काफी कम नजर आते हैं। सुल्तानपुर के लोग कहते हैं कि एक और चीनी मिल की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन नई लगना तो दूर पुरानी मिल भी ठीक नहीं कराई गई।

अयोध्या जिसकी धुरी पर नाची सियासत...
अयोध्या वो है, जिसकी धुरी पर पूरे देश की सियासत नाची...। अयोध्या वो है, जिसकी ताकत से सरकारें बनीं तो गिरीं भी...। अयोध्या वो है, जिसने प्रदेश और देश की राजनीति की न केवल दिशा बदली, दशा भी बदल दी...।

कुछ टीसें भी साल रहीं
लोगों को टीस इस बात की भी है कि अतीत में कई बार अपने नुमाइंदों को मंत्रिमंडल में शामिल कराने में दबदबा रखने वाले इस इलाके से अमेठी के सुरेश पासी के रूप में सिर्फ  एक प्रतिनिधित्व है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी स्मृति ईरानी के रूप में एकमात्र अमेठी का ही प्रतिनिधित्व है। जबकि 2017 में जनता ने इस इलाके में आने वाली विधानसभा की 25 सीटों में से 19 भाजपा की झोली में डाल दी थी। इनमें अयोध्या की सभी पांच सीटों पर भाजपा जीती थी। बाराबंकी की छह में से पांच सीटों पर भाजपा, एक पर सपा, सुल्तानपुर की पांच सीटों में से चार पर भाजपा, एक पर सपा, अमेठी की चार सीटों में तीन पर भाजपा, एक पर सपा जीती थी। अंबेडकरनगर की पांच सीटों में 2017 में तीन पर बसपा और दो पर भाजपा जीती थी। पर, बसपा के विधायक रीतेश पांडेय के 2019 में अंबेडकरनगर से लोकसभा चुनाव लड़ने के कारण हुए उपचुनाव में सपा ने यह सीट जीत ली। इसी तरह बाराबंकी के जैदपुर से भाजपा जीती, लेकिन उपेंद्र रावत के लोकसभा चुनाव लड़ने से रिक्त सीट पर हुए उप चुनाव में सपा ने जीत हासिल कर इस इलाके में वापसी की आहट दे दी है।

घर बचाए रखने और घर पर फिर कब्जा करने के बीच बढ़ती लड़ाई

वैसे भी आचार्य नरेंद्र देव, डॉ. राममनोहर लोहिया और रामसेवक यादव जैसे समाजवादियों की यह धरती आजादी के बाद से ही मिश्रित राजनीतिक रंग वाली रही। कभी धारा के विपरीत तो कभी धारा के साथ...। भले ही हिंदुत्व या साधु-संतों को सियासत में लाने का श्रेय या दोष भाजपा को दिया जाता हो, लेकिन इस धरती ने आचार्य नरेंद्र देव के खिलाफ कांग्रेस के टिकट से उतरे बाबा राघव दास को जीत दिलाकर इसकी शुरुआत 1948 में ही कर दी थी। चुनाव आने के साथ इस धरती पर नए प्रयोग फिर दिख रहे हैं। 2017 की केसरिया बयार को भी रोककर हाथी को आगे ले जाने वाले अंबेडकरनगर के विधायक लालजी वर्मा और रामअचल राजभर समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। बसपा के पूर्व सांसद त्रिभुवन दत्त भी साइकिल पर सवार हो गए हैं। कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी इस इलाके में कांग्रेस की सूखी जड़ों को निकालकर उनकी जगह नए बीजों को रोपकर खाद-पानी देने की कोशिश कर रही हैं। पर, जो परिदृश्य बन रहा है उससे इस इलाके की लड़ाई मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच घर बचाए रखने और घर पर फिर कब्जा करने के बीच सिमटती जा रही है।

सवाल अब भी बाकी हैं...
अवध विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर प्रो. अजय प्रताप सिंह कहते हैं, अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शिलान्यास की नौबत अब आ रही है। जबकि अब तक इसे तैयार हो जाना चाहिए था। अवध विश्वविद्यालय की पत्रकारिता की छात्रा याशिनी दीक्षित बेरोजगारी एवं महिला सुरक्षा का सवाल उठाती हैं। याशिनी कहती हैं, अयोध्या में भी यदि देर शाम किसी लड़की को बाहर निकलने में डर लगे तो दिल और दिमाग में सवाल उठना स्वाभाविक है।

शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था बेहतर हो
कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान सुल्तानपुर के पूर्व प्राचार्य डॉ. राधेश्याम सिंह भी कहते हैं कि विकास बस सड़कों के रूप में हुआ है। शिक्षा एवं चिकित्सा की सुविधा पहले जैसी बदहाल हैं। जिले की बौद्धिक समृद्धि की प्रतीक ऐतिहासिक पुस्तकों की धरोहर मेहता लाइब्रेरी भी बंद कर दी गई। वरिष्ठ साहित्यकार कमलनयन पांडेय गुरुजी याद दिलाते हैं, सरकारों की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण सुल्तानपुर के बंधुआ का  विख्यात पीतल उद्योग पूरी तरह नष्ट हो गया।

सीटों का गणित: अयोध्या (5सीटें)

अयोध्या : भाजपा के वेद प्रकाश गुप्ता विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण 45 हजार, मुस्लिम 44 हजार, अनुसूचित जातियां 43 हजार, वैश्य 42 हजार, यादव 36 हजार, चौहान 33 हजार, निषाद 24 हजार।

बीकापुर : भाजपा से शोभा सिंह चौहान विधायक हैं।  
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 55 हजार, ब्राह्मण 48 हजार, पासी 45 हजार, यादव 38 हजार, क्षत्रिय 31 हजार, कुर्मी 28 हजार, कोरी 27 हजार।

रुदौली : भाजपा से रामचंद्र यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 83 हजार, मुस्लिम 60  हजार, यादव 48 हजार, लोध 26 हजार, ब्राह्मण 21 हजार, क्षत्रिय 17 हजार।

मिल्कीपुर (सु.) : भाजपा के गोरखनाथ बाबा विधायक हैं।  
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 1 लाख, ब्राह्मण 60 हजार, यादव 55 हजार, मुस्लिम 30 हजार, क्षत्रिय 25 हजार,   चौरसिया 18 हजार, वैश्य 12 हजार, पाल 7 हजार, मौर्य 5 हजार।

गोसाईंगंज : भाजपा के इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ  खब्बू तिवारी जीते थे। फर्जी अंक पत्र मामले में इनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो गई।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 75 हजार, ब्राह्मण 65 हजार, वर्मा व निषाद 40-40 हजार, क्षत्रिय, यादव व मुस्लिम 25-25 हजार।

सुल्तानपुर (5 सीटें)
कादीपुर (सु.) :
भाजपा के राजेश गौतम विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 89 हजार, ब्राह्मण 72 हजार, मुस्लिम 47 हजार, यादव 43 हजार, क्षत्रिय 39 हजार, कुर्मी 32 हजार।

लंभुआ : भाजपा के देवमणि द्विवेदी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 80 हजार, ब्राह्मण 77 हजार, यादव 42 हजार, क्षत्रिय 41 हजार, मुस्लिम 38 हजार, कुर्मी 31 हजार।

सुल्तानपुर : भाजपा के सूर्यभान सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 82 हजार, अनुसूचित जातियां 65 हजार, ब्राह्मण 65 हजार, क्षत्रिय 40 हजार, यादव 34 हजार, कुर्मी 12 हजार।

इसौली : सपा के अबरार अहमद विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 75 हजार, मुस्लिम 71 हजार, ब्राह्मण 68 हजार, क्षत्रिय 48 हजार, यादव 41 हजार, कुर्मी 10 हजार।

सुल्तानपुर सदर : भाजपा से सीताराम वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 75 हजार, ब्राह्मण 68 हजार, मुस्लिम 45 हजार, कुर्मी 44 हजार, क्षत्रिय 35 हजार, यादव 32 हजार।

अंबेडकरनगर (5 सीटें)
अकबरपुर : बसपा के राम अचल राजभर विधायक हैं। अब सपा में।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 70 हजार, राजभर 48 हजार, कुर्मी 44 हजार, मुस्लिम 27 हजार, यादव 20 हजार, निषाद 17 हजार।

कटेहरी : बसपा के लालजी वर्मा विधायक हैं। अब सपा में।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां 88 हजार, कुर्मी 44 हजार, ब्राह्मण 43 हजार, मुस्लिम 42 हजार, राजभर 32 हजार, यादव, 25 हजार।

टांडा : भाजपा से संजू देवी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम 86 हजार,अनुसूचित जातियां 79 हजार,  कुर्मी 42 हजार, राजभर 24 हजार, यादव 20 हजार, वैश्य व निषाद 16-16 हजार।

आलापुर (सु.) : भाजपा से अनीता कमल विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 87 हजार, यादव 70 हजार, मुस्लिम 39 हजार, निषाद 31 हजार, ब्राह्मण 25 हजार, क्षत्रिय 20 हजार।

जलालपुर : सपा के सुभाष राय विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 95 हजार, मुस्लिम 47 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, यादव 40 हजार, राजभर 38 हजार, कुर्मी 30 हजार।

अमेठी (4 सीटें)
अमेठी : भाजपा से गरिमा सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 75 हजार, अनुसूचित जातियां 65 हजार, क्षत्रिय 60 हजार, यादव 30 हजार व अन्य पिछड़ा वर्ग 65 हजार, मुस्लिम 25 हजार, वैश्य 15 हजार।

गौरीगंज : सपा से राकेश प्रताप सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : ब्राह्मण करीब 65 हजार, अनुसूचित जातियां 56 हजार, क्षत्रिय व मुस्लिम 55-55 हजार, यादव 17 हजार व अन्य पिछड़ा वर्ग 62 हजार, मुस्लिम 55 हजार।

तिलोई : भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : अनुसूचित जातियां करीब 72 हजार, मुस्लिम 70 हजार, ब्राह्मण 52 हजार, क्षत्रिय 42 हजार, यादव 12 हजार व अन्य पिछड़ा वर्ग 42 हजार, वैश्य 22 हजार, लोध 25 हजार।

जगदीशपुर(सु.) : राज्यमंत्री सुरेश पासी यहां से विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  अनुसूचित जातियां करीब 94 हजार, मुस्लिम 69 हजार, ब्राह्मण करीब 42 हजार, क्षत्रिय 38 हजार, ओबीसी 54 हजार।

बाराबंकी (6 सीटें)
बाराबंकी सदर : सपा के धर्मराज यादव उर्फ सुरेश यादव विधायक हैं।
जातिगत समीकरण :  यादव करीब 75 हजार, मुस्लिम व कुर्मी 60-60 हजार, रावत 55 हजार, गौतम 35 हजार, सवर्ण 40 हजार।

जैदपुर (सु.) : सपा के गौरव रावत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : कुर्मी करीब 71 हजार, मुस्लिम व रावत 70-70 हजार, यादव 55 हजार, गौतम 40 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग 35 हजार।

रामनगर : भाजपा के शरद अवस्थी विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : मुस्लिम करीब 60 हजार, ब्राह्मण व रावत 48-48 हजार, कुर्मी, यादव 40-40 हजार, गौतम 37 हजार, क्षत्रिय 18 हजार।

दरियाबाद : भाजपा के सतीश शर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : रावत 70 हजार, मुस्लिम 60 हजार, ब्राह्मण 45 हजार, कुर्मी 35 हजार, गौतम 30 हजार, क्षत्रिय, यादव, लोध 25-25 हजार।

कुर्सी : भाजपा के साकेंद्र वर्मा विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : कुर्मी करीब 70 हजार, रावत 65 हजार, मुस्लिम 60 हजार, यादव 50 हजार, गौतम 45 हजार, ब्राह्मण 40 हजार।

हैदरगढ़ (सु.) : भाजपा के बैजनाथ रावत विधायक हैं।
जातिगत समीकरण : रावत करीब 86 हजार, कुर्मी 60 हजार, यादव 45 हजार, ब्राह्मण 35 हजार, गौतम 33 हजार, क्षत्रिय 20 हजार।

 
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