मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष बोले, अयोध्या की भव्यता ऐसी होगी कि देखेगी दुनिया
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श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के निर्माण समिति के अध्यक्ष पूर्व आईएएस नृपेंद्र मिश्र ने शनिवार को ट्रस्टियों को भव्य राममंदिर से लेकर धर्मनगरी के मर्यादा पुरषोत्तम भगवान राम के अनुकूल ढांचागत विकास का खाका समझाया। कहा कि अयोध्या की भव्यता ऐसी होगी जिसे पूरी दुनिया देखेगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण की दिशा में सार्थक कोशिश शनिवार को शुरू हुई। इसके लिए नृपेंद्र मिश्र ने पूरा दिन अयोध्या में बिताया। वह अपने साथ केंद्र सरकार की नवरत्न कंपनी एनबीसीसी के पूर्व चेयरमैन व सीएमडी अरुण कुमार मित्तल और निजी क्षेत्र की निर्माण कंपनी लार्सन एंड टू्बो के प्रमुख इंजीनियर दिवाकर त्रिपाठी को लेकर आए थे।
मित्तल बीते साल 31 मार्च को सरकार से सेवा विस्तार न मिलने के कारण छह माह पहले ही वीआरएस ले चुके हैं। मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर में विराजमान रामलला, रामंमदिर के 70 एकड़ के परिसर समेत विश्व हिंदू परिषद की कार्यशाला में हुई तैयारियों का चार घंटे तक जायजा लेने के बाद तय हुआ कि ट्रस्ट की अयोध्या में 3-4 मार्च को संभावित बैठक अब नहीं होगी।
कार्यशाला में तराशे गए पत्थरों की स्थिति, जमी काई समेत उसे रामलला परिसर तक ले जाने को लेकर एनबीसीसी व एलएंडटी के कुशल इंजीनियरों से रिपोर्ट ली जाएगी। साथ ही राममंदिर समेत संपूर्ण 70 एकड़ के परिसर की मैपिंग करके जनसुविधाओं के साथ रिपोर्ट तैयार होगी। न सिर्फ हाईवे से रामलला की कनेक्टिविटी आधुनिक बनाई जाएगी बल्कि सरयू घाट, हनुमानगढ़ी, कनक भवन समेत सभी दर्शनीय और पौराणिक स्थलों को जोड़ने के लिए कॉरिडोर विकसित होगा।
बेहतर इंजीनयर सुझाने के लिए मित्तल व त्रिपाठी को जिम्मेदारी सौंपी
मिश्र ने अयोध्या में ढांचागत विकास के साथ भक्तों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी पर चर्चा की। मांझा बरहटा में प्रस्तावित विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर की भगवान राम की मूर्ति समेत वहां बनने वाले श्रीराम म्यूजियम, मेडिटेशन हॉल आदि की राममंदिर से बेहतर कनेक्टविटी की जरूरत बताई। इसके लिए दोनो बड़ी कंपनियों से जुड़े शीर्ष अधिकारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई कि ट्रस्ट के लिए बेहतर इंजीनियर सुझाएं, जो इन सारी परिकल्पनाओं को साकार करने का डायग्राम बना सकें।
सूत्रों के अनुसार मित्तल और त्रिपाठी ने पूरे काम के लिए सुनियोजित रणनीति का प्रस्ताव रखा। विहिप की ओर से की गई अब तक की तैयारियों को समाहित करने के लिए परीक्षण की आवश्यकता जताई। इसके लिए 25 दिन का समय मांगा। नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए कुशल इंजीनियरों की टीम तय की जाए। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक व भूमि पूजन की तिथि तय होगी। सूत्रों के मुताबिक अब 25 मार्च के बाद नई दिल्ली में ट्रस्ट की अगली बैठक व भूमि पूजन की तिथि तय हो पाएगी।
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चंपत राय ने संभावित तिथियों पर चर्चा को बताया अटकलबाजी
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि मौलिक काम शुरू होने से पहले अभी होमवर्क किया जा रहा है। कौन सा चरण कब होगा इसका मौखिक आकलन किया गया। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र पहले इंजीनियरों की टीम भेजकर आकलन कराएंगे। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक और प्रधानमंत्री से भूमि पूजन की तिथि तय होगी। अभी जितनी भी संभावित तिथियों पर चर्चाएं हो रही हैं वह अटकलबाजी है।
रामलला परिसर की चौहद्दी होगी व्यवस्थित
नृपेंद्र मिश्र हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के बाद सीधे रामलला विराजमान पहुंचे। रामलला के सामने 51 फीट दूर बनी बैैरिकेडिंग पार करके ठीक विग्रह के समक्ष माथा टेका। फिर टेंट के बने मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर को चारों तरफ से घूमकर देखा। 70 एकड़ के संपूर्ण परिसर मेें करीब दो घंटे तक पूरब-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण की चौहद्दी नापी। इस दौरान वाहन का प्रयोग भी करना पड़ा। जहां-जहां भूमि तिकोनी या सकरी थी, वहां चौहद्दी को सीधी रेखा मे करने के लिए चर्चा की। परिसर के अंदर सुबह 11 बजे दर्शन बंद होने के बाद किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने बारीकी से उन्हें पूरे परिसर की वस्तुस्थिति से परिचित कराया।