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पांच सवालों के जवाब मिले तो खत्म होगा बिजली संकट

Sat, 08 Nov 2014 01:58 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 08 Nov 2014 01:58 AM IST
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Govt can solve power issue says engineers.

आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने बिजली के मुद्दे पर बिजली राज्यमंत्री पीयूष गोयल व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच हो रही वार्ता का स्वागत करते हुए कहा है कि केंद्र व राज्य को निजी घरानों पर अति निर्भरता की नीति को बदलना चाहिए।

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प्रदेश की बिजली व्यवस्था के सुधार के लिए राजनीति से ऊपर उठकर फैसले लिए जाएं तभी सार्थक परिणाम आ सकेंगे। फेडरेशन ने इस बाबत केंद्र व प्रदेश सरकार के समक्ष पांच महत्वपूर्ण मुददे रखते हुए वार्ता में इन समस्याओं का समाधान निकालने का सुझाव दिया है।
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फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि दो दशकों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था निजी घरानों पर अति निर्भरता के चलते पूरी तरह चरमरा गई है।

ऊर्जा नीति की पनर्समीक्षा जरूरी है

Govt can solve power issue says engineers.

बिजली व्यवस्था सुधारनी है तो सबसे पहली प्राथमिकता ऊर्जा नीति की पुनर्समीक्षा होनी चाहिए। बीते नौ सालों में प्रदेश में निजी क्षेत्र को लगभग 17000 मेगावाट क्षमता की नई बिजली परियोजनायें दी गईं किंतु ज्यादातर में काम ही नहीं शुरू हो पाया।

निजी घरानों को दी गई परियोजनाओं में आधी भी सरकारी क्षेत्र को दी गई होतीं तो 8500 मेगावाट उत्पादन बढ़ गया होता। दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र से राज्यों को मिलने वाली बिजली के फार्मूले में बदलाव का है।

मौजूदा गाडगिल फार्मूला अव्यवहारिक हो चुका है इसलिए इसे बदला जाना चाहिए ताकि यूपी जैसे बडे़ राज्य को केंद्र से उसी अनुपात में बिजली मिल सके। इसके अलावा बिजलीघरों को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तायुक्त कोयले की आपूर्ति भी बड़ा मुद्दा है क्योंकि इसकी वजह से उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

सभी रिक्त पदों पर भर्ती की भी जरूरत

Govt can solve power issue says engineers.

इसके अलावा बड़े पैमाने पर सुपर क्रिटिकल इकाइयां लगाने के लिए पर्यावरणीय मंजूरी मिलनी चाहिए, जिससे 1320 मेगावाट की ओबरा सी और 1980 मेगावाट की अनपरा ई जैसी परियोजनाओं की स्थापना का रास्ता साफ हो सके।

पांचवीं सबसे बड़ी जरूरत यह है कि पावर कॉर्पोरेशन को सही ढंग से चलाने के लिए बिजली निगमों में नियमित कार्यों के लिए सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की जाए और संविदा-ठेकेदारी प्रथा को तत्काल बंद किया जाए।

इस बाबत केंद्र व राज्य दोनों को श्रमिक नीति में बुनियादी बदलाव करने की जरूरत है। इंजीनियर्स फेडरेशन का मानना है कि अगर इन मुद्दों पर ईमानदारी से निर्णय लिया जा सका तो ही बिजली संकट से निजात मिल सकती है।

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