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दीनदयाल की हुई हत्या, फिर से हो जांच: गोविंदाचार्य

Fri, 25 Sep 2015 09:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 25 Sep 2015 09:23 PM IST
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Govindacharya wants investigation on Deendayal's death.

सामाजिक चिंतक के.एन. गोविंदाचार्य ने पं दीनदयाल उपाध्याय की मौत की फिर से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थितियों में दीनदयाल जी की मौत हुई थी, उससे साफ लग रहा था कि उनकी हत्या की गई थी। पर, तत्कालीन सरकार द्वारा कराई गई जांच में इसे हत्या नहीं माना गया था।

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आज केंद्र में ऐसी सरकार है जो इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करा सकती है और सारे सही तथ्य लोगों के सामने आ सकते हैं। गोविंदाचार्य ने नाम लिए बगैर मौजूदा केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा।
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वह शुक्रवार को यहां प्रेस क्लब में दीनदयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष पर आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। भारतीय नागरिक परिषद की तरफ से आयोजित इस संगोष्ठी का विषय था, ‘एकात्म मानववाद और समृद्ध भारत।’
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गोविंदाचार्य ने कहा कि तत्कालीन सरकार के समय कराई गई जांच में बताया गया था कि उनकी मौत का कारण हत्या नहीं कुछ और रही है। पर, यह सही बात नहीं लगती। जिन परिस्थितियों में दीनदयाल जी की शव मिला था, उससे यह साफ था कि उनकी हत्या की गई है। हत्या में भी अंतरराष्ट्रीय साजिश दिखती है।

कारण, उस समय पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच लड़ाई चल रही थी। इस लड़ाई में एक पक्ष सोवियत संघ और दूसरा अमेरिका था। दोनों ही पूरी दुनिया पर अपना वर्चस्व बनाने के लिए ऐसे लोगों को समाप्त करा देने पर तुले थे जो उनकी नीतियों से सहमत नहीं थे।

ऐसे विकास का मॉडल स्वीकार नहीं

Govindacharya wants investigation on Deendayal's death.

गोविंदाचार्य ने कहा कि 40 करोड़ लोगों की खेती छीनकर बनाए गए विकास के मॉडल को देश स्वीकार नहीं कर सकता। दीनदयाल उपाध्याय इस तरह के मॉडल के घोर विरोधी थे। वह दुनिया को बाजार नहीं बल्कि परिवार मानते थे। इसीलिए वह लोगों को दूसरों का नौकर बनाने के बजाय उन्हें रोजगारी बनाना चाहते थे।

उनका मॉडल था कि स्थानीय संसाधनों के आधार पर लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराए जाएं और इसका विकास ऐसे हो कि लोग एक-दूसरे से समन्वय बनाकर चलने को मजबूर हों। जो लोग किसानों की जमीन छीनकर विकास का मॉडल तैयार कर रहे हैं, उन्हें दीनदयाल जी की बात पर गौर करना चाहिए।

साधा निशाना: गोविंदाचार्य ने कहा कि दीनदयालय जी का सिद्धांत था, ‘जो कहा, वह किया, वही जिया।’ इसीलिए जनसंघ का अध्यक्ष होने के बावजूद दीनदयाल उपाध्याय का स्वयंसेवकत्व खत्म नहीं हुआ था।

वर्तमान सरकारें दीनदयाल की बातों से सीख ले

Govindacharya wants investigation on Deendayal's death.

गोविंदाचार्य का कहना है कि दीनदयाल जी हिंदुत्व को श्रद्धा का विषय मानते थे, तर्क का नहीं। उनके द्वारा प्रतिपादित एकात्म मानववाद का सिद्धांत देशी सोच से निकली राजनीतिक विचारधारा का दस्तावेज है।

जिसमें राष्ट्र केवल आर्थिक व भौतिक इकाई न होकर जीवंत व चैतन्य इकाई है। इसीलिए वह कहते थे कि राजनीतिक दलों का उद्देश्य सिर्फ चनाव जीतना और सत्ता पाना नहीं है।

वह कहते थे कि भारतीय जनसंघ मूल्यों व सिद्धांतों की राजनीति के लिए बना है न कि चुनावी जीत और सत्ता पाने की भर की ही आकांक्षा के लिए। वर्तमान राजनीतिक दलों (भाजपा) और उनके नेताओं को दीनदयाल जी की इस बात से सबक लेना चाहिए।

संगोष्ठी को भारतीय नागरिक परिषद के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अग्निहोत्री, उपाध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने भी संबोधित किया। संगोष्ठी का संचालन मौलीन्दु मिश्र ने किया।

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