राज्यपाल ने फीस नियंत्रण कानून को दी मंजूरी, अब मनमानी फीस नहीं ले सकेंगे स्कूल
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राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश -2018 को अपनी मंजूरी दे दी। इसके बाद निजी स्कूल न तो मनमानी फीस वसूल सकेंगे और न ही पांच साल से पहले यूनिफॉर्म बदल सकेंगे। साथ ही स्कूल किसी खास दुकान से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने को बाध्य नहीं कर सकेंगे। इस अध्यादेश के दायरे में 20 हजार रुपये से अधिक सालाना फीस लेने वाले सभी स्कूल आएंगे।
राज्यपाल की मंजूरी के बाद प्रमुख सचिव विधायी वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इसके साथ ही प्रदेश में फीस नियंत्रण कानून प्रभावी हो गया है। सरकार की ओर से अध्यादेश से संबंधित फाइल सोमवार को ही राजभवन भेजी गई थी। मौजूदा समय में राज्य विधान मंडल सत्र में न होने एवं विषय की तात्कालिकता को देखते हुए राज्यपाल ने विधिक परीक्षण के बाद अपनी स्वीकृति दे दी है।
यह हैं दायरे में
बेसिक शिक्षा परिषद, माध्यमिक शिक्षा परिषद, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद, भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद समेत सभी शिक्षा बोर्डों के साथ ही अल्पसंख्यक संस्थान भी इसके दायरे में होंगे।
शुल्क संरचना दो भागों में
संभावित शुल्क : इसमें पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा और संयुक्त वार्षिक शुल्क शामिल होगा।
वैकल्पिक शुल्क : बस किराया, बोर्डिंग, मेस, डाइनिंग, शैक्षणिक भ्रमण और अन्य मद। यह शुल्क तभी लिया जाएगा, जब छात्र इनका इस्तेमाल करेंगे।
7-8 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ा सकेंगे फीस
अध्यादेश के अनुसार, निजी स्कूल वार्षिक फीस में 5 फीसदी से अधिक वृद्धि नहीं कर सकेंगे। अन्य मदों को भी मिला दें तो अधिकतम वृद्धि 7-8 फीसदी ही कर सकेंगे।
फीस स्ट्रक्चर अनिवार्य रूप से वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा। एडमिशन फीस सिर्फ एक बार ही लेंगे। फीस निर्धारण के लिए वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष माना जाएगा।