बेटियों के अधिकारों व परवरिश को लेकर ज्यादा आत्मनिंदा ठीक नहीं: राज्यपाल राम नाईक
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राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि यूपी में पढ़ाई-लिखाई में बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं। इसलिए बेटियों के अधिकारों और परवरिश को लेकर ज्यादा आत्मनिंदा उचित नहीं है। साथ ही उन्होंने समाज में महिलाओं के प्रति बढ़ रहे हिंसा के मामलों पर भी चिंता जताई। कहा कि मौजूदा स्थिति काफी पीड़ा देती है।
नाईक सोमवार को यहां एक होटल में अनुपमा फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘स्वयंसिद्धा वूमेन अचीवर अवॉर्ड’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, मेरे कार्यकाल में जिन विद्यार्थियों को डिग्रियां बांटी गई हैं, उनमें 51 फीसदी लड़कियां हैं। गोल्ड और सिल्वर मेडल पाने वालों में लड़कियों की संख्या 66 फीसदी है। इनकी स्थिति लगातार सुधर रही है। यूपी की पहली राज्यपाल सरोजनी नायडू भी महिला थीं, लेकिन यह शानदार इतिहास अब नहीं दिखता।
समाज में भ्रूण हत्या, दहेज, अत्याचार और महिलाओं की अवमानना के मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, पहले महिलाएं सिर्फ शिक्षक और नर्स बनती थीं। आज उनका हर क्षेत्र में दखल है। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय शुरू किए गए सर्व शिक्षा अभियान का विशेष योगदान है। महिलाओं के उत्थान के लिए अपने काम गिनाते हुए कहा, दुनिया में महिलाओं के लिए अलग ट्रेन उन्होंने ही मुंबई में चलवाई।
सरकार ट्रिपल पी मोड में चलाना चाहती है आश्रय गृह : रीता
महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, महिलाओं पर हिंसा पुरुषों की मर्दानगी नहीं, कमजोरी का प्रतीक है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं काफी पीछे हैं। मातृत्व मृत्यु दर और लिंग अनुपात में सुधार आदि में और तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने महिलाओं से नियमित हेल्थ चेकअप करवाने का आह्वान किया। कहा कि सरकार विधवा आश्रमों समेत तमाम आश्रय गृहों को ट्रिपल पी मोड में चलाना चाहती है। ऐसे में अच्छा काम करने वाले एनजीओ को आगे आने की जरूरत है।
मालिनी अवस्थी ने सोहर गाकर समां बांधा
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने जन्म के समय गाए जाने वाले सोहरों और लोक कहावतों के जरिये समां बांध दिया। लड़कियों के लिए स्वरचित सोहर गाकर उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। असमिया लघु कथा सुनाते हुए कहा, स्रष्टा ने स्त्री को बहुत ही मन से गढ़ा, पर उसे उसका महत्व बताना भूल गए। इसीलिए महिलाएं आज भी खुद को कमतर समझती हैं। उन्होंने स्वयंसिद्धा महिलाओं का आह्वान किया कि वे अपने ऊपर पुरुष सुलभ गुणों को हावी न होने दें।
राज्यपाल के हाथों 12 महिलाएं सम्मानित
राज्यपाल ने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 12 महिलाओं को स्वयंसिद्धा अवॉर्ड प्रदान किया। इनमें आईएफएस रेणु सिंह, प्रो. निशी पांडे, दीया बदगल, आभा सिंह, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. उमा सिंह, डॉ. स्मृति सिंह, डॉ. शोभा कौल, अनीता श्रीवास्तव, आशा गोस्वामी, दिव्या शुक्ला, सबीहा अहमद, डॉ. विदुला दिलीप शामिल रहीं। फाउंडेशन की अध्यक्ष अनुपमा सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।