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यूपी के राज्यपाल ने बताया, कैसे उनकी पत्नी ने घर का खर्चा उठाकर की उनकी मदद
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Thu, 13 Apr 2017 03:26 PM IST
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक अक्सर समारोहों में अपनी पुस्तक और अपने जीवन के विविध प्रसंगों की चर्चा करते हैं लेकिन बुधवार को उन्होंने अपनी जीवन यात्रा के बारे में विस्तार से बताया।
अवसर था दूरदर्शन के लखनऊ केंद्र द्वारा उनके जन्मदिन 16 अप्रैल पर प्रसारित होने वाले विशेष कार्यक्रम का। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन बहुत सुन्दर है और काफी बड़ा है लेकिन मुझे मुंबई का अपना वह घर आज भी बहुत प्रिय है, जिसमें दो कमरे हैं।
उन्होंने कहा कि 1960 में हम 12 दोस्तों ने मिलकर गोरेगांव में एक प्लाट लिया और वहीं घर बनवाया। शिवाजी के नाम पर इसका नाम हमने शिवस्मृति रखा।
आमंत्रित दर्शकों के समक्ष आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी पुस्तक ‘चरैवेति-चरैवेति’ के बहाने उनकी जीवन यात्रा पर विस्तार से चर्चा हुई और वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी, लेखक योगेश प्रवीन, लेखिका एवं शिक्षाविद् आसिफा जमानी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी. सिंह तथा हाल में अपनी पुस्तक ‘लता सुर गाथा’ पर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चयनित यतीन्द्र मिश्र ने सवाल किए।
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अवसर था दूरदर्शन के लखनऊ केंद्र द्वारा उनके जन्मदिन 16 अप्रैल पर प्रसारित होने वाले विशेष कार्यक्रम का। राज्यपाल ने कहा कि राजभवन बहुत सुन्दर है और काफी बड़ा है लेकिन मुझे मुंबई का अपना वह घर आज भी बहुत प्रिय है, जिसमें दो कमरे हैं।
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उन्होंने कहा कि 1960 में हम 12 दोस्तों ने मिलकर गोरेगांव में एक प्लाट लिया और वहीं घर बनवाया। शिवाजी के नाम पर इसका नाम हमने शिवस्मृति रखा।
आमंत्रित दर्शकों के समक्ष आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी पुस्तक ‘चरैवेति-चरैवेति’ के बहाने उनकी जीवन यात्रा पर विस्तार से चर्चा हुई और वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल चतुर्वेदी, लेखक योगेश प्रवीन, लेखिका एवं शिक्षाविद् आसिफा जमानी, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपी. सिंह तथा हाल में अपनी पुस्तक ‘लता सुर गाथा’ पर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए चयनित यतीन्द्र मिश्र ने सवाल किए।
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
सूत्रधार की भूमिका वरिष्ठ कार्यक्रम अधिशासी आत्मप्रकाश मिश्र ने निभाई। इस मौके पर उनके जीवन के कई प्रसंगों का नाट्य रूपांतरण भी हुआ। राज्यपाल ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, जब राम से लंका की प्रशंसा की गई तो उन्होंने अपनी जन्मभूमि की चर्चा करते हुए उसे स्वर्ग से भी बढ़कर बताया था।
राज्यपाल ने कहा, बचपन में पढ़ाई के दौरान मुझे दो चीजें सीखने को मिली- सूर्य नमस्कार के माध्यम से व्यायाम और चित्रकला। 11वीं तक नियमिति सूर्य नमस्कार किया। पिता कहते थे कि बुद्धि के साथ शरीर भी अच्छा होना चाहिए।
हम रोज 25 सूर्य नमस्कार करते थे। संघ की शाखाओं में भी जाता था। एक बार जब जनसंघ में पूर्णकालिका कार्य करने की बात आई तो मन में दुविधा थी कि परिवार कैसे चलेगा? ऐसे में पत्नी ने आगे बढ़कर समाधान किया। उन्होंने बीएड कर महापालिका के स्कूल में नौकरी की और मुझे समाज कार्य के लिए स्वतंत्र कर दिया।
राज्यपाल ने कहा, बचपन में पढ़ाई के दौरान मुझे दो चीजें सीखने को मिली- सूर्य नमस्कार के माध्यम से व्यायाम और चित्रकला। 11वीं तक नियमिति सूर्य नमस्कार किया। पिता कहते थे कि बुद्धि के साथ शरीर भी अच्छा होना चाहिए।
हम रोज 25 सूर्य नमस्कार करते थे। संघ की शाखाओं में भी जाता था। एक बार जब जनसंघ में पूर्णकालिका कार्य करने की बात आई तो मन में दुविधा थी कि परिवार कैसे चलेगा? ऐसे में पत्नी ने आगे बढ़कर समाधान किया। उन्होंने बीएड कर महापालिका के स्कूल में नौकरी की और मुझे समाज कार्य के लिए स्वतंत्र कर दिया।