कुलपतियों को मिले विवि में अफसरों की नियुक्ति का अधिकार, राज्यपाल ने सीएम योगी को भेजी सिफारिशें
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विश्वविद्यालयों की प्रबंधन प्रणाली को सुधारने के लिए राजभवन के एक उच्चस्तरीय अध्ययन दल ने वहां कुलसचिव समेत सभी प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार कुलपतियों को दिए जाने की सिफारिश की है। राज्यपाल राम नाईक ने अध्ययन दल की सभी सिफारिशें सीएम योगी आदित्यनाथ के पास विचार के लिए भेज दी हैं।
नाईक ने राजभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए प्रमुख सचिव राज्यपाल जूथिका पाटणकर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय अध्ययन दल गठित किया गया था। राजभवन के इतिहास में इस तरह का यह पहला अध्ययन है।
अध्ययन दल ने विवादों के निस्तारण के लिए न्यायाधिकरण की स्थापना या कुलाधिपति कार्यालय को अधिक सशक्त बनाने का सुझाव दिया है। नाईक ने कहा कि वह न्यायाधिकरण की स्थापना के सुझाव से सहमत नहीं हैं, क्योंकि इससे राजभवन को विश्वविद्यालयों के बारे में फीडबैक मिलना कम हो जाएगा।
अध्ययन दल ने कुलपति की शैक्षिक अर्हता, कुलपतियों के लिए खोज समिति के सदस्यों की अर्हताओं व चयन की प्रक्रिया और कुलपति की सेवा शर्तों का राज्य विवि अधिनियम में प्रावधान करने का सुझाव भी दिया है।
कुलपति के मूल्यांकन की प्रक्रिया तय करने पर भी जोर दिया है। कुलसचिव, वित्त नियंत्रक व वित्त अधिकारी और परीक्षा नियंत्रक आदि महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति का अधिकार कुलपति को देने की संस्तुति भी की है। यह भी कहा है कि विवि के प्रशासनिक मामलों में शासन का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए।
संस्तुतियों पर सरकार को लेना है निर्णय
नाईक ने कहा, स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों के तहत होने वाली नियुक्तियों से संबंधित सेवा शर्तों को विवि अधिनियम और परिनियमावली का अंग बनाया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विनियमों के अंगीकरण, सभी कार्य ऑनलाइन करने, नैक मूल्यांकन अनिवार्य करने, कार्य परिषद के सदस्यों का शिक्षा क्षेत्र से अनिवार्य रूप से संबंध होने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थानों के साथ अनुबंध स्थापित किए जाने की संस्तुति भी की गई है। यह पूछे जाने पर राजभवन की तमाम सिफारिशें सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल रखी हैं, राज्यपाल ने कहा कि तमाम कारणों से निर्णय लेने में समय लगता है।
विवि अधिनियम में संशोधनों की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1973 की कई धाराओं में एकरूपता न होने के कारण इसमें संशोधन के लिए उनके विधिक सलाहकार एसएस उपाध्याय की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। इसकी रिपोर्ट भी सरकार के पास भेजी गई है।
फीस निर्धारण के लिए बने कानून
राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय को मान्यता मिलने की प्रत्याशा में कोई पाठ्यक्रम शुरू नहीं करना चाहिए। निजी विश्वविद्यालयों द्वारा मनमानी फीस वसूलने पर अंकुश लगाने के लिए नियम-कानून बनने चाहिए।