पटरी पर आई उच्च शिक्षा, पर टॉप 100 विवि में प्रदेश से एक भी न होना चिंताजनक: राज्यपाल रामनाईक
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राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि कुलपति फर्जी मार्कशीट और डिग्रियों पर रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाएं और शिक्षकों की नियुक्तियों में पारदर्शिता बरतें। प्रदेश में उच्च शिक्षा की स्थिति पटरी पर आ गई, पर अब भी विश्वविद्यालयों में सुधार की बहुत गुंजाइश है। उन्होंने अफसोस जताया कि देश के टॉप 100 विश्वविद्यालयों में प्रदेश का एक भी नहीं है। राज्यपाल ने ये बातें रविवार को राजभवन में आयोजित कुलपतियों के सम्मेलन में कहीं। नाईक ने कुलपतियों को अपने विश्वविद्यालय की स्थिति का मूल्यांकन करने की सीख भी दी।
राज्यपाल ने बतौर कुलाधिपति कुलपतियों से कहा कि परीक्षाओं में नकल, फर्जी अंक तालिका और फर्जी उपाधियों से न सिर्फ विश्वविद्यालय की बदनामी होती है बल्कि प्रदेश की छवि धूमिल होती है। विश्वविद्यालय नेशनल डिपॉजिट स्कीम को लागू करें और डिजिटलाइजेशन पर ध्यान दें, ताकि अंक तालिकाएं व डिग्रियां ऑनलाइन हों और गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रहे।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाए और रिक्त पदों पर नियुक्तियों में आ रही रुकावटें दूर कर नियुक्तियां की जाएं। राज्यपाल ने कहा कि कुलपति शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर आ रही दिक्कतों को दूर करने पर विचार करें। केंद्र सरकार की घोषित शिक्षा नीति पर विचार करें। शिक्षा की गुणवत्ता के साथ शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की आवश्यकता है।
समाज के लिए उपयोगी स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रमों को ही प्राथमिकता दें। जिनकी मांग हो उनमें परिवर्तन करने के लिए समय पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को नैक का मूल्यांकन भी अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। नकलविहीन परीक्षा से छात्रों की संख्या में कमी आयी है, लेकिन इसके बेहतर परिणाम भी सामने आएं है। यह परिवर्तन लोगों की समझ में आना चाहिए।
वित्तीय संसाधन जुटाने को तीन सदस्यीय समिति बनाई
राज्यपाल ने राज्य विश्वविद्यालयों के वित्तीय संसाधन बढ़ाने की आवश्यकता जताई। वित्तीय संसाधन बढ़ाने के सुझाव के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय, कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति की समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति विश्वविद्यालयों के वित्तीय संसाधन बढ़ाने के उपायों पर विचार कर राज्यपाल को रिपोर्ट देगी।
पीएचडी अवॉर्ड करने की तारीख में लाएं एकरूपता
राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी अवॉर्ड करने की तारीख में एकरूपता लाने की आवश्यकता जताई। अभी तक तारीख को लेकर अलग-अलग व्यवस्था है।
उन्होंने एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय लखनऊ और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति की दो सदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। यह समिति सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी अवॉर्ड करने की एक समान तारीख निर्धारित करने पर सुझाव देगी।
आगे आ रही छात्राओं की मेधा
कुलाधिपति ने कहा कि उच्च शिक्षा में छात्राओं ने बाजी मारी है। सत्र 2014-15 में मात्र 40 प्रतिशत डिग्रियां और उपाधियां प्राप्त करने वाली छात्राएं 2018-19 में 66 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
100 प्वॉइंट रोस्टर पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार
सम्मेलन में कई कुलपतियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षक भर्ती को लेकर 100 प्वॉइंट रोस्टर की गाइड लाइन स्पष्ट नहीं है। प्रत्येक राज्य की अपनी अलग आरक्षण व्यवस्था है, ऐसे में आरक्षण लागू करने में असमंजस की स्थिति है।
कुलपतियों ने राज्यपाल से आग्रह किया कि दस प्रतिशत गरीब सवर्णों को प्रवेश देने की गाइड लाइन स्पष्ट नहीं है। प्रवेश देने के लिए कितने पद बढ़ाने हैं, आरक्षण किस प्रकार देना है इसकी स्थिति भी सरकार से स्पष्ट कराएं।
इन विषयों पर हुई चर्चा
सम्मेलन में ई-लर्निंग, शिक्षा में सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार शैक्षिक दिवस, प्रवेश, परीक्षा परिणाम, शिक्षकों की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाएं, ई-लाईब्रेरी और अभिलेखों का डिजिटलाइजेशन विषय पर विचार रखे गए।