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बुलंदशहर तिहरे हत्याकांड में राज्यपाल ने क्षमादान की शक्ति का गलत इस्तेमाल किया : हाई कोर्ट
Tue, 02 Mar 2021 11:27 AM IST
ishwar ashish
मनोज कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
मनोज कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 02 Mar 2021 11:27 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुलंदशहर के तिहरे हत्याकांड के उम्रकैदी को समय पूर्व रिहाई के यूपी सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही उम्रकैदी जैनी सिंह को तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया।
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कोर्ट ने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत क्षमादान की संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करने में अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह फैसला प्रकाशवती सिंह की याचिका को मंजूर करते हुए सुनाया। याचिका में सरकार के 15 मार्च, 2017 के आदेश को चुनौती दी गई थी। आदेश के तहत जैनी को महज पांच साल की सजा काटने के बाद रिहा कर दिया गया था।
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दया समिति ने पूर्व रिहाई पर गौर करने से किया था इनकार
बुलंदशहर के तिहरे हत्याकांड में उम्रकैदी को समय पूर्व रिहाई के यूपी सरकार के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही उम्र कैदी जैनी सिंह को तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति राजीव सिंह की खंडपीठ ने कहा कि तत्कालीन राज्यपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विपरीत क्षमादान की संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल करने में अपने क्षेत्राधिकार का उल्लंघन किया है।
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कोर्ट ने यह फैसला प्रकाशवती सिंह की याचिका को मंजूर करते हुए सुनाया। याचिका में राज्य सरकार के 15 मार्च, 2017 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें राज्य सरकार ने जैनी सिंह को समय पूर्व रिहा करने का आदेश दिया था। इसके बाद सजायाफ्ता जैनी को महज पांच साल की सजा काटने के बाद रिहा कर दिया गया था।
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सेशन कोर्ट ने 2 दिसंबर 2011 को जैनी सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी
याची ने जैनी को गिरफ्तार किए जाने का आग्रह किया है। सेशन कोर्ट ने 2 दिसंबर 2011 को जैनी सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उधर, सजायाफ्ता के अधिवक्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल सजा माफी का आदेश दे सकते हैं। राज्य सरकार के वकील ने यह भी कहा कि 15 मार्च, 2017 के आदेश में कोई अवैधानिकता नहीं है।